{"_id":"68a8d941320a517bd800d99f","slug":"jammu-accident-explosion-broke-sleep-and-screams-started-jpnagar-news-c-15-1-mbd1043-714333-2025-08-23","type":"story","status":"publish","title_hn":"जम्मू हादसा : धमाके से टूटी नींद और मच गई चीत्कार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जम्मू हादसा : धमाके से टूटी नींद और मच गई चीत्कार
Sat, 23 Aug 2025 02:25 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अमरोहा
संवाद न्यूज एजेंसी, अमरोहा
Updated Sat, 23 Aug 2025 02:25 AM IST
विज्ञापन
हसनपुर (अमरोहा)।
हादसे की शिकार बस में सवार रुखालू के सूरजपाल ने बताया कि सफर शुरू होने के साथ ही हर कोई धार्मिक भाव से भरा था। रास्ते में कभी देवी के नाम के जयकारे गूंजते थे तो कभी कोई श्रद्धालु धार्मिक गीत या भजन गुनगुना लेता था। घड़ी में रात के 2:15 बज चुके थे, लिहाजा तमाम श्रद्धालु सो गए थे। अचानक टायर फटने से हुए तेज धमाके से सोने वालों की आंख खुली।
रात के अंधेरे में बस में धूल का गुबार घुटा हुआ था। किसी के सिर से खून बह रहा था तो कोई शरीर के अन्य हिस्से पर हुए जख्म को सहरा रहा था। जख्म और पीड़ा से जूझते लोगों की चीख-पुकार से पूरी बस घिर गई। चालक के पीछे वाली सीट पर इकबाल बैठे थे। वह (सूरजपाल) और ओमवीर भी उसी सीट पर थे। जब तक बाकी घायल सामान्य स्थिति में आते इकबाल दम तोड़ चुके थे। अन्य कई लहूलुहान थे। पुलिस की मदद मिलने तक सब बिना उपचार बेबस बने रहे। मौत से लगभग सीधा सामना करके जम्मू के सांबा से लौटे रुखालू के लोग शुक्रवार को दिनभर हादसे की चर्चा में घिरे रहे। हालचाल लेने वाले भी वाकया जानने को बैचैन थे।
नतीजे में सूरजपाल, ओमकार, डालचंद समेत कुछ श्रद्धालुओं का समय बार-बार आपबीती दोहराने में बीता। एक बार को ऐसा लग रहा था कि कोई नहीं बचेगा। सूरजपाल बोले- इतने बड़े हादसे में बचना मुश्किल था। देवी मां की ही कृपा थी कि अधिकांश लोगों की जान बच गई। घायल ओमकार और डालचंद ने बताया कि मौत को करीब से देखने की दहशत अब भी मन से बाहर नहीं निकली है। 25 फीट नीचे बस गिरने के बाद बच तो गए लेकिन हालात से लगा कि अब सुरक्षित घर वापसी संभव नहीं होगी। गनीमत रही कि करीब आंधे घंटे बाद ही पुलिस आ गई। इसके बाद इलाज और अन्य मदद मिली।
विज्ञापन
घायल जितेंद्र ने बताया कि हादसे के वक्त कुछ भी समझ नहीं आ रहा था। चारों तरफ अंधेरा छाया हुआ था, सब लोग ठीक से नींद से जागे भी नहीं थे। बस में कुछ और श्रद्धालु भी थे जो फिलहाल अस्पताल में भर्ती हैं। उनका इलाज चल रहा है। हादसे की सूचना मिलते ही पूरे गांव में सन्नाटा पसरा था। अपनों की कुशलता जानने के लिए जम्मू संपर्क किया। नेटवर्क से जूझते हुए बात हुई तो थोड़ी तसल्ली हो सकी।
इकबाल के परिवार को आर्थिक मदद की मांग
इस हादसे में जान गंवाने वाले इकबाल के परिवार को आर्थिक मदद की मांग तेज हो गई है। ग्रामीणों का कहना है कि इकबाल मेहनत मजदूरी कर अपने परिवार का भरण पोषण करता था। अपने घर में वह अकेला ही कमाने वाला था। छप्पर वाले कच्चे घर में पूरा परिवार रहता है। उसकी स्थिति को देखते हुए प्रशासन को अपने या शासन के स्तर से आर्थिक मदद, सरकारी स्तर से आवास-राशन जैसी सुविधाओं का प्रयास करना चाहिए।
पलटी...सीधी हुई और फिर 25 फीट नीचे जा गिरी बस
सूरजपाल ने बताया कि टायर फटने पर असंतुलित होकर बस पलट गई। स्पीड ज्यादा थी तो पलटने के बाद घिसटती हुई बस ओवरब्रिज से टकराई और फिर सीधी हो गई। इसके बाद बस करीब 25 फीट नीचे जा गिरी। गिरते समय बस सीधे रुख में थी। माना
जा रहा है कि पलटी स्थिति में बस खाई में जाती तो ज्यादा बड़ा नुकसान हो सकता था। शीशे तोड़कर बाहर निकले सूरज, लाल झंडी दिखाकर मांगी मदद श्रद्धालुओं में शामिल सूरजपाल ने बताया कि बस 25 फीट नीचे गिरी तो घायलों की चीख-पुकार चरम पर थी। किसी को कुछ सूझ नहीं रहा था। हिम्मत करके वह शीशे तोड़कर बाहर। अन्य यात्रियों को निकालने का भी प्रयास किया लेकिन कामयाब नहीं हो सके। फिर वह वहां पड़ा लाल रंग का कपड़ा लेकर ऊपर चढ़े और हाईवे तक पहुंचे। लाल कपड़े से झंडी बनाकर आते-जाते वाहनों को रुकवाया। उनके जरिये पुलिस तक सूचना पहुंची और फिर पुलिस की मदद से अन्य घायल बाहर निकाले जा सके।
-- -- -- -- -- --
जम्मू प्रशासन ने दिए बस के 80 हजार रुपये
सूरजपाल ने बताया कि हादसे के बाद श्रद्धालुओं को वापस गांव तक लाने के लिए 80 हजार रुपये में बस तय हुई थी। इसका भुगतान उन्होंने दे दिया था लेकिन जम्मू प्रशासन ने उनके पैसे वापस कराए और अपने खर्चें पर बस से गांव तक भेजा।
विजयपुर एम्स में भर्ती 15 गंभीर घायल
हादसे में गंभीर रूप से घायल हुए 15 श्रद्धालुओं का विजयपुर एम्स में उपचार चल रहा है। इनमें पुष्पेंद्र, भगवान सिंह, खूबचंद, गजराज, बिजेंद्र, पूनम, राजेंद्र (बस चालक), रमेश, अशोक, बिजेंद्र, भगवान सहाय, प्रेमचंद्र, कलुआ, ओमवती आदि शामिल हैं।
विज्ञापन
हादसे की शिकार बस में सवार रुखालू के सूरजपाल ने बताया कि सफर शुरू होने के साथ ही हर कोई धार्मिक भाव से भरा था। रास्ते में कभी देवी के नाम के जयकारे गूंजते थे तो कभी कोई श्रद्धालु धार्मिक गीत या भजन गुनगुना लेता था। घड़ी में रात के 2:15 बज चुके थे, लिहाजा तमाम श्रद्धालु सो गए थे। अचानक टायर फटने से हुए तेज धमाके से सोने वालों की आंख खुली।
रात के अंधेरे में बस में धूल का गुबार घुटा हुआ था। किसी के सिर से खून बह रहा था तो कोई शरीर के अन्य हिस्से पर हुए जख्म को सहरा रहा था। जख्म और पीड़ा से जूझते लोगों की चीख-पुकार से पूरी बस घिर गई। चालक के पीछे वाली सीट पर इकबाल बैठे थे। वह (सूरजपाल) और ओमवीर भी उसी सीट पर थे। जब तक बाकी घायल सामान्य स्थिति में आते इकबाल दम तोड़ चुके थे। अन्य कई लहूलुहान थे। पुलिस की मदद मिलने तक सब बिना उपचार बेबस बने रहे। मौत से लगभग सीधा सामना करके जम्मू के सांबा से लौटे रुखालू के लोग शुक्रवार को दिनभर हादसे की चर्चा में घिरे रहे। हालचाल लेने वाले भी वाकया जानने को बैचैन थे।
विज्ञापन
नतीजे में सूरजपाल, ओमकार, डालचंद समेत कुछ श्रद्धालुओं का समय बार-बार आपबीती दोहराने में बीता। एक बार को ऐसा लग रहा था कि कोई नहीं बचेगा। सूरजपाल बोले- इतने बड़े हादसे में बचना मुश्किल था। देवी मां की ही कृपा थी कि अधिकांश लोगों की जान बच गई। घायल ओमकार और डालचंद ने बताया कि मौत को करीब से देखने की दहशत अब भी मन से बाहर नहीं निकली है। 25 फीट नीचे बस गिरने के बाद बच तो गए लेकिन हालात से लगा कि अब सुरक्षित घर वापसी संभव नहीं होगी। गनीमत रही कि करीब आंधे घंटे बाद ही पुलिस आ गई। इसके बाद इलाज और अन्य मदद मिली।
विज्ञापन
घायल जितेंद्र ने बताया कि हादसे के वक्त कुछ भी समझ नहीं आ रहा था। चारों तरफ अंधेरा छाया हुआ था, सब लोग ठीक से नींद से जागे भी नहीं थे। बस में कुछ और श्रद्धालु भी थे जो फिलहाल अस्पताल में भर्ती हैं। उनका इलाज चल रहा है। हादसे की सूचना मिलते ही पूरे गांव में सन्नाटा पसरा था। अपनों की कुशलता जानने के लिए जम्मू संपर्क किया। नेटवर्क से जूझते हुए बात हुई तो थोड़ी तसल्ली हो सकी।
इकबाल के परिवार को आर्थिक मदद की मांग
इस हादसे में जान गंवाने वाले इकबाल के परिवार को आर्थिक मदद की मांग तेज हो गई है। ग्रामीणों का कहना है कि इकबाल मेहनत मजदूरी कर अपने परिवार का भरण पोषण करता था। अपने घर में वह अकेला ही कमाने वाला था। छप्पर वाले कच्चे घर में पूरा परिवार रहता है। उसकी स्थिति को देखते हुए प्रशासन को अपने या शासन के स्तर से आर्थिक मदद, सरकारी स्तर से आवास-राशन जैसी सुविधाओं का प्रयास करना चाहिए।
पलटी...सीधी हुई और फिर 25 फीट नीचे जा गिरी बस
सूरजपाल ने बताया कि टायर फटने पर असंतुलित होकर बस पलट गई। स्पीड ज्यादा थी तो पलटने के बाद घिसटती हुई बस ओवरब्रिज से टकराई और फिर सीधी हो गई। इसके बाद बस करीब 25 फीट नीचे जा गिरी। गिरते समय बस सीधे रुख में थी। माना
जा रहा है कि पलटी स्थिति में बस खाई में जाती तो ज्यादा बड़ा नुकसान हो सकता था। शीशे तोड़कर बाहर निकले सूरज, लाल झंडी दिखाकर मांगी मदद श्रद्धालुओं में शामिल सूरजपाल ने बताया कि बस 25 फीट नीचे गिरी तो घायलों की चीख-पुकार चरम पर थी। किसी को कुछ सूझ नहीं रहा था। हिम्मत करके वह शीशे तोड़कर बाहर। अन्य यात्रियों को निकालने का भी प्रयास किया लेकिन कामयाब नहीं हो सके। फिर वह वहां पड़ा लाल रंग का कपड़ा लेकर ऊपर चढ़े और हाईवे तक पहुंचे। लाल कपड़े से झंडी बनाकर आते-जाते वाहनों को रुकवाया। उनके जरिये पुलिस तक सूचना पहुंची और फिर पुलिस की मदद से अन्य घायल बाहर निकाले जा सके।
जम्मू प्रशासन ने दिए बस के 80 हजार रुपये
सूरजपाल ने बताया कि हादसे के बाद श्रद्धालुओं को वापस गांव तक लाने के लिए 80 हजार रुपये में बस तय हुई थी। इसका भुगतान उन्होंने दे दिया था लेकिन जम्मू प्रशासन ने उनके पैसे वापस कराए और अपने खर्चें पर बस से गांव तक भेजा।
विजयपुर एम्स में भर्ती 15 गंभीर घायल
हादसे में गंभीर रूप से घायल हुए 15 श्रद्धालुओं का विजयपुर एम्स में उपचार चल रहा है। इनमें पुष्पेंद्र, भगवान सिंह, खूबचंद, गजराज, बिजेंद्र, पूनम, राजेंद्र (बस चालक), रमेश, अशोक, बिजेंद्र, भगवान सहाय, प्रेमचंद्र, कलुआ, ओमवती आदि शामिल हैं।