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Amroha News: मुआवजे के लिए 208 दिन में आंधी-बारिश सबसे जूझे, फिर भी नेता-अफसर नहीं पसीजे
Thu, 21 Sep 2023 11:37 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अमरोहा
संवाद न्यूज एजेंसी, अमरोहा
Updated Thu, 21 Sep 2023 11:37 AM IST
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अमरोहा। मध्यगंगा नहर के लिए अधिग्रहित की गई जमीन के चार गुने मुआवजे की मांग पर सरकार और प्रशासन की अनदेखी से कूबी समेत चार गांवों के ग्रामीण बेहद खफा हैं। मुआवजे के लिए ग्रामीण 208 दिनों से लगातार आंदोलन कर रहे हैं। गर्मी और बारिश के बीच भी उनका जज्बा कायम रहा लेकिन न ही प्रशासन नींद से जागा और न ही किसी जनप्रतिनिधि ने उनकी आवाज की नुमाइंदगी कर मामला उच्च स्तर तक पहुंचाया। फिर भी किसानों सा कहना है कि जब तक उन्हें उनकी जमीन का चार गुना मुआवजा नहीं मिल जाता है, तब तक वह किसी भी कीमत पर नहीं झुकेंगे।
साल 2011 में रामपुर घना, मोहनपुर एवं घंसूरपुर तथा साल 2012 में गांव कूबी में मध्य गंगा नहर के लिए किसानों की भूमि अधिग्रहण की गई थी। जिसके बाद किसानों को सर्किल रेट के तहत चार गुना मुआवजा दिया जाना था। सरकार किसानों को 2011 के रेट के अनुसार मुआवजा दे रही है, जबकि किसान सर्किल रेट के चार गुने मुआवजे की मांग पर डटे हुए हैं। इसी मांग को लेकर किसान फरवरी माह से लगातार धरना दे रहे हैं। किसानों का कहना है कि जब तक उनको उचित मुआवजा नहीं दिया जाएगा, तब तक वह जमीन की खुदाई नहीं होने देंगे। वहीं मध्य गंगा नहर में पानी छोड़े जाने के बाद किसानों की बेचैनी बढ़ गई है। किसानों का कहना है कि चाहे कुछ भी हो वह उचित मुआवजा मिलने तक धरना जारी रखेंगे। 208 दिनों में किसानों ने सर्दी, बरसात और गर्मी झेली, लेकिन उनका इरादा नहीं बदला। इस आंदोलन में पुरुष ही नहीं बल्कि महिलाएं भी लगातार शामिल हो रही हैं। महिलाओं ने भी धरना देते हुए प्रशासन और सरकार को आइना दिखाने का प्रयास किया, लेकिन आज तक हुआ कुछ नहीं। किसानों का कहना है कि प्रशासन 2011 के तहत मात्र 50 हजार रुपये ही मुआवजा देना चाहता है। जोकि, उनके साथ सरासर धोखा है।
कम मुआवजा मिलने से हमें भारी नुकसान होगा। हमारी जमीन भी चली जाएगी और कुछ मिलेगा भी नहीं। सरकार भारी नुकसान उठाने को मजबूर कर रही है। जिसको सहन नहीं किया जाएगा। जयपाल सिंह।
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सरकार ने जमीन छीनने की तैयारी कर ली है, लेकिन वह उचित मुआवजा मिलने तक नहीं झुकेंगे। चाहे यह धरना कई सालों तक चलाना पड़े, लेकिन हम मुआवजा लेकर रहेंगे। अभी तक सरकार और अधिकारी इस और कोई ध्यान नहीं दे रहे हैं। सरकार को किसान हित में उचित मुआवजा देना चाहिए। डल्लो देवी।
घर के कामकाज की परवाह किए बिना ही यहां महिलाएं लगातार धरने में बैठी हैं। लेकिन किसी को कोई फर्क नहीं पड़ रहा है। लेकिन जब तक हमारी जमीनों का उचित मुआवजा नहीं मिल जाता हम धरने पर डटे रहेंगे। चाहे अंजाम कुछ भी हो। इंद्रावती।
लगातार किसान धरने पर अपना काम काज छोड़कर बैठे हुए हैं। किसी को कोई फर्क नहीं पड़ा। बरसात व गर्मी भी आंदोलन हुआ, लेकिन किसी ने सुध नहीं ली। किसान हार नहीं मानेगा । नहर की खोदाई किसी भी कीमत पर नहीं होने दी जाएगी। किसान अमर सिंह।
कूबी के ग्रामीणों की जमीन का अधिग्रहण पुराने एक्ट के तहत हुआ था। उसके अनुसार ही उन्हें मुआवजा मिलना था। हालांकि, वह नये एक्ट के तहत सर्किल रेट के अनुसार चार गुना मुआवजा मांग रहे हैं। उन्हें सभी नियमों के बारे में अवगत कराया जा चुका है। इस संबंध में उच्चाधिकारियों को भी अवगत कराया जा चुका है। पुराने एक्ट के तहत जमीनों का जो मुआवजा मिलना था, उसे कोषागार में जमा भी कराया गया है। किसानों से वार्ता कर उन्हें समझाने का प्रयास किया जाएगा। -राजेश कुमार त्यागी, जिला अधिकारी
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साल 2011 में रामपुर घना, मोहनपुर एवं घंसूरपुर तथा साल 2012 में गांव कूबी में मध्य गंगा नहर के लिए किसानों की भूमि अधिग्रहण की गई थी। जिसके बाद किसानों को सर्किल रेट के तहत चार गुना मुआवजा दिया जाना था। सरकार किसानों को 2011 के रेट के अनुसार मुआवजा दे रही है, जबकि किसान सर्किल रेट के चार गुने मुआवजे की मांग पर डटे हुए हैं। इसी मांग को लेकर किसान फरवरी माह से लगातार धरना दे रहे हैं। किसानों का कहना है कि जब तक उनको उचित मुआवजा नहीं दिया जाएगा, तब तक वह जमीन की खुदाई नहीं होने देंगे। वहीं मध्य गंगा नहर में पानी छोड़े जाने के बाद किसानों की बेचैनी बढ़ गई है। किसानों का कहना है कि चाहे कुछ भी हो वह उचित मुआवजा मिलने तक धरना जारी रखेंगे। 208 दिनों में किसानों ने सर्दी, बरसात और गर्मी झेली, लेकिन उनका इरादा नहीं बदला। इस आंदोलन में पुरुष ही नहीं बल्कि महिलाएं भी लगातार शामिल हो रही हैं। महिलाओं ने भी धरना देते हुए प्रशासन और सरकार को आइना दिखाने का प्रयास किया, लेकिन आज तक हुआ कुछ नहीं। किसानों का कहना है कि प्रशासन 2011 के तहत मात्र 50 हजार रुपये ही मुआवजा देना चाहता है। जोकि, उनके साथ सरासर धोखा है।
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कम मुआवजा मिलने से हमें भारी नुकसान होगा। हमारी जमीन भी चली जाएगी और कुछ मिलेगा भी नहीं। सरकार भारी नुकसान उठाने को मजबूर कर रही है। जिसको सहन नहीं किया जाएगा। जयपाल सिंह।
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सरकार ने जमीन छीनने की तैयारी कर ली है, लेकिन वह उचित मुआवजा मिलने तक नहीं झुकेंगे। चाहे यह धरना कई सालों तक चलाना पड़े, लेकिन हम मुआवजा लेकर रहेंगे। अभी तक सरकार और अधिकारी इस और कोई ध्यान नहीं दे रहे हैं। सरकार को किसान हित में उचित मुआवजा देना चाहिए। डल्लो देवी।
घर के कामकाज की परवाह किए बिना ही यहां महिलाएं लगातार धरने में बैठी हैं। लेकिन किसी को कोई फर्क नहीं पड़ रहा है। लेकिन जब तक हमारी जमीनों का उचित मुआवजा नहीं मिल जाता हम धरने पर डटे रहेंगे। चाहे अंजाम कुछ भी हो। इंद्रावती।
लगातार किसान धरने पर अपना काम काज छोड़कर बैठे हुए हैं। किसी को कोई फर्क नहीं पड़ा। बरसात व गर्मी भी आंदोलन हुआ, लेकिन किसी ने सुध नहीं ली। किसान हार नहीं मानेगा । नहर की खोदाई किसी भी कीमत पर नहीं होने दी जाएगी। किसान अमर सिंह।
कूबी के ग्रामीणों की जमीन का अधिग्रहण पुराने एक्ट के तहत हुआ था। उसके अनुसार ही उन्हें मुआवजा मिलना था। हालांकि, वह नये एक्ट के तहत सर्किल रेट के अनुसार चार गुना मुआवजा मांग रहे हैं। उन्हें सभी नियमों के बारे में अवगत कराया जा चुका है। इस संबंध में उच्चाधिकारियों को भी अवगत कराया जा चुका है। पुराने एक्ट के तहत जमीनों का जो मुआवजा मिलना था, उसे कोषागार में जमा भी कराया गया है। किसानों से वार्ता कर उन्हें समझाने का प्रयास किया जाएगा। -राजेश कुमार त्यागी, जिला अधिकारी