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कस्तूरबा की छात्राओं को ‘फोर डिग्री का अटैक’
ब्यूरो/अमर उजाला अमरोहा
Updated Thu, 19 Jan 2017 12:04 AM IST
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शुक्रवार की सुबह 10 बजे कुछ इस तरह का दिखा नजारा, कड़ाके की ठंड के बीच घने कोहरे में लाइट जलाकर जाते वाहन।
- फोटो : mau
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कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय की छात्राएं भीषण ठंड का ‘चार डिग्री अटैक’ झेल रही हैं। उन्हें चार डिग्री के इस तापमान में टंकी के बर्फ समान पानी में नहाने पर मजबूर होना पड़ रहा है। ठंडे पानी में नहाने से बीस से अधिक छात्राएं बीमारी की चपेट में आ गई हैं। कोई बुखार तो कोई को सिर दर्द, जुकाम आदि से पीड़ित हैं।
काफी बीमार छात्राओं को स्टाफ ने घर भेज दिया है। दस छात्राएं बुखार की हालात में बिस्तर पर लेटी हुई मिली। बीमार छात्राओं को स्टाफ द्वारा ही दवा दी जा रही है। गरीब बेटियों के सोने के लिए विद्यालय में पर्याप्त संख्या में तख्त भी उपलब्ध नहीं है। कड़ाके की सर्दी में जमीन पर बिस्तर डालकर फटे, पुरानी रजाई में ही सोना पड़ रहा है। रातभर सर्दी से छात्राएं कांपती रहती हैं।
अमर उजाला की टीम के सामने खुद छात्राओं ने विद्यालय की अव्यवस्थाओं को बयां किया है। इस ओर न तो विभागीय अफसरों का कोई ध्यान है, न ही प्रशासन के अफसरों का।
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अमर उजाला टीम ने बुधवार को फाजलपुर स्थित अमरोहा देहात और अमरोहा नगर क्षेत्र के कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय का औचक निरीक्षण किया।
विद्यालय की व्यवस्थाओं का जायजा लिया तो व्यवस्थाओं की पोल खुल गई। गरीब बेटियों को विद्यालय में सोने के लिए पर्याप्त संख्या में तख्त भी उपलब्ध नहीं थे। काफी छात्राओं के बिस्तर जमीन पर लगे हुए थे।
एक पतला से गद्दा और फटी पुरानी रजाई बिस्तर पर रखी हुई थी। जिन छात्राओं के बिस्तर तख्त पर लगे हुए थे, वह तख्त भी सही स्थिति में नहीं थे, किसी का पाया टूटा हुआ तो किसी के तख्ते टूटे हुए थे। बदहाल तख्तों पर छात्रों को सोना पड़ता है। यहीं नहीं एक बिस्तर में दो-दो छात्राओं को एडजस्ट किया गया है।
छात्राएं बोलीं, अव्यवस्थाओं के बीच रह रही हैं
अमरोहा। कक्षा आठ की छात्रा मनिता ने बताया कि विद्यालय में अव्यवस्थाओं की बीच रहना पड़ रहा है। न सोने के लिए पर्याप्त बिस्तर है, न ही तख्त आदि का इंतजाम। जमीन पर बिस्तर बिछाकर फटी पुरानी रजाई में सोना पड़ता है। सुबह टंकी के ठंडे पानी में नहाना पड़ता है। कक्षा आठ की छात्रा विमलेश ने बताया कि ठंडे पानी में नहाने से छात्राएं बीमार हो रही हैं।
सिर में दर्द बना रहता है। नीचे से खुद हैंडपंप से पानी लेकर आना पड़ता है। सुविधाओं के नाम पर विद्यालय में कुछ नहीं है। छात्रा प्रियंका ने बताया कि खुद ही कपड़े धोने पड़ते हैं। बीमार होने पर डाक्टर यहां देखने नहीं आते, स्टाफ द्वारा दवा दी जाती है।
छात्रा पूनम ने बताया कि सोने के लिए जो रजाई गद्दे हमें दिए गए हैं, वह बहुत हल्के हैं उसमें ठंड नहीं जाती है, रातभर ठंड लगती है। इससे कई छात्राएं बीमार हो गई हैं।
कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय में जो अव्यवस्थाएं हैं, उन्हें दूर कराया जाएगा। तख्त, रजाई आदि की व्यवस्थाओं पर ध्यान दिया जा रहा है। मैं खुद विद्यालय पहुंचकर सभी व्यवस्थाओं का जायजा लूंगा, लापरवाही मिली को कार्रवाई की जाएगी। छात्राओं की सेहत से खिलवाड़ नहीं होने दिया जाएगा। वेद प्रकाश, जिलाधिकारी अमरोहा
गर्म पानी के लिए विद्यालय में उपकरण उपलब्ध हैं, वार्डन को निर्देश दिए गए हैं, छात्राओं को नहाने के लिए गर्म पानी उपलब्ध कराएं। पानी गर्म करने के लिए रॉड आदि का इस्तेमाल करें। लेकिन आदेश पर अमल नहीं हो रहा है। शिकायतें मिल रही हैं। वार्डन से स्पष्टीकरण भी तलब किया जा चुका है। विद्यालय में जो अव्यवस्थाएं हैं, उसे दुरुस्त कराया जा रहा है। जो छात्राएं बीमार हैं, उन्हें डाक्टर को दिखाया जा रहा है। शमीम खानम, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी
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काफी बीमार छात्राओं को स्टाफ ने घर भेज दिया है। दस छात्राएं बुखार की हालात में बिस्तर पर लेटी हुई मिली। बीमार छात्राओं को स्टाफ द्वारा ही दवा दी जा रही है। गरीब बेटियों के सोने के लिए विद्यालय में पर्याप्त संख्या में तख्त भी उपलब्ध नहीं है। कड़ाके की सर्दी में जमीन पर बिस्तर डालकर फटे, पुरानी रजाई में ही सोना पड़ रहा है। रातभर सर्दी से छात्राएं कांपती रहती हैं।
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अमर उजाला की टीम के सामने खुद छात्राओं ने विद्यालय की अव्यवस्थाओं को बयां किया है। इस ओर न तो विभागीय अफसरों का कोई ध्यान है, न ही प्रशासन के अफसरों का।
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अमर उजाला टीम ने बुधवार को फाजलपुर स्थित अमरोहा देहात और अमरोहा नगर क्षेत्र के कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय का औचक निरीक्षण किया।
विद्यालय की व्यवस्थाओं का जायजा लिया तो व्यवस्थाओं की पोल खुल गई। गरीब बेटियों को विद्यालय में सोने के लिए पर्याप्त संख्या में तख्त भी उपलब्ध नहीं थे। काफी छात्राओं के बिस्तर जमीन पर लगे हुए थे।
एक पतला से गद्दा और फटी पुरानी रजाई बिस्तर पर रखी हुई थी। जिन छात्राओं के बिस्तर तख्त पर लगे हुए थे, वह तख्त भी सही स्थिति में नहीं थे, किसी का पाया टूटा हुआ तो किसी के तख्ते टूटे हुए थे। बदहाल तख्तों पर छात्रों को सोना पड़ता है। यहीं नहीं एक बिस्तर में दो-दो छात्राओं को एडजस्ट किया गया है।
छात्राएं बोलीं, अव्यवस्थाओं के बीच रह रही हैं
अमरोहा। कक्षा आठ की छात्रा मनिता ने बताया कि विद्यालय में अव्यवस्थाओं की बीच रहना पड़ रहा है। न सोने के लिए पर्याप्त बिस्तर है, न ही तख्त आदि का इंतजाम। जमीन पर बिस्तर बिछाकर फटी पुरानी रजाई में सोना पड़ता है। सुबह टंकी के ठंडे पानी में नहाना पड़ता है। कक्षा आठ की छात्रा विमलेश ने बताया कि ठंडे पानी में नहाने से छात्राएं बीमार हो रही हैं।
सिर में दर्द बना रहता है। नीचे से खुद हैंडपंप से पानी लेकर आना पड़ता है। सुविधाओं के नाम पर विद्यालय में कुछ नहीं है। छात्रा प्रियंका ने बताया कि खुद ही कपड़े धोने पड़ते हैं। बीमार होने पर डाक्टर यहां देखने नहीं आते, स्टाफ द्वारा दवा दी जाती है।
छात्रा पूनम ने बताया कि सोने के लिए जो रजाई गद्दे हमें दिए गए हैं, वह बहुत हल्के हैं उसमें ठंड नहीं जाती है, रातभर ठंड लगती है। इससे कई छात्राएं बीमार हो गई हैं।
कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय में जो अव्यवस्थाएं हैं, उन्हें दूर कराया जाएगा। तख्त, रजाई आदि की व्यवस्थाओं पर ध्यान दिया जा रहा है। मैं खुद विद्यालय पहुंचकर सभी व्यवस्थाओं का जायजा लूंगा, लापरवाही मिली को कार्रवाई की जाएगी। छात्राओं की सेहत से खिलवाड़ नहीं होने दिया जाएगा। वेद प्रकाश, जिलाधिकारी अमरोहा
गर्म पानी के लिए विद्यालय में उपकरण उपलब्ध हैं, वार्डन को निर्देश दिए गए हैं, छात्राओं को नहाने के लिए गर्म पानी उपलब्ध कराएं। पानी गर्म करने के लिए रॉड आदि का इस्तेमाल करें। लेकिन आदेश पर अमल नहीं हो रहा है। शिकायतें मिल रही हैं। वार्डन से स्पष्टीकरण भी तलब किया जा चुका है। विद्यालय में जो अव्यवस्थाएं हैं, उसे दुरुस्त कराया जा रहा है। जो छात्राएं बीमार हैं, उन्हें डाक्टर को दिखाया जा रहा है। शमीम खानम, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी