{"_id":"5f2daff78ebc3e3cc9752723","slug":"police-script-jpnagar-news-mbd3584398118","type":"story","status":"publish","title_hn":"पुलिस का खेल, दस महीने की प्रताड़ना, सात महीने की जेल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पुलिस का खेल, दस महीने की प्रताड़ना, सात महीने की जेल
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अमरोहा। किशोरी के लापता होने से लेकर उसकी हत्या की स्क्रिप्ट और बरामदगी तक पूरे प्रकरण में करीब 17 महीने बीत गए। इसमें दस महीने पुलिस की जांच चली। जांच के इस खेल में नामजद दो अपहरण के आरोपियों को जेल भेजा गया। परिजनों ने पुलिस के सवाल-जवाबों से प्रताड़ना झेली। समाज में लोगों के ताने सहे। यही नहीं पिता, भाई और रिश्तेदार सात महीने से जेल काट रहे हैं।
किशोरी के अपहरण की सूचना उसके भाई ने आदमपुर थाने में दर्ज कराई थी। उन्होंने पांच लोगों को नामजद आरोपी बनाया था। तत्कालीन इंस्पेक्टर अशोक शर्मा 28 दिसंबर 2019 को तत्कालीन सीओ कुलदीप कुकरेती के पर्यवेक्षण में किशोरी के पिता, भाई और रिश्तेदार को गिरफ्तार किया था। पुलिस का दावा है कि गहनता से पूछताछ के दौरान पिता ने जुर्म का इकबाल करते हुए बताया कि नाबालिग बेटी के गलत संगत में पड़ जाने के कारण उसकी गांव में बदनामी हो रही थी। इससे वह दुखी और कुंठित था। बदनामी के चलते अपने बेटे और रिश्तेदार के साथ किशोरी की हत्या कर दी। अपने भाई के दामाद को फंसाने की योजना बनाई। क्योंकि भाई ने उनके हिस्से की जमीन दबा रखी थी। भाई का दामाद और उसके रिश्तेदार उसका फैसला नहीं होने दे रहे थे। इसलिए भाई के दामाद और उसके रिश्तेदारों पर अपहरण का झूठा मुकदमा लिखवा दिया। जिससे वह जेल चले जाएंगे और फैसले में जमीन मिल जाए।
भाइयों के बीच जमीन के रंजिश में अपहरण की झूठी कहानी तो ठीक है। लेकिन जिस बाप ने बेटी की हत्या की ही नहीं, उसकी निशानदेही पर पुलिस ने तमंचा, कारतूस और जंगल में छिपाए गए कपड़े कैसे बरामद कर लिए। जब गोली चली ही नहीं तो पुलिस ने कहां से बरामद किया तमंचा। जिस कपड़ों को पहनकर किशोरी फरार हो गई थी, वहीं कपड़े पुलिस को कहां से बरामद किए। अब सवाल यह उठता है कि क्या लापता किशोरी की हत्या, शव को बोरी में बंद का मिट्टी भरकर गंगा नदी में फेंकना, निशानदेही पर तमंचा और जिंदा किशोरी को मृत दिखाकर उसके कपड़े बरामद करना सब पुलिस की सोची-समझी स्क्रिप्ट तो नहीं थी ? हालांकि पुलिस कहना है कि पूछताछ के दौरान पिता ने खुद कबूल किया था। इसके बाद न्यायालय में पेशी के दौरान भी उसने जज के सामने वारदात को अंजाम देना इकबाल किया था।
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घटना क्रम
- 06 फरवरी 2019 को किशोरी गायब हो गई थी
- 20 फरवरी 2019 को पांच लोगों के खिलाफ अपहरण की रिपोर्ट दर्ज हुई
- 26 फरवरी 2019 को अपहरण के आरोप में दो लोगों को जेल भेज दिया
- 29 दिसंबर 2019 को पिता, भाई, रिश्तेदार टेलर को हत्या में जेल भेजा
- 06 अगस्त 2020 भाई ने पौरारा गांव में किशोरी को देखा
- 07 अगस्त 2020 को परिवार और गांव के लोग किशोरी को ले आए
किशोरी के न्यायालय में बयान कराएगी पुलिस
अमरोहा। प्रेमी के साथ फरार होने के बाद किशोरी की हत्या के झूठे मुकदमे में पिता-भाई और एक रिश्तेदार जेल काट रहे हैं। ऑनरकिलिंग में सात महीने बाद भी उनकी जमानत नहीं हो सकी है। हत्याकांड के झूठे पर्चों में दर्ज पुलिस की झूठी स्क्रिप्ट जमानत नहीं होने दे रही। अब जब किशोरी मिल गई है, तो पुलिस महकमे हड़कंप मचा है। एसपी डॉ विपिन ताडा, सीओ धनौरा और इंस्पेक्टर पंकज वर्मा ने किशोरी से पूछताछ की। पुलिस को डर है कि कहीं फिर कोई ऐसी चूक न हो जाए। जिससे खाकी को बदनामी झेलनी पड़े। इसलिए पुलिस ने पहले यह वेरीफाई किया, यह वहीं किशोरी है जिसकी हत्या में उसके परिजन जेल में बंद हैं। अब पुलिस सोमवार को न्यायालय में बयान दर्ज कराएगी। इसके बाद उन्हें जेल से बरी कराने की कार्रवाई की जाएगी।
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किशोरी के अपहरण की सूचना उसके भाई ने आदमपुर थाने में दर्ज कराई थी। उन्होंने पांच लोगों को नामजद आरोपी बनाया था। तत्कालीन इंस्पेक्टर अशोक शर्मा 28 दिसंबर 2019 को तत्कालीन सीओ कुलदीप कुकरेती के पर्यवेक्षण में किशोरी के पिता, भाई और रिश्तेदार को गिरफ्तार किया था। पुलिस का दावा है कि गहनता से पूछताछ के दौरान पिता ने जुर्म का इकबाल करते हुए बताया कि नाबालिग बेटी के गलत संगत में पड़ जाने के कारण उसकी गांव में बदनामी हो रही थी। इससे वह दुखी और कुंठित था। बदनामी के चलते अपने बेटे और रिश्तेदार के साथ किशोरी की हत्या कर दी। अपने भाई के दामाद को फंसाने की योजना बनाई। क्योंकि भाई ने उनके हिस्से की जमीन दबा रखी थी। भाई का दामाद और उसके रिश्तेदार उसका फैसला नहीं होने दे रहे थे। इसलिए भाई के दामाद और उसके रिश्तेदारों पर अपहरण का झूठा मुकदमा लिखवा दिया। जिससे वह जेल चले जाएंगे और फैसले में जमीन मिल जाए।
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भाइयों के बीच जमीन के रंजिश में अपहरण की झूठी कहानी तो ठीक है। लेकिन जिस बाप ने बेटी की हत्या की ही नहीं, उसकी निशानदेही पर पुलिस ने तमंचा, कारतूस और जंगल में छिपाए गए कपड़े कैसे बरामद कर लिए। जब गोली चली ही नहीं तो पुलिस ने कहां से बरामद किया तमंचा। जिस कपड़ों को पहनकर किशोरी फरार हो गई थी, वहीं कपड़े पुलिस को कहां से बरामद किए। अब सवाल यह उठता है कि क्या लापता किशोरी की हत्या, शव को बोरी में बंद का मिट्टी भरकर गंगा नदी में फेंकना, निशानदेही पर तमंचा और जिंदा किशोरी को मृत दिखाकर उसके कपड़े बरामद करना सब पुलिस की सोची-समझी स्क्रिप्ट तो नहीं थी ? हालांकि पुलिस कहना है कि पूछताछ के दौरान पिता ने खुद कबूल किया था। इसके बाद न्यायालय में पेशी के दौरान भी उसने जज के सामने वारदात को अंजाम देना इकबाल किया था।
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घटना क्रम
- 06 फरवरी 2019 को किशोरी गायब हो गई थी
- 20 फरवरी 2019 को पांच लोगों के खिलाफ अपहरण की रिपोर्ट दर्ज हुई
- 26 फरवरी 2019 को अपहरण के आरोप में दो लोगों को जेल भेज दिया
- 29 दिसंबर 2019 को पिता, भाई, रिश्तेदार टेलर को हत्या में जेल भेजा
- 06 अगस्त 2020 भाई ने पौरारा गांव में किशोरी को देखा
- 07 अगस्त 2020 को परिवार और गांव के लोग किशोरी को ले आए
किशोरी के न्यायालय में बयान कराएगी पुलिस
अमरोहा। प्रेमी के साथ फरार होने के बाद किशोरी की हत्या के झूठे मुकदमे में पिता-भाई और एक रिश्तेदार जेल काट रहे हैं। ऑनरकिलिंग में सात महीने बाद भी उनकी जमानत नहीं हो सकी है। हत्याकांड के झूठे पर्चों में दर्ज पुलिस की झूठी स्क्रिप्ट जमानत नहीं होने दे रही। अब जब किशोरी मिल गई है, तो पुलिस महकमे हड़कंप मचा है। एसपी डॉ विपिन ताडा, सीओ धनौरा और इंस्पेक्टर पंकज वर्मा ने किशोरी से पूछताछ की। पुलिस को डर है कि कहीं फिर कोई ऐसी चूक न हो जाए। जिससे खाकी को बदनामी झेलनी पड़े। इसलिए पुलिस ने पहले यह वेरीफाई किया, यह वहीं किशोरी है जिसकी हत्या में उसके परिजन जेल में बंद हैं। अब पुलिस सोमवार को न्यायालय में बयान दर्ज कराएगी। इसके बाद उन्हें जेल से बरी कराने की कार्रवाई की जाएगी।