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दीजिए पेड़ बचाने पर ध्यान, नहीं तो मुश्किल में फंसेगी जान
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अमरोहा। तापमान में आ रहे बदलाव की प्रमुख वजह पेड़ों की अंधाधुंध कटान है। हालात ये हो गए हैं कि जिले में वन क्षेत्र का रकबा घटता जा रहा है। मानक के अनुसार जनपद में 33 प्रतिशत वन क्षेत्र होने चाहिए, लेकिन पर्यावरण संरक्षण के लिए काम करने वालों का दावा है कि जिले में महज एक प्रतिशत वन क्षेत्र बचा है। इसकी वजह से वायु प्रदूषण में बढ़ोतरी हो रही है। अगर अभी भी आप और हम नहीं चेते तो जीवनदायिनी ऑक्सीजन देने वाले पेड़ नहीं रहेंगे और सांसों पर संकट गहरा जाएगा।
जिले के औद्योगिक क्षेत्र गजरौला में भी दिवाली के दौरान वायु गुणवत्ता सूचकांक में गिरावट आई थी। इसकी वजह आतिशबाजी को माना गया। इसके साथ ही ईंट भट्टा, चीनी मिल और फैक्टरियों का धुआं भी वातावरण को जहरीला बना रहा है। इसका मुख्य वजह है कि प्रदूषण को सोखने वाले वृक्षों का अंधाधुंध कटान हो रहा है। वन क्षेत्र के रकबा कम होने के साथ पड़ों की संख्या लगातार कम हो रही है। पर्यावरण में सुधार के लिए विशेषज्ञों ने पौधरोपण पर जोर दिया है। उन्होंने पेड़ पौधों के संरक्षण पर काम करना होगा। इसके अलावा ईंधन से संचालित निजी वाहनों का कम उपयोग किया जाए। सार्वजनिक वाहन के इस्तेमाल को बढ़ावा दिया जाएगा। इलेक्ट्रिक वाहनों को अधिक अपनाने की अपील की है। पर्यावरण संरक्षण से जुड़े लोगों की मानें तो, हालात विकट है समय से पहले बचाव करने की जरूरत है। वरना मुश्किल में मानव जीवन आ सकता है।
- वाहनों का संचालन प्रदूषण का प्रमुख कारण है। इससे पर्यावरण पर कुप्रभाव पड़ता है। पराली को जलाने पर रोक लगने की जरूरत है। प्लास्टिक के थैले और सामान पर रोक लगनी चाहिए। वहीं अलाव के लिए टायर और अन्य वस्तुओं के जलाने पर प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए। ईंट भट्ठे की चिमनियों में फिल्टर लगाया जाए, ताकि धुुआं वातावरण को दूषित नहीं कर सके। अधिक संख्या में पौधे लगाने की जरूरत है और उसके संरक्षण के लिए सक्रियता दिखानी होगी।
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- डॉ. हर्षदीप यादव, असिस्टेंट प्रोफेसर, वनस्पति विज्ञान, जेएस हिंदू पीजी कॉलेज।
विकास की तरफ ध्यान दें, लेकिन प्रकृति का अनुयायी होना चाहिए। इससे कई तरह के फायदे होते हैं। निजी वाहनों के संचालन पर रोक लगाई जाए। क्योंकि यह प्रदूषण बढ़ाने के सबसे प्रमुख स्रोत हैं। भोग विलास यानी सुविधा को त्यागने की लोगों के अंदर भावना होनी चाहिए। क्योंकि लोग जीवन को आरामदायक बनाने के लिए एयरकंडीशनर, रेफ्रिजरेटर, वाहन में अकेले चलना समेत उपाय आजमाते हैं। हालांकि अब ई व्हीकल के आने से पर्यावरण की सेहत में सुधार की उम्मीद है। इसको सरकार सख्ती से अपनाने पर जोर दे। हालांकि लोगों को स्वत: आगे आने की जरूरत है।
अनिल शर्मा, सहायक अभियंता, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड क्षेत्रीय कार्यालय, बिजनौर
शासन की नीति के अनुसार वनावरण बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं। इसके साथ ही लोगों को जागरूक किया जा रहा है। पेड़ लगाने से वायु की गुणवत्ता में सुधार आएगा। इसके साथ ही पौधों का संरक्षण भी करना होगा ताकि हम सभी को इसका लाभ मिल सके।
देवमणि मिश्र, डीएफओ
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जिले के औद्योगिक क्षेत्र गजरौला में भी दिवाली के दौरान वायु गुणवत्ता सूचकांक में गिरावट आई थी। इसकी वजह आतिशबाजी को माना गया। इसके साथ ही ईंट भट्टा, चीनी मिल और फैक्टरियों का धुआं भी वातावरण को जहरीला बना रहा है। इसका मुख्य वजह है कि प्रदूषण को सोखने वाले वृक्षों का अंधाधुंध कटान हो रहा है। वन क्षेत्र के रकबा कम होने के साथ पड़ों की संख्या लगातार कम हो रही है। पर्यावरण में सुधार के लिए विशेषज्ञों ने पौधरोपण पर जोर दिया है। उन्होंने पेड़ पौधों के संरक्षण पर काम करना होगा। इसके अलावा ईंधन से संचालित निजी वाहनों का कम उपयोग किया जाए। सार्वजनिक वाहन के इस्तेमाल को बढ़ावा दिया जाएगा। इलेक्ट्रिक वाहनों को अधिक अपनाने की अपील की है। पर्यावरण संरक्षण से जुड़े लोगों की मानें तो, हालात विकट है समय से पहले बचाव करने की जरूरत है। वरना मुश्किल में मानव जीवन आ सकता है।
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- वाहनों का संचालन प्रदूषण का प्रमुख कारण है। इससे पर्यावरण पर कुप्रभाव पड़ता है। पराली को जलाने पर रोक लगने की जरूरत है। प्लास्टिक के थैले और सामान पर रोक लगनी चाहिए। वहीं अलाव के लिए टायर और अन्य वस्तुओं के जलाने पर प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए। ईंट भट्ठे की चिमनियों में फिल्टर लगाया जाए, ताकि धुुआं वातावरण को दूषित नहीं कर सके। अधिक संख्या में पौधे लगाने की जरूरत है और उसके संरक्षण के लिए सक्रियता दिखानी होगी।
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- डॉ. हर्षदीप यादव, असिस्टेंट प्रोफेसर, वनस्पति विज्ञान, जेएस हिंदू पीजी कॉलेज।
विकास की तरफ ध्यान दें, लेकिन प्रकृति का अनुयायी होना चाहिए। इससे कई तरह के फायदे होते हैं। निजी वाहनों के संचालन पर रोक लगाई जाए। क्योंकि यह प्रदूषण बढ़ाने के सबसे प्रमुख स्रोत हैं। भोग विलास यानी सुविधा को त्यागने की लोगों के अंदर भावना होनी चाहिए। क्योंकि लोग जीवन को आरामदायक बनाने के लिए एयरकंडीशनर, रेफ्रिजरेटर, वाहन में अकेले चलना समेत उपाय आजमाते हैं। हालांकि अब ई व्हीकल के आने से पर्यावरण की सेहत में सुधार की उम्मीद है। इसको सरकार सख्ती से अपनाने पर जोर दे। हालांकि लोगों को स्वत: आगे आने की जरूरत है।
अनिल शर्मा, सहायक अभियंता, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड क्षेत्रीय कार्यालय, बिजनौर
शासन की नीति के अनुसार वनावरण बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं। इसके साथ ही लोगों को जागरूक किया जा रहा है। पेड़ लगाने से वायु की गुणवत्ता में सुधार आएगा। इसके साथ ही पौधों का संरक्षण भी करना होगा ताकि हम सभी को इसका लाभ मिल सके।
देवमणि मिश्र, डीएफओ