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Amroha News: जान जोखिम में डाल बल्लियों के सहारे हो रहे नाला पार
Thu, 28 Aug 2025 02:39 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अमरोहा
संवाद न्यूज एजेंसी, अमरोहा
Updated Thu, 28 Aug 2025 02:39 AM IST
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बाढ़ से निकलते गजरौला के शीशों वाली गांव के ग्रामीण। स्रोत ग्रामीण
गजरौला। जान जोखिम में डाल कर लकड़ी की बल्लियों के सहारे कई गांव के ग्रामीण और बच्चे नाला पार हो रहे हैं। यह नाला सड़क कट जाने के कारण बन गया है। नाला पार करते समय पैर फिसल जाने का डर बना रहता है।
चकनवाला गंगा तट बांध से शीशों वाली गांव तक पक्की सड़क है। इसी सड़क पर पक्का पुल है। बीते दिनों गंगा में आई भीषण बाढ़ के कारण चकनवाला गांव के निकट सड़क कट गई। उस पर गहरा नाला बन गया है। जो इस समय परेशानी का सबब बना है। कटान के कारण उसकी चौड़ाई भी काफी हो गई है। उसमें चार से पांच फीट पानी भरा है। गंगा में बुधवार को भले ही बाढ़ का पानी कम हुआ, मगर इतना कम नहीं हुआ कि उसे आसानी से पार किया जा सके, जबकि टापू व गंगा की रेती में बसे शीशों वाली, भुड्डी वाली, मंदिर वाली, जहांगीर वाली, जाटों वाली समेत 20 गांव बसे हैं।
जिनके गांवों के ग्रामीण दैनिक कार्यों के लिए चकनवाला, गजरौला आदि को आते हैं। साथ ही स्कूली बच्चे भी गुजरते हैं। उनको नाला पार करने में आ रही परेशानी दूर करने के लिए बल्लियों को एक साथ बांध कर लगाया गया। हालांकि इससे गुजरना खतरे से खाली नहीं है। शीशों वाली ग्राम प्रधान के पति हरपाल सिंह ने बताया कि नाले पर बल्लियां लगा देने से स्कूली बच्चे और ग्रामीण उससे पार हो सकते हैं।
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चकनवाला गंगा तट बांध से शीशों वाली गांव तक पक्की सड़क है। इसी सड़क पर पक्का पुल है। बीते दिनों गंगा में आई भीषण बाढ़ के कारण चकनवाला गांव के निकट सड़क कट गई। उस पर गहरा नाला बन गया है। जो इस समय परेशानी का सबब बना है। कटान के कारण उसकी चौड़ाई भी काफी हो गई है। उसमें चार से पांच फीट पानी भरा है। गंगा में बुधवार को भले ही बाढ़ का पानी कम हुआ, मगर इतना कम नहीं हुआ कि उसे आसानी से पार किया जा सके, जबकि टापू व गंगा की रेती में बसे शीशों वाली, भुड्डी वाली, मंदिर वाली, जहांगीर वाली, जाटों वाली समेत 20 गांव बसे हैं।
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जिनके गांवों के ग्रामीण दैनिक कार्यों के लिए चकनवाला, गजरौला आदि को आते हैं। साथ ही स्कूली बच्चे भी गुजरते हैं। उनको नाला पार करने में आ रही परेशानी दूर करने के लिए बल्लियों को एक साथ बांध कर लगाया गया। हालांकि इससे गुजरना खतरे से खाली नहीं है। शीशों वाली ग्राम प्रधान के पति हरपाल सिंह ने बताया कि नाले पर बल्लियां लगा देने से स्कूली बच्चे और ग्रामीण उससे पार हो सकते हैं।
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