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Amroha News: गम-ए-हुसैन में सीनाजनी कर किया मातम

Mon, 07 Jul 2025 02:17 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, अमरोहा
संवाद न्यूज एजेंसी, अमरोहा Updated Mon, 07 Jul 2025 02:17 AM IST
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mourned by beating the chest in grief of Husain
अमरोहा। दस मुहर्रम को शहर में ताजिये का जुलूस निकाला गया। अजादारों ने जुलूस निकाल कर तुरबतें बिजनौर रोड स्थित कर्बला और लाइनपार स्थित कर्बला में दफन की। अजाखानों में मजलिसों का दौर चला। अजादारों ने गमे हुसैन में सीनाजनी कर मातम किया।
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10 मुहर्रम आशूरा वह दिन है, जब कर्बला के मैदान में हजरत इमाम हुसैन के 72 साथियों के साथ यजीद की एक बड़ी फौज जिसमें लाखों सिपाही थे, उन्होंने जंग की थी। उस समय जंग में एक-एक करके मैदान में जाते थे। सबसे पहले इमाम हुसैन पर हजरत हुर्र जो पहले यजीद की फौज में थे, इमाम हुसैन से प्रभावित होकर उनकी फौज में शामिल हुए थे, ने अपनी जान दी। इसके बाद दोस्त और अंसार शहीद होते गए। खेमों में बच्चे तीन रोज से भूखे प्यासे थे।
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इमाम हुसैन की बेटी हजरत सकीना ने अपने चाचा अब्बास से कहा कि मुझे प्यास लगी थी। हजरत अब्बास जब पानी भर के चले तो दुश्मन के फौजियों ने उन्हें शहीद कर दिया। आज इमाम हुसैन और उनके परिवार वालों की याद में ताजिये निकाले जाते हैं और दुनिया में उनका गम मनाती है। इंसान को बेदार तो हो लेने दो, हर कौम पुकारेगी हमारे हैं हुसैन। इमाम हुसैन ने अपनी कुर्बानी देकर रसूल अकरम के इस्लाम को जिंदा कर दिया।
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रविवार सुबह छह बजे मोहल्ला गुजरी स्थित इमामबाड़ा नूरन से तुरबतों का जुलूस निकाला गया। नौबतखाना से होता हुआ यह जुलूस बिजनौर रोड स्थित कर्बला पहुंचा। वहां पर तुरबतों को दफन किया गया। आठ बजे मोहल्ला दानिशमंदान स्थित इमामबाड़े से भी तुरबतों का जुलूस निकाला गया। यह जुलूस रेलवे लाइन पार कर दानिशमंदान की कर्बला में जाकर तुरबतों को दफन किया गया। इसके बाद मोहल्ला हक्कानी, सट्टी, जाफरी, काजीजादा, पचदरा, गुजरी, काजी गली के इमामबाड़ों से भी तुरबतों का जुलूस निकाला गया। सभी तुरबतें बिजनौर रोड स्थित कर्बला में जाकर दफन हुए।
मोहल्ला शफातपोता के अजाखाना से भी तुरबतों का जुलूस निकाला गया। जुलूस में तुरबतों के साथ दुलदुल भी था। यह जुलूस चाहगौरी से होता हुआ वापस शफातपोता में आकर खत्म हुआ। दोपहर दो बजे से ताजियों के जुलूस निकलने शुरू हुए। लकड़ा, हक्कानी, सट्टी का ताजिया नौबतखाने के चौराहे से होता हुआ खारी कुआं पहुंचा, जहां से जाफरी व सद्दो के ताजिए जुलूस में शामिल हो गए। उसके बाद सभी मोहल्लों से ताजिए जुलूस में शामिल होते रहे। शाम को सभी ताजिए अपने-अपने इमामबाड़े में शामिल हो गए।

अजाखाना शफातपोता में निकाला गया सबसे बड़ा जुलूस
सबसे बड़ा ताजिया अजाखाना शफातपोता से निकाला गया। इस ताजिया की गश्त के लिए बिजली विभाग व दूर संचार विभाग के कर्मचारियों ने तारों को ऊंचा किया। अजाखानों में मजलिसें हुई और अजादारों ने सीनाजनी कर मातम किया। अंजुमन-ए-तहफ्फुजे अजादारी की कमेटी के तत्वावधान में अलग-अलग मोहल्लों से जुलूस बरामद किया गया। डीएम द्वारा जुलूस अजा के लिए नामित कमेटी सदस्य लियाकत अली, बाकर रजा नकवी, जिया एजाज, नदीम नकवी, कासिम जैदी आदि मौजूद रहे। जुलूस का संचालन अंजुमन रजा काराने हुसैनी ने किया। इसमें काइद गुलाम सज्जाद, जनरल सेक्रेटरी खुर्शीद हैदर जैदी, अख्तर अब्बास अप्पू, वसीम जैदी, शाने मुजतबा, इमदाद आब्दी, सलीम जैदी आदि शामिल रहे।
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