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पीएफ घोटाले में बिजली निगम कर्मियों के पांच करोड़ फंसे
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अमरोहा। बिजली निगम के जीपीएफ और सीपीएफ घोटाला से जिले के इंजीनियर और कर्मचारी भी प्रभावित हैं। कर्मचारी संगठनों के मुताबिक लगभग पांच करोड़ रुपये फंस गए हैं। इसमें अधीक्षण अभियंता, अधिशासी अभियंता, एसडीओ और जेई के अलावा कर्मचारी शामिल हैं। अकेले अधीक्षण अभियंता और अधिशासी अभियंता प्रथम का 40-40 लाख रुपये फंसे हैं।
जिले के बिजली वितरण मंडल में इंजीनियरों समेत करीब तीन सौ कर्मचारी कार्यरत हैं। जीपीएफ और सीपीएफ घोटाला के बाद इन लोगों की बेचैनी बढ़ गई है। फिलहाल विभिन्न संगठनों से जुड़े लोग एक प्लेटफॉर्म पर आ गए हैं। विरोध प्रदर्शन चल रहा है। बुुधवार को अधीक्षण अभियंता कार्यालय परिसर में धरना प्रदर्शन किया। उन्होंने जीपीएफ की गारंटी के लिए आवाज बुलंद की। अधिशासी अभियंता पीपी सिंह ने लगभग 40 लाख रुपये जमा किए थे। दरअसल उनका रिटायरमेंट है। ऐसे में इन्होंने निर्धारित अंश से अधिक रुपये जमा करने शुरू कर दिए। ऐसे में यह रकम कुल 40 लाख रुपये हो रही है। वहीं अधीक्षण अभियंता रजत जुनेजा का भी 40 लाख रुपये बताया जा रहा है। आंदोलन स्थल पर इंजीनियरों ने बताया कि अब कुछ सूझ नहीं रहा है कि आखिर क्या करें। इन लोगों ने बताया कि परिवार के लोगों की चिंता बढ़ गई है। सुरक्षित समझ कर जमा कर रहे थे, लेकिन सरकार और प्रबंधन की नीयत में खोट ने हम लोगों को सड़क पर खड़ा कर दिया है। बिजली कर्मचारी मोर्चा के पश्चिमांचल के महामंत्री सुरेश वर्मा ने कहा कि इंजीनियर और कर्मचारियों ने 10-10 लाख रुपये से अधिक जमा किए हैं। सरकार और प्रबंधन की नीयत में खोट है। सरकार को रकम की वापसी के लिए गारंटी लेनी होगी।
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जिले के बिजली वितरण मंडल में इंजीनियरों समेत करीब तीन सौ कर्मचारी कार्यरत हैं। जीपीएफ और सीपीएफ घोटाला के बाद इन लोगों की बेचैनी बढ़ गई है। फिलहाल विभिन्न संगठनों से जुड़े लोग एक प्लेटफॉर्म पर आ गए हैं। विरोध प्रदर्शन चल रहा है। बुुधवार को अधीक्षण अभियंता कार्यालय परिसर में धरना प्रदर्शन किया। उन्होंने जीपीएफ की गारंटी के लिए आवाज बुलंद की। अधिशासी अभियंता पीपी सिंह ने लगभग 40 लाख रुपये जमा किए थे। दरअसल उनका रिटायरमेंट है। ऐसे में इन्होंने निर्धारित अंश से अधिक रुपये जमा करने शुरू कर दिए। ऐसे में यह रकम कुल 40 लाख रुपये हो रही है। वहीं अधीक्षण अभियंता रजत जुनेजा का भी 40 लाख रुपये बताया जा रहा है। आंदोलन स्थल पर इंजीनियरों ने बताया कि अब कुछ सूझ नहीं रहा है कि आखिर क्या करें। इन लोगों ने बताया कि परिवार के लोगों की चिंता बढ़ गई है। सुरक्षित समझ कर जमा कर रहे थे, लेकिन सरकार और प्रबंधन की नीयत में खोट ने हम लोगों को सड़क पर खड़ा कर दिया है। बिजली कर्मचारी मोर्चा के पश्चिमांचल के महामंत्री सुरेश वर्मा ने कहा कि इंजीनियर और कर्मचारियों ने 10-10 लाख रुपये से अधिक जमा किए हैं। सरकार और प्रबंधन की नीयत में खोट है। सरकार को रकम की वापसी के लिए गारंटी लेनी होगी।
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