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Ukraine Crisis : तीन दिन से भारतीय दूतावास के पास स्कूल में फंसे हैं अमरोहा, बिजनौर और मुरादाबाद के कई छात्र

Sun, 27 Feb 2022 01:02 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो अमर उजाला नेटवर्क, अमरोहा
अमर उजाला नेटवर्क, अमरोहा Published by: मुरादाबाद ब्यूरो Updated Sun, 27 Feb 2022 01:02 AM IST
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Many students of Amroha, Bijnor and Moradabad are trapped in the school near the Indian Embassy for three days.
रूस-यूक्रेन युद्ध - फोटो : रायटर्स

जोया निवासी तीन सगे भाई बहन तीन दिन से यूक्रेन के कीव में भारतीय दूतावास के पास स्कूल में फंसे हुए हैं। उनके साथ अमरोहा के अलावा बिजनौर और मुरादाबाद के कई छात्र हैं। छात्र नूरुल हसन ने सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल कर हालात की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि दूतावास की तरफ से कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिल रहा है। भरपेट खाना भी नहीं मिल पा रहा है। पानी की किल्लत हो रही है।

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जोया में उमर का परिवार रहता है। उनके दो बेटे और दो बेटी यूक्रेन की टर्नोपिल मेडिकल यूनिवर्सिटी में एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहे है। करीब पंद्रह दिन पहले उनका बड़े बेटे कमाल हसन लौट आये थे। जबकि एक बेटा नूरुल हसन, बेटी कमर जहां और उमर जहां की पढ़ाई चल रही थी। जैसे ही रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध की स्थिति बनी, तभी तीनों भाई बहनों ने फ्लाइट बुक करा दी थी। 24 फरवरी के लिए उनकी फ्लाइट कन्फर्म हो गई थी। इस दिन जैसे ही भाई-बहन ट्रेन से एयरपोर्ट के लिए पहुंचे, तभी युद्ध शुरू होने के कारण फ्लाइट कैंसिल हो गई थी। जिसके बाद सैकड़ों छात्रों के साथ नूरुल हसन, कमर जहां और उमर जहां भी वहीं फंस गए। आनन-फानन में इन छात्रों को कीव में भारतीय दूतावास के पास एक स्कूल में शरण दी गई। नुरुल हसन ने शनिवार को स्कूल में मौजूद छात्रों के हालात का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल किया।
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उन्होंने कहा कि पिछले तीन दिन से छात्र में में भारतीय दूतावास के पास स्कूल में फंसे हुए हैं। दूतावास के अधिकारी कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे रहे हैं। अगर उनसे कोई छात्र कुछ पूछता भी है, तो वह अपने रिक्स पर जाने की बात कहते हैं। नूरुल हसन ने बताया कि यूक्रेन के हालात बेहद खराब हैं। यहां छात्रों को परेशानी हो रही है। दूतावास के द्वारा दो छात्रों का खाना दस लोगों के बीच परौसा जा रहा है। यहां पर खाना नहीं मिल पा रहा है, पानी भी भरपूर नहीं है। उन्होंने बताया कि दूतावास के अधिकारी छात्रों के बीच आते हैं और चले जाते हैं। नूरुल हसन के मुताबिक स्कूल में करीब 300 छात्र हैं। इसमें अमरोहा के अलावा बिजनौर और मुरादाबाद के भी कई छात्र फंसे हुए हैं। उधर, छात्रों के यूक्रेन में फंसने के बाद उनके परिजन चिंतित है।
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यूक्रेन में मेट्रो के बेसमेंट में छिपकर जान बचाने वाले गजरौला के युवक सहित सैकड़ों लोगों ने आस पास कुछ हालात सामान्य होने पर राहत की सांस ली। दुकानों पर जाकर रसद और जरूरत का सामान खरीदा। इस दौरान दुकानों पर खासी भीड़ लगी रही। लाइन में लगकर खाने-पीने की वस्तुएं खरीदीं।

सुल्तानपुर गांव निवासी 28 वर्षीय कैलाश यूक्रेन में रहकर एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहा है। यूक्रेन पर रूस के हमले के दौरान कैलाश सहित सैकड़ों लोगों ने मैट्रो के बेसमेंट में छिपकर जान बचाई। इस बीच उनके खाने-पीने का सामान भी समाप्त हो गया था। कैलाश के बड़े भाई सुरेंद्र के मुताबिक हमले के दौरान एक दिन कैलाश भूखा रहा था। शनिवार को वहां के आस पास कुछ हालात सामान्य हुए तो लोगों ने राहत की सांस ली। लोग अपनी जरूरत का सामान खरीदने को घर से निकले।


सुरेंद्र ने बताया कि कैलाश कह रहा था कि रसद की दुकानों पर खासी भीड़ लगी रही। लोगों ने लाइन में लगकर अपनी जरूरत का सामान खरीदा। इस दौरान लोग खासे डरे हुए थे। सुरेंद्र ने कैलाश के हवाले से बताया कि उसके आस पास गुजरात और महाराष्ट्र राज्य के भी कई छात्र रहकर पढ़ाई कर रहे हैं। सभी कह रहे हैं कि युद्धबंद होने या यूक्रेन के हालात सामान्य हो जाने पर सभी अपने वतन लौटेंगे। हालांकि परिजन अब भी परेशान हैं। सबसे अधिक चिंतित कैलाश की मां राजो देवी है। सुरेंद्र का कहना है कि जब तक वह रोजाना कैलाश से वीडियो कॉल पर बात नहीं कर लेती, मां को चैन नहीं मिलता। उसका फोन नहीं उठने पर मां चिंतित हो जाती है।

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