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बिजली विभाग में बड़ा ‘खेल’ लाखों के बिल हजारों में निपटाए
ब्यूरो/अमर उजाला/अमरोहा
Updated Wed, 28 Sep 2016 02:01 AM IST
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उपभोक्ता जिन्हें गलत बता-बताकर हार गए। दफ्तरों के चक्कर लगा-लगाकर थक गए, मगर अफसरों ने एक धेला भी कम नहीं किया था। कैंप में ये बिल आधे कैसे कर दिए गए, ये सवाल अफसरों को कटघरे में खड़ा कर रहा है।
यूं तो बिजली विभाग की अमरोहा डिविजन का घपलेबाजी से पुराना नाता है। रिटायरमेंट के बाद भी महिला कर्मी से साल भर काम कराने का मामला अभी ठंडा भी नहीं हुआ कि बिलों में फर्जीवाड़े का खेल सामने आ गया। महकमे के अफसर उपभोक्ताओं की जेब पर डाका डाल रहे हैं। बिल बढ़ाकर घरों पर भिजवा रहे हैं। ये बिल जिन्हें उपभोक्ता लेकर अफसरों के आगे पीछे घूम रहे थे, सत्ता पक्ष के एक नेता ने विभाग द्वारा लगाए शिविर में एक पल में निपटाया है।
1 लाख 37 हजार रुपए के बिल 50-60 हजार रुपए में खत्म हुए हैं।
अधिकारियों की मानें तो शिविर में करीब 300 बिलों की गड़बड़ी को ठीक कर बिल वसूली की गई थी। हैरानी की बात ये है कि कार्यालयों में जब उपभोक्ता उनको सही कराने के लिए जा रहे थे तो अफसर क्यों उनकी सुनने को तैयार नहीं थे। पूरा बिल ही जमा करने को क्यों कह रहे थे। शिविर में उनकी जुबां आखिर क्यों बंद रहीं। लाखों के बिल हजारों में कैसे निपटा दिए।
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यूं तो बिजली विभाग की अमरोहा डिविजन का घपलेबाजी से पुराना नाता है। रिटायरमेंट के बाद भी महिला कर्मी से साल भर काम कराने का मामला अभी ठंडा भी नहीं हुआ कि बिलों में फर्जीवाड़े का खेल सामने आ गया। महकमे के अफसर उपभोक्ताओं की जेब पर डाका डाल रहे हैं। बिल बढ़ाकर घरों पर भिजवा रहे हैं। ये बिल जिन्हें उपभोक्ता लेकर अफसरों के आगे पीछे घूम रहे थे, सत्ता पक्ष के एक नेता ने विभाग द्वारा लगाए शिविर में एक पल में निपटाया है।
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1 लाख 37 हजार रुपए के बिल 50-60 हजार रुपए में खत्म हुए हैं।
अधिकारियों की मानें तो शिविर में करीब 300 बिलों की गड़बड़ी को ठीक कर बिल वसूली की गई थी। हैरानी की बात ये है कि कार्यालयों में जब उपभोक्ता उनको सही कराने के लिए जा रहे थे तो अफसर क्यों उनकी सुनने को तैयार नहीं थे। पूरा बिल ही जमा करने को क्यों कह रहे थे। शिविर में उनकी जुबां आखिर क्यों बंद रहीं। लाखों के बिल हजारों में कैसे निपटा दिए।
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