{"_id":"67a5196e96e1ad98650a33b0","slug":"he-lit-all-the-lamps-facing-the-wind-jpnagar-news-c-284-1-smbd1017-133820-2025-02-07","type":"story","status":"publish","title_hn":"Amroha News: ...सब चिराग उसने जलाए थे हवा के सामने","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Amroha News: ...सब चिराग उसने जलाए थे हवा के सामने
Fri, 07 Feb 2025 01:49 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अमरोहा
संवाद न्यूज एजेंसी, अमरोहा
Updated Fri, 07 Feb 2025 01:49 AM IST
विज्ञापन
अमरोहा।
हजरत इमाम हुसैन अल. के बेटे इमाम जैनुल आबिदीन के जन्मदिवस पर मोहल्ला दरबारे कलां स्थित अजाखाना शम्स अली खान में अंजुमन सज्जादिया के बैनर तले महफिल का आयोजन किया गया। इसमें शायरों ने अपने-अपने कलाम पेश कर खूब वाहवाही लूटी।
महफिल का आगाज मिर्जा कारी अनस ने तिलवत से किया। नाजिम अमरोहवी ने नात का नजराना पेश कर समा बांध दिया। अध्यक्षता मौलाना शादाब हैदर ने की जबकि संचालन डॉ. नाशिर नकवी व डॉ. मुबारक अली ने संयुक्त रूप से किया। नायाब इमाम मौलाना डॉ. अहसन अख्तर सरोश अतिथि रहे। रामपुर से आए शहजादा गुलरेज रामपुरी ने कहा, छोड़कर आशूर की शब एक खैमे का चिराग, सब चिराग उसने जलाए थे हवा के सामने। कौसर कैरानवी ने कहा, उठे थे शाम के जिदान से भारत में आ पहुंचे, अजादारी के ये बादल कहा गरजे कहा बरसे।
सागर बनारसी ने ऐसे कहा, बस्ती जो अजादारी नजर आती है, इसकी तामीर में मेहनत है तुम्हारी सज्जाद। किरतास करबलाई ने पढ़ा, सैय्यदे सज्जाद ओ जैनब ने जो बख्शी है, हमे। शबरोज कानपुरी ने ऐसे पढ़ा, उस ने जब देखा के आया है अली का बेटा, संगे काबा ने कहा आइये किब्ला सज्जाद। इस अजादारी से नस्लों की हिफाजत हो गई। इनके अलावा साहिल अमरोहवी, कसीम इब्ने रफी, ताजदार, वाहिद, अफसर, अर्श, डॉ. लाडले रहबर, शाहनवाज तकी आदि ने अपने-अपने कलाम पेश किए। मौलाना शादाब ने मुल्क में अमन व चैन की दुआ कराई। अध्यक्ष नईम कौसर, जनरल सेक्रेटरी आसिफ निसार ने सभी का आभार व्यक्त किया।
विज्ञापन
विज्ञापन
हजरत इमाम हुसैन अल. के बेटे इमाम जैनुल आबिदीन के जन्मदिवस पर मोहल्ला दरबारे कलां स्थित अजाखाना शम्स अली खान में अंजुमन सज्जादिया के बैनर तले महफिल का आयोजन किया गया। इसमें शायरों ने अपने-अपने कलाम पेश कर खूब वाहवाही लूटी।
महफिल का आगाज मिर्जा कारी अनस ने तिलवत से किया। नाजिम अमरोहवी ने नात का नजराना पेश कर समा बांध दिया। अध्यक्षता मौलाना शादाब हैदर ने की जबकि संचालन डॉ. नाशिर नकवी व डॉ. मुबारक अली ने संयुक्त रूप से किया। नायाब इमाम मौलाना डॉ. अहसन अख्तर सरोश अतिथि रहे। रामपुर से आए शहजादा गुलरेज रामपुरी ने कहा, छोड़कर आशूर की शब एक खैमे का चिराग, सब चिराग उसने जलाए थे हवा के सामने। कौसर कैरानवी ने कहा, उठे थे शाम के जिदान से भारत में आ पहुंचे, अजादारी के ये बादल कहा गरजे कहा बरसे।
विज्ञापन
सागर बनारसी ने ऐसे कहा, बस्ती जो अजादारी नजर आती है, इसकी तामीर में मेहनत है तुम्हारी सज्जाद। किरतास करबलाई ने पढ़ा, सैय्यदे सज्जाद ओ जैनब ने जो बख्शी है, हमे। शबरोज कानपुरी ने ऐसे पढ़ा, उस ने जब देखा के आया है अली का बेटा, संगे काबा ने कहा आइये किब्ला सज्जाद। इस अजादारी से नस्लों की हिफाजत हो गई। इनके अलावा साहिल अमरोहवी, कसीम इब्ने रफी, ताजदार, वाहिद, अफसर, अर्श, डॉ. लाडले रहबर, शाहनवाज तकी आदि ने अपने-अपने कलाम पेश किए। मौलाना शादाब ने मुल्क में अमन व चैन की दुआ कराई। अध्यक्ष नईम कौसर, जनरल सेक्रेटरी आसिफ निसार ने सभी का आभार व्यक्त किया।
विज्ञापन