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Amroha News: नाम का स्टेडियम, खिलाड़ियों से खेल
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अमरोहा। इसे शासन की अनदेखी कहें या फिर खिलाड़ियों का दुर्भाग्य। मालीखेड़ा में बने स्टेडियम को खेल विभाग के सुपुर्द हुए 11 महीने बीत चुके हैं, लेकिन सुविधाओं का अभाव आज तक है। अव्यवस्थाएं हावी हैं। इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि स्टेडियम में विकास और खुल सुविधाओं के लिए कोई बजट पास नहीं हो सका है। ऐसे में खिलाड़ियों के भविष्य को संवारने के दावे यहां हवाई साबित हो रहे हैं। यहां अभी पवेलियन और क्रीड़ा अधिकारी का आवास ही बन सके हैं।
अमरोहा के मालीखेड़ा गांव में पास 53 बीघा जमीन में 10.69 करोड़ लागत से स्पोर्ट्स स्टेडियम का निर्माण हुआ। पांच जनवरी 2018 को पूर्व क्रिकेटर चेतन चौहान ने इसका शिलान्यास किया था। फरवरी 2023 में यह स्टेडियम क्रीड़ा विभाग के सुपुर्द कर दिया गया। उम्मीद थी कि जल्द ही यहां खिलाड़ियों को बेहतर सुविधा मिलेंगी। उन्हें अभ्यास करने का मौका मिलेगा। लेकिन, उनकी उम्मीदें सुविधाओं के इंतजार में दब गई हैं। लगभग 11 महीने बाद भी स्टेडियम के नाम पर अभी तक कोई बजट नहीं मिल सका है। जबकि, विभागीय अधिकारियों से समय-समय पर प्रस्ताव तो भेज जाते रहे हैं, लेकिन उनकी अनदेखी की जाती रही।
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प्रशासन की मदद से तैयार हो रही पिच
लगातार स्टेडियम में पिच के निर्माण के लिए बजट की मांग की गई, लेकिन इसे अनदेखा कर दिया गया। करीब डेढ़ महीने पहले खेल विभाग ने जिला प्रशासन की मदद से क्रिकेट पिच बनाने का कार्य शुरू कराया। पिच पर पत्थर डालने के अलावा डिडौली क्षेत्र की पूरनपुर झील से काली मिट्टी बनाकर पिच बनाई गई। अब पिच तो तैयार है, लेकिन उसके सूखने का इंतजार किया जा रहा है।
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बिना कोच कैसे निखरेगी प्रतिभाएं
कहा जाए तो स्टेडियम सफेद हाथी बन गया है। खेल प्रतिभाओं को निखारने के दावे हवाई साबित हो रहे हैं। पिच बनाने की कवायद शुरू हुई, लेकिन अभी कोच उपलब्ध नहीं हो सका है। इसके अलावा कबड्डी, वॉलीबाॅल के कोच भी नहीं मिल सके हैं। जबकि, जिले में क्रिकेट के अलाव अन्य खेलों की प्रतिभाएं कम नहीं हैं। ऐसे में उन्हें स्टेडियम के होते हुए भी सुविधाओं के लिए तरसना पड़ रहा है।
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इंडोर गेम के लिए नहीं मिली कोई सुविधा
स्टेडियम में आउट डोर के साथ-साथ इंडोर गेम भी आज तक शुरू नहीं हो सके हैं। यहां सुविधाएं उपलब्ध हो जाएं तो बास्केट बॉल, बैडमिंटन, टेबल टेनिस के खेल शुरू हो सकते हैं। इसके अलावा तैराकी करने वालों का सपना तो टूटता ही जा रहा है। यहां उसके लिए कोई पहल ही नहीं हो सकी है।
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यह सही है कि अभी तक स्टेडियम में पूरी सुविधाओं के लिए बजट पास नहीं हो सका है। हालांकि, समय-समय पर थोड़ी-थोड़ी राशि व सामग्री प्रस्ताव के अनुसार मिल जाती है। समय-समय पर यहां विभिन्न खेलों के ट्रायल भी होते रहते हैं। बैडमिंटन, वाॅलीबाॅल कोर्ट आदि तैयार नहीं हैं। तैराकी के लिए स्विमिंग पूल का प्रस्ताव बनाकर भेजा गया है। जल्द ही हाई जंप के लिए गद्दे मिलने की संभावना है। पिच लगभग तैयार हो चुकी है। इसके सूखते ही क्रिकेट शुरू करा दिया जाएगा। देशकांत त्यागी, जिला क्रीड़ा अधिकारी।
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अमरोहा के मालीखेड़ा गांव में पास 53 बीघा जमीन में 10.69 करोड़ लागत से स्पोर्ट्स स्टेडियम का निर्माण हुआ। पांच जनवरी 2018 को पूर्व क्रिकेटर चेतन चौहान ने इसका शिलान्यास किया था। फरवरी 2023 में यह स्टेडियम क्रीड़ा विभाग के सुपुर्द कर दिया गया। उम्मीद थी कि जल्द ही यहां खिलाड़ियों को बेहतर सुविधा मिलेंगी। उन्हें अभ्यास करने का मौका मिलेगा। लेकिन, उनकी उम्मीदें सुविधाओं के इंतजार में दब गई हैं। लगभग 11 महीने बाद भी स्टेडियम के नाम पर अभी तक कोई बजट नहीं मिल सका है। जबकि, विभागीय अधिकारियों से समय-समय पर प्रस्ताव तो भेज जाते रहे हैं, लेकिन उनकी अनदेखी की जाती रही।
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प्रशासन की मदद से तैयार हो रही पिच
लगातार स्टेडियम में पिच के निर्माण के लिए बजट की मांग की गई, लेकिन इसे अनदेखा कर दिया गया। करीब डेढ़ महीने पहले खेल विभाग ने जिला प्रशासन की मदद से क्रिकेट पिच बनाने का कार्य शुरू कराया। पिच पर पत्थर डालने के अलावा डिडौली क्षेत्र की पूरनपुर झील से काली मिट्टी बनाकर पिच बनाई गई। अब पिच तो तैयार है, लेकिन उसके सूखने का इंतजार किया जा रहा है।
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बिना कोच कैसे निखरेगी प्रतिभाएं
कहा जाए तो स्टेडियम सफेद हाथी बन गया है। खेल प्रतिभाओं को निखारने के दावे हवाई साबित हो रहे हैं। पिच बनाने की कवायद शुरू हुई, लेकिन अभी कोच उपलब्ध नहीं हो सका है। इसके अलावा कबड्डी, वॉलीबाॅल के कोच भी नहीं मिल सके हैं। जबकि, जिले में क्रिकेट के अलाव अन्य खेलों की प्रतिभाएं कम नहीं हैं। ऐसे में उन्हें स्टेडियम के होते हुए भी सुविधाओं के लिए तरसना पड़ रहा है।
इंडोर गेम के लिए नहीं मिली कोई सुविधा
स्टेडियम में आउट डोर के साथ-साथ इंडोर गेम भी आज तक शुरू नहीं हो सके हैं। यहां सुविधाएं उपलब्ध हो जाएं तो बास्केट बॉल, बैडमिंटन, टेबल टेनिस के खेल शुरू हो सकते हैं। इसके अलावा तैराकी करने वालों का सपना तो टूटता ही जा रहा है। यहां उसके लिए कोई पहल ही नहीं हो सकी है।
यह सही है कि अभी तक स्टेडियम में पूरी सुविधाओं के लिए बजट पास नहीं हो सका है। हालांकि, समय-समय पर थोड़ी-थोड़ी राशि व सामग्री प्रस्ताव के अनुसार मिल जाती है। समय-समय पर यहां विभिन्न खेलों के ट्रायल भी होते रहते हैं। बैडमिंटन, वाॅलीबाॅल कोर्ट आदि तैयार नहीं हैं। तैराकी के लिए स्विमिंग पूल का प्रस्ताव बनाकर भेजा गया है। जल्द ही हाई जंप के लिए गद्दे मिलने की संभावना है। पिच लगभग तैयार हो चुकी है। इसके सूखते ही क्रिकेट शुरू करा दिया जाएगा। देशकांत त्यागी, जिला क्रीड़ा अधिकारी।