अमरोहा। जमीयत उलमा-ए-हिंद के प्रदेश अध्यक्ष मौलाना अशहद रशीदी ने कहा कि मोहम्मद साहब का जीवन मानवता की सेवा में गुजरा है। जब उनका जन्म हुआ तो अरब की सामाजिक हालात बहुत खराब थी। महिलाओं की कोई अहमियत नहीं रही। बेटियों को जिंदा दफन कर देते थे। कबीलों के लोग आपस में लड़ते झगड़ते थे। इन बुराइयों को मुकम्मल तौर पर खत्म करने के लिए मोहम्मद साहब ने बहुत बड़ी पहल की थी।
वह मुस्लिम कमेटी की ओर से शहर के सराय कोहना स्थित सैयद जायर हुसैन चौक के पास आयोजित कार्यक्रम को खिताब कर रहे थे। कहा कि अपने से 15 साल बड़ी विधवा महिला हजरत ख़दीजा से शादी की। यह उस समय की बड़ी प्रगतिशीलता का सूचक था, क्योंकि तब विधवा की समाज में इज्जत नहीं थी। इससे समाज में संदेश गया कि विधवा स्त्री को पूरा सम्मान देना चाहिए। कहा कि मोमिन का मतलब ईमान वाला। हम मुसलमान तभी अल्लाह की नजर में मोमिन हैं जब हम अल्लाह के सिवाय किसी दूसरे से ख़ौफ़ न रखते हों और न ही अल्लाह के सिवाय किसी दूसरे से कोई उम्मीद रखते हों। मुफ्ती सैयद मोहम्मद अफ्फान मंसूरपुरी ने अमन चैन के लिए दुआ कराया। हाफ़िज शमीम ने तिलावत, जुबैर इब्ने सैफी, हाफिज अफ्फान जैदी, शमीम अमरोहवी ने नाते नबी का नजराना पेश किया। इस दौरान हाजी सैयद महबूब हुसैन जैदी, हाजी खुर्शीद अनवर, हाजी अब्दुल कय्यूम राईनी, हाजी अस्लूब हुसैन जैदी, डॉ. नजमुन्नबी, मंसूर अहमद, आले नबी, तंजीम हुसैन, मुराद अली ख़ान, मुराद आरिफ़, निराले मिया अंसारी, यासिर अंसारी, इकराम हुसैन जैदी, हाजी अफ़जाल अहमद, शहजाद, इसहाक, मंसूर हुसैन जैदी आदि रहे।