जल को निर्मल बनाने को गंगा में छोड़े गए घड़ियाल

ब्यूरो/अमर उजाला अमरोहा Updated Tue, 05 Dec 2017 01:09 AM IST
jal ko nirmal banane ko ganga me chode ghadiyal
गंगा में घड़ियाल - फोटो : ब्यूरो/अमर उजाला अमरोहा
गंगा को निर्मल बनाने के लिए नदी में घड़ियाल छोड़े गए हैं। जहां एक ओर गंगा को निर्मल बनाने के लिए नमामि गंगे के तहत प्रयास जारी हैं। वहीं गंगा को निर्मल करने के लिए घड़ियाल भी अहम भूमिका निभाएंगे। वन विभाग और वर्ल्ड वाइल्ड फॉरेस्ट ने गंगा में सैकड़ों घड़ियाल छोड़े हैं। उनकी संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। घड़ियाल ब्रजघाट से लेकर तिगरी के बीच गंगा में खूब दिखाई दे रहे हैं। खास बात यह है कि घड़ियाल किसी भी मनुष्य को कोई नुकसान नहीं पहुंचाते हैं।

गंगा नदी को देश में सबसे पवित्र नदी माना जाता है। इसमें रोजाना लाखों श्रद्घालु स्नान करते हैं। मान्यता यह भी है कि इसमें स्नान करने से लोगों के पाप धुल जाते हैं। लेकिन जैसे-जैसे समय बीतता गया, गंगा दूषित होने लगी। इसका कारण यह है कि आज भी विभिन्न शहरों और कस्बों का पानी इसमें नालों के माध्यम से पहुंच रहा है। हालांकि इस पानी को रोकने और गंगा निर्मल बनाने के लिए सरकार की ओर से नमामि गंगे के तहत पिछले काफी समय से लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।

इसके साथ अब गंगा को निर्मल करने के उद्देश्य से वन विभाग और वर्ल्ड वाइल्ड फॉरेस्ट ने भी पूरी तैयारी की है। दोनों विभागों ने मिलकर गंगा में सैकड़ों घड़ियाल छोड़े हैं। घड़ियाल कुछ समय पूर्व हस्तिनापुर से छोड़े गए हैं। यह घड़ियाल आजकल ब्रजघाट व तिगरी के आसपास गंगा में देखे जा रहे हैं। तिगरी मेला के दौरान श्रद्घालुओं ने कई घड़ियाल गंगा में देखे थे। सेक्टर तीन से लेकर सेक्टर 11 तक घड़ियाल रोजाना श्रद्घालुओं को दिखाई दे रहे थे। रविवार को मार्गशीर्ष पूर्णिमा पर स्नान के दौरान श्रद्घालुओं को ब्रजघाट में ही कई घड़ियालों के दर्शन हुए। इससे श्रद्घालुओं को थोड़ी घबराहट जरूर महसूस हुई। लेकिन खास बात यह है कि घड़ियाल मनुष्य को नुकसान नहीं पहुंचा रहे हैं।


दूषित पानी में छोड़े जाते हैं घड़ियाल
गजरौला। गंगा में घड़ियाल वहां छोड़े जाते हैं। जहां पानी ज्यादा दूषित हो चुका है। अफसरों के अनुसार गंगा का पानी जगह-जगह दूषित हो चुका है। गंगा में सबसे अधिक दूषित पानी शहरों व नगरों से नालों के माध्यम से जहां पानी पहुंच रहा है। उसके आसपास ही गंगा का पानी अधिक दूषित है। उसी क्षेत्र के आसपास घड़ियालों को छोड़ा जाता है। खास बात यह है कि घड़ियाल दूषित पानी को शुद्घ करने में अहम भूमिका निभाता है।


मनुष्य को नुकसान नहीं पहुंचाते घड़ियाल
गंगा नदी को निर्मल बनाने के उद्देश्य से घड़ियाल पहले भी छोड़े जा चुके हैं। जबकि कुछ समय पूर्व भी हस्तिनापुर से सैकड़ों घड़ियाल छोड़ं गए हैं। इन पर वन विभाग और वर्ल्ड वाइल्ड फॉरेस्ट की नजर है। बताया कि घड़ियालों से लोगों को डरने की जरूरत नहीं है। वह मानव को नुकसान नहीं पहुंचाते। उनका मुंह छोटा होता है। वह अपने भोजन में मछली और गंगा के अन्य जीवों को ही भोजन बनाते हैं। ब्रजघाट और तिगरी के आसपास गंगा का पानी ज्यादा दूषित है। यहां घड़ियाल हैं। लगातार घड़ियालों की संख्या बढ़ रही है।
शीतल पंवार, क्षेत्रीय वन अधिकारी, गजरौला।




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