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Amroha News: कैलाश चंद ने ट्रेन से खजाना लूटने की बनाई थी योजना, जेल में काटी थी छह माह की सजा
Mon, 14 Aug 2023 12:32 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अमरोहा
संवाद न्यूज एजेंसी, अमरोहा
Updated Mon, 14 Aug 2023 12:32 AM IST
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रहरा (अमरोहा)। देश को आजादी दिलाने में क्रांतिकारियों ने अपना बलिदान दिया। अपने जान की परवाह किए, उन्होंने अंग्रेजों से सीधी टक्कर ली। उन क्रांतिकारियों में एक नाम कैलाश चंद त्यागी का भी रहा है। उन्हाेंने भारत छोड़ो आंदोलन के लिए क्षेत्र में बिगुल बजाया। उन्होंने अंग्रेजों की ट्रेन से खजाना लूटने की योजना बनाई, लेकिन वह उससे पूर्व पकड़ लिए गए। उसके बाद उन्हें छह माह की सजा मिली और कड़ी यातनाएं दी गईं। उसके बाद भी उन्हाेंने हिम्मत नहीं हारी। लगातार आंदोलन में शामिल रहते हुए देश की आजादी में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
गंगेश्वरी गांव के 12 स्वतंत्रता सेनानियों में शामिल हुए कैलाश चंद त्यागी ने आजादी की लड़ाई में बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया। सन 1908 में गंगेश्वरी में पैदा हुए कैलाश चंद त्यागी ने अपने गांव के पृथ्वी सिंह और मुनिदेव त्यागी के साथ स्वतंत्रता संग्राम में हिस्सा लिया। गंगेश्वरी गांव के 12 क्रांतिकारियों की फौज में कैलाश चंद त्यागी को पृथ्वी सिंह की तरह बहादुर माना जाता था। कैलाश चंद त्यागी के पुत्र बैजनाथ त्यागी ने बताया कि उनके पिता ने अंग्रेजी हुकूमत को चुनौती देने के लिए अन्य कई क्रांतिकारी के साथ मिलकर दिल्ली से नजीबाबाद जा रही अंग्रेजों की ट्रेन से धनौरा चांदपुर रेलवे लाइन को काटकर ट्रेन से खजाना लूटने की योजना बनाई थी। मुखबिर की सूचना पर ट्रेन लूटने की योजना बना रहे क्रांतिकारियों को पकड़ने के लिए अंग्रेजों ने गंगेश्वरी गांव में डेरा डाल दिया। क्रांतिकारी अंग्रेजों से बचने के लिए गंगा के आंचल में छिप गए थे। कुछ समय बाद मुखबिर की सूचना पर कैलाश चंद त्यागी पकड़े गए। उन्हें मिर्जापुर जिला के चुनार किला की जेल में 6 माह तक अनेक यातनाएं देकर कठोर कारावास में रखा गया। वहां से उन्हें छोड़ा गया तो उसके बाद भी वह लगातार आजादी के आंदोलन में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते रहे। वर्ष 2001 में कैलाश चंद का ह्रदय गति रुकने से निधन हो गया। उनके बलिदान को आज भी ग्रामीण व क्षेत्र के लोग याद करते हुए उनकी मिसाल देते हैं।
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दो बेटों में एक का हो चुका है निधन
कैलाशचंद त्यागी के परिवार में उनके दो पुत्र किशन देव त्यागी एवं बैजनाथ त्यागी हैं। किशन देव का 14 वर्ष पूर्व निधन हो गया था। उनके दो पुत्र एवं एक पुत्री है। बैजनाथ त्यागी के तीन पुत्र एवं दो पुत्री हैं। कैलाश त्यागी के पौत्र पूर्व में भारतीय जनता पार्टी के युवा मोर्चा के जिला उपाध्यक्ष रह चुके हैं।
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गंगेश्वरी गांव के 12 स्वतंत्रता सेनानियों में शामिल हुए कैलाश चंद त्यागी ने आजादी की लड़ाई में बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया। सन 1908 में गंगेश्वरी में पैदा हुए कैलाश चंद त्यागी ने अपने गांव के पृथ्वी सिंह और मुनिदेव त्यागी के साथ स्वतंत्रता संग्राम में हिस्सा लिया। गंगेश्वरी गांव के 12 क्रांतिकारियों की फौज में कैलाश चंद त्यागी को पृथ्वी सिंह की तरह बहादुर माना जाता था। कैलाश चंद त्यागी के पुत्र बैजनाथ त्यागी ने बताया कि उनके पिता ने अंग्रेजी हुकूमत को चुनौती देने के लिए अन्य कई क्रांतिकारी के साथ मिलकर दिल्ली से नजीबाबाद जा रही अंग्रेजों की ट्रेन से धनौरा चांदपुर रेलवे लाइन को काटकर ट्रेन से खजाना लूटने की योजना बनाई थी। मुखबिर की सूचना पर ट्रेन लूटने की योजना बना रहे क्रांतिकारियों को पकड़ने के लिए अंग्रेजों ने गंगेश्वरी गांव में डेरा डाल दिया। क्रांतिकारी अंग्रेजों से बचने के लिए गंगा के आंचल में छिप गए थे। कुछ समय बाद मुखबिर की सूचना पर कैलाश चंद त्यागी पकड़े गए। उन्हें मिर्जापुर जिला के चुनार किला की जेल में 6 माह तक अनेक यातनाएं देकर कठोर कारावास में रखा गया। वहां से उन्हें छोड़ा गया तो उसके बाद भी वह लगातार आजादी के आंदोलन में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते रहे। वर्ष 2001 में कैलाश चंद का ह्रदय गति रुकने से निधन हो गया। उनके बलिदान को आज भी ग्रामीण व क्षेत्र के लोग याद करते हुए उनकी मिसाल देते हैं।
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दो बेटों में एक का हो चुका है निधन
कैलाशचंद त्यागी के परिवार में उनके दो पुत्र किशन देव त्यागी एवं बैजनाथ त्यागी हैं। किशन देव का 14 वर्ष पूर्व निधन हो गया था। उनके दो पुत्र एवं एक पुत्री है। बैजनाथ त्यागी के तीन पुत्र एवं दो पुत्री हैं। कैलाश त्यागी के पौत्र पूर्व में भारतीय जनता पार्टी के युवा मोर्चा के जिला उपाध्यक्ष रह चुके हैं।
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