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बारिश में धान की फसल बर्बाद, अब कैसे होंगे बेटी के हाथ पीले
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गजरौला क्षेत्र सिर पर धान की गड्डी लेकर जाता किसान।
- फोटो : JPNAGAR
गजरौला। बेटी की शादी का दिल में अरमान लिए किसान पर तो जैसे आसमान ही टूट पड़ा। बेटी के हाथ पीले करने लायक भी धान खेत में नहीं बचा है। नाउम्मीद किसान ने वर पक्ष से एक साल के लिए शादी आगे बढ़ाने की गुजारिश की है। वहीं, किसान फसल खराब होने और बेटी की शादी की नहीं कर पाने से टूट चुका है और उसने बिस्तर पकड़ लिया है। हालांकि उसका कहना है कि आगे फसल अच्छी हुई तो अगले साल बेटी को विदा करेगा। फिलहाल बेटे खेत में भीगकर खराब हो चुकी फसल से बचा खुचा धान समेटकर सुखा रहे हैं।
क्षेत्र के गांव चक निवासी किसान ओमकार खड़गवंशी ने 14 बीघे का खेत बटाई पर लिया। खेत मोहम्मदाबाद के निकट हाईवे किनारे पश्चिम की दिशा में है। जिसमें उसने धान की फसल रोपी। फसल को तैयार करने में यूरिया, देसी खाद, मजदूरी और सिंचाई को जोड़कर 40 हजार रुपये से अधिक की लागत आई। अब फसल पक कर तैयार हो गई। किसान परिवार काटने की तैयारी कर रहा था। इसी बीच 17 और 18 अक्तूबर को दो दिन हुई मूसलाधार बारिश से खेत में घुटने तक पानी भर गया। उधर बारिश के साथ चली तेज हवा धान की पकी खड़ी फसल जमीन पर लिटा दी। कुछ पानी को जमीन सोखती कि 24 अक्तूबर की रात फिर मूसलाधार बारिश हो गई। जिससे खेत पानी से लबालब हो गया। पकी फसल बारिश और आंधी से तबाह होती देख किसान की हालत बिगड़ गई। बीमार हो जाने के कारण उसने चारपाई पकड़ ली है। किसान के बेटों सुलेंद्र व रोहित का कहना है कि खेत में लागत 40 हजार आई है, जबकि फसल 20 हजार रुपये की भी नहीं निकलेगी। इस सदमे से उनके पिता उठ नहीं पा रहे हैं। उन्होंने चारपाई पकड़ ली है। परिवार का विचार था कि खेत में धान की फसल अच्छी है। जवान बेटी रीना के हाथ पीले कर देंगे। इसके लिए कांकाठेर में वर भी तलाश कर लिया है, लेकिन तबाह हुई फसल की वजह से घर में इतना इंतजाम नहीं है कि बेटी को विदा कर सकें। लिहाजा इस बार शादी का विचार त्याग दिया है।
अंकुरित होने लगी पानी में डूबी फसल
गजरौला। आंधी और मेह से तबाह हुई धान की फसल दस दिन से पानी में डूबी होने के कारण अंकुरित होने लगी है। सुलेंद्र व रोहित का कहना है कि एक दो दिन में फसल को काटा नहीं गया तो फिर पुआल के अलावा कुछ नहीं बचेगा। अभी तो अंकुरित ही होरहा है बाद में चावल भी सड़ने लगेगा। इसलिए जल्दी से जल्दी फसल को काटने में लगे हैं। मंगलवार को दोनों भाई खेत में आठ मजदूरों को लेकर आए थे। दोनों भाइयों का कहना है कि खेत में घुटनों तक भरे पानी में जोक हो गई हैं। जिसके चलते सस्ते में मजदूर तैयार नहीं हुए। पांच सौ रुपये प्रति महिला मजदूरों को लाए हैं। संवाद
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काट कर चारपाई पर रखनी पड़ती है फसल
गजरौला। धान के खेत में घुटनों तक पानी भरा होने के कारण फसल काटने में दिक्कत सामने आ रही है। जितनी काटते हैं, उसे गड्डी होने तक चारपाई पर इकट्ठा करते हैं। इसके बाद 100 मीटर दूर जाकर हाईवे किनारे लाकर रखते हैं। यहां पानी सूख जाने पर बुग्गी में लादकर घर ले जाते हैं। किसान ओमकार के बेटों सुलेंद्र व रोहित का कहना है कि उन्होंने अपनी जिंदगी में ऐसा हाल कभी नहीं देखा। जब किसान की धान की फसल बारिश में तबाह हुई हो। संवाद
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क्षेत्र के गांव चक निवासी किसान ओमकार खड़गवंशी ने 14 बीघे का खेत बटाई पर लिया। खेत मोहम्मदाबाद के निकट हाईवे किनारे पश्चिम की दिशा में है। जिसमें उसने धान की फसल रोपी। फसल को तैयार करने में यूरिया, देसी खाद, मजदूरी और सिंचाई को जोड़कर 40 हजार रुपये से अधिक की लागत आई। अब फसल पक कर तैयार हो गई। किसान परिवार काटने की तैयारी कर रहा था। इसी बीच 17 और 18 अक्तूबर को दो दिन हुई मूसलाधार बारिश से खेत में घुटने तक पानी भर गया। उधर बारिश के साथ चली तेज हवा धान की पकी खड़ी फसल जमीन पर लिटा दी। कुछ पानी को जमीन सोखती कि 24 अक्तूबर की रात फिर मूसलाधार बारिश हो गई। जिससे खेत पानी से लबालब हो गया। पकी फसल बारिश और आंधी से तबाह होती देख किसान की हालत बिगड़ गई। बीमार हो जाने के कारण उसने चारपाई पकड़ ली है। किसान के बेटों सुलेंद्र व रोहित का कहना है कि खेत में लागत 40 हजार आई है, जबकि फसल 20 हजार रुपये की भी नहीं निकलेगी। इस सदमे से उनके पिता उठ नहीं पा रहे हैं। उन्होंने चारपाई पकड़ ली है। परिवार का विचार था कि खेत में धान की फसल अच्छी है। जवान बेटी रीना के हाथ पीले कर देंगे। इसके लिए कांकाठेर में वर भी तलाश कर लिया है, लेकिन तबाह हुई फसल की वजह से घर में इतना इंतजाम नहीं है कि बेटी को विदा कर सकें। लिहाजा इस बार शादी का विचार त्याग दिया है।
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अंकुरित होने लगी पानी में डूबी फसल
गजरौला। आंधी और मेह से तबाह हुई धान की फसल दस दिन से पानी में डूबी होने के कारण अंकुरित होने लगी है। सुलेंद्र व रोहित का कहना है कि एक दो दिन में फसल को काटा नहीं गया तो फिर पुआल के अलावा कुछ नहीं बचेगा। अभी तो अंकुरित ही होरहा है बाद में चावल भी सड़ने लगेगा। इसलिए जल्दी से जल्दी फसल को काटने में लगे हैं। मंगलवार को दोनों भाई खेत में आठ मजदूरों को लेकर आए थे। दोनों भाइयों का कहना है कि खेत में घुटनों तक भरे पानी में जोक हो गई हैं। जिसके चलते सस्ते में मजदूर तैयार नहीं हुए। पांच सौ रुपये प्रति महिला मजदूरों को लाए हैं। संवाद
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काट कर चारपाई पर रखनी पड़ती है फसल
गजरौला। धान के खेत में घुटनों तक पानी भरा होने के कारण फसल काटने में दिक्कत सामने आ रही है। जितनी काटते हैं, उसे गड्डी होने तक चारपाई पर इकट्ठा करते हैं। इसके बाद 100 मीटर दूर जाकर हाईवे किनारे लाकर रखते हैं। यहां पानी सूख जाने पर बुग्गी में लादकर घर ले जाते हैं। किसान ओमकार के बेटों सुलेंद्र व रोहित का कहना है कि उन्होंने अपनी जिंदगी में ऐसा हाल कभी नहीं देखा। जब किसान की धान की फसल बारिश में तबाह हुई हो। संवाद