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मनरेगा फर्जीवाड़ा : तीन पंचायत सचिव समेत आठ के खिलाफ एफआईआर दर्ज

Fri, 04 Apr 2025 01:51 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, अमरोहा
संवाद न्यूज एजेंसी, अमरोहा Updated Fri, 04 Apr 2025 01:51 AM IST
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MNREGA fraud: FIR lodged against eight people including three panchayat secretaries
डिडौली (अमरोहा)।
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पलौला गांव में क्रिकेटर मोहम्मद शमी की बहन शबीना, बहनोई गजनबी व अन्य परिवार के सदस्यों समेत 18 लोगों को मनरेगा मजदूरी दिलाने के मामले में जोया ब्लॉक के तीन तत्कालीन ग्राम पंचायत सचिव, एपीओ और लेखाकार समेत आठ लोगों के खिलाफ डिडौली कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज की गई है। आरोपियों में तत्कालीन सेवामुक्त रोजगार सेवक, तकनीकी सहायक और कंप्यूटर ऑपरेटर भी शामिल है। सभी कर्मचारियों पर विश्वासघात करने का आरोप है।
मोहम्मद शमी की बहन शबीना की सास ही मनरेगा फर्जीवाड़े से जुड़े गांव पलौला की प्रधान हैं। 27 मार्च को फर्जीवाड़ा सामने आया था। इसके बाद जांच कमेटी ने बुधवार को रिपोर्ट डीएम को सौंपी थी। जांच कमेटी ने तत्कालीन बीडीओ व चार सचिवों समेत कुल 11 लोगों को फर्जीवाड़े का दोषी माना है। इसके बाद डीएम निधि गुप्ता वत्स ने एक बीडीओ प्रतिभा अग्रवाल और एक सचिव पर विभागीय कार्रवाई के लखनऊ को पत्र भेजा है।
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साथ ही तीन सचिवों समेत आठ कर्मियों पर एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश दिए। जांच में प्रधान के परिवार के आठ लोगों समेत कुल 18 लोगों द्वारा बिना मजदूरी किए 8.68 लाख रुपये की रकम निकालने की बात सामने आई। जांच कमेटी ने मामले में एक तत्कालीन बीडीओ प्रतिभा अग्रवाल को भी दोषी माना है। इसके अलावा पंचायत सचिव उमा, अंजुम और पृथ्वी, एपीओ ब्रजभान सिंह, तत्कालीन रोजगार सेवक झम्मन लाल, कंप्यूटर ऑपरेटर शराफत अली, तकनीकी सहायक अजय निमेष और लेखाकार विजेंद्र सिंह को दोषी पाया है।
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बृहस्पतिवार की शाम जोया ब्लॉक बीडीओ लोकचंद ने कर्मचारियों के खिलाफ डिडौली कोतवाली में तहरीर देकर विश्वासघात का आरोप लगाया। जिसके आधार पर पुलिस ने तत्कालीन ग्राम पंचायत अधिकारी पृथ्वी सिंह, अंजुम, हुमा परवीन, तत्कालीन लेखाकार विजेंद्र सिंह, तत्कालीन कंप्यूटर ऑपरेटर मनरेगा शराफत अली, तकनीकी सहायक अजय निमेष, तत्कालीन एपीओ बृजभान सिंह और सेवा मुक्त ग्राम रोजगार सेवक झम्मन सिंह के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है। मामले में तीन पंचायत सचिव सहित आठ कर्मचारियों के खिलाफ पहले ही निलंबन की कार्रवाई की जा चुकी है।

इस धारा में दर्ज हुई रिपोर्ट :
पुलिस के मुताबिक ब्लॉक के कर्मचारियों के खिलाफ बीएनएस की धारा 316(5) के तहत रिपोर्ट दर्ज की गई है।
उम्रकैद तक की सजा :
अधिवक्ता इफ्तखार सैफी ने बताया कि बीएनएस की धारा 316(5) लोक सेवकों, बैंकरों, व्यापारियों और संपत्ति से जुड़े अन्य पेशेवरों के लिए विशेष रूप से कठोर दंड निर्धारित करती है। यदि वे आपराधिक विश्वासघात करते हैं, तो उन्हें आजीवन कारावास या 10 साल तक की सजा और जुर्माना दोनों हो सकता है।
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