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फसल नुकसान के सर्वे में खेल, दफ्तर में बैठ-बैठे कर लिया आकलन, गांव नहीं पहुंचीं टीमें

Moradabad  Bureau मुरादाबाद ब्यूरो
Updated Mon, 25 Oct 2021 11:48 PM IST
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In the survey of crop loss, the assessment was done sitting in the office, the teams did not reach the village
अमरोहा-अतरासी रोड स्थित खेत में भरा पानी और कटी पड़ी धान की फसल। फाइल फोटो - फोटो : JPNAGAR
अमरोहा। बारिश से फसल बर्बाद होने का दंश झेल रहे किसानों का राजस्व और कृषि विभाग ने भी मखौल बना रखा है। मुख्यमंत्री ने सर्वे कर जल्द किसानों को मुआवजा देने के निर्देश दिए हैं। हैरत की बात ये है कि कृषि विभाग ने दफ्तर में बैठक नुकसान का आकलन कर रिपोर्ट तैयार कर ली है। जबकि राजस्व विभाग की तरफ से लेखपाल गांव में सर्वे करने नहीं पहुंचे हैं। जिसे लेकर किसानों में रोष व्याप्त है।
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जिले में करीब 26 हजार हेक्टेयर जमीन में धान की फसल थी। जबकि 2 हजार हेक्टेयर में उड़द, 5 हजार हेक्टेयर में आलू, 1200 हेक्टेयर में सरसों और करीब चार हजार हेक्टेयर जमीन में गोभी, मूली, शलजम, पालक और मेथी की फसल खड़ी थी। फिलहाल किसान धान की फसल को काट कर दाना-दाना समेटने में जुटा था। लेकिन रविवार और सोमवार को बेमौसम बारिश ने किसानों को बर्बाद कर दिया। तेज हवा और बरसात से धान की फसल को बड़ा नुकसान हुआ है। खेतों में पानी भरने से धान की कटी फसल बर्बाद हो गई। इस दौरान कृषि विभाग ने दफ्तर में बैठकर नुकसान का आकलन कर लिया है। जिसमें बताया कि बरसात में गिरी फसल में 20-25 प्रतिशत नुकसान है। कटी हुई फसल में करीब 55 फीसदी का नुकसान हुआ है। इसके अलावा उड़द, आलू, सरसों और सब्जी में फूल और बंद गोभी, मूली, शलजम, मेथी और पालक खेती को बड़ा नुकसान है। अधिकांश फसल खराब हो गई है। कटी पड़ी धान की फसल दोबारा से जमने लगी है। दाने में पौधे उगने लगे हैं।
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भाकियू भानु के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष चौधरी दिवाकर सिंह ने बताया कि अधिकारियों नुकसान का सर्वे करने के नाम पर खेल करने में लगे हैं। कोई अधिकारी या कर्मचारी गांवों में सर्वे करने नहीं पहुंच रहा है।
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- धान की कटाई होने वाली थी। बेमौसम हुई वर्षा से फसल गिर गई। काफी नुकसान हुआ। तीन दिन धूप निकलने के पर फसल सूखी तो दोबारा कटाई की तैयारी की लेकिन रविवार रात फिर वर्षा हो गई। लेकिन गांव में कोई भी सरकारी कर्मचारी नुकसान का आंकलन करने नहीं पहुंचा है। ---चंद्र शेखर, किसान गांव भदौरा
- आलू बोने के लिए बीज कटा पड़ा है। पहले बोने की तैयारी की वर्षा से जमीन गीली हो गई। अब फिर जोतकर तैयार की तो रविवार रात फिर वर्षा हो गई। बीज लगभग खराब होने के कगार पर है। जुताई आदि में भी डीजल मंहगा होने से अतिरिक्त भार पड़ रहा है।--- गनपत सिंह किसान नगलिया मुंशी
- धान की कटाई चल रही थी। पांच दिन पूर्व बारिश से कटाई रूक गई। कटी हुई फसल नष्ट हो गई है। अब फिर से बारिश हो जाने पर फसल में कुछ भी नहीं बचा है। लेकिन लेखपाल या कृषि विभाग के किसी कर्मचारी ने गांव आकर नहीं देखा है। --विनोद सिंह, किसान गंगाचोली

- खेत में कुछ धान की फसल कटी हुई पड़ी है। जबकि कुछ गिर चुकी है। शतप्रतिशत फसल नष्ट हो चुकी है। जिम्मेदारों से शिकायत के बावजूद भी कोई जिम्मेदार गांव में नहीं आया है। तो मुआवजा कैसे मिल पाएगा। -खिलेंद्र सिंह, किसान भदौरा

खिलेंद्र सिंह किसान भदौरा।

खिलेंद्र सिंह किसान भदौरा।- फोटो : HASANPUR

विनोद किसान गंगाचोली।

विनोद किसान गंगाचोली।- फोटो : HASANPUR

गनपत सिंह किसान नगलिया मुंशी।

गनपत सिंह किसान नगलिया मुंशी।- फोटो : HASANPUR

गांव भदौरा निवासी किसान चंद्रशेखर

गांव भदौरा निवासी किसान चंद्रशेखर- फोटो : HASANPUR

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