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Amroha News: छह साल से सर्जन को तरस रही गजरौला सीएचसी, रेफर करने पड़ते हैं ऑपरेशन वाले मरीज
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छह साल से सर्जन को तरस रही गजरौला सीएचसी, रेफर करने पड़ते हैं ऑपरेशन वाले मरीज
गजरौला (अमरोहा)। गजरौला सीएचसी में छह साल से सर्जन नहीं है, जिसके चलते यहां पर लोगों को ऑपरेशन की सुविधा नहीं मिल रही। मरीज को सीएचसी से जिला अस्पताल रेफर करना पड़ता है। जबकि हाईवे से लेकर अन्य मार्गों पर आए दिन हादसे में चार से पांच मामले ऐसे आते हैं, जिनमें घायल को ऑपरेशन की जरूरत होती है।
गजरौला सीएचसी के अधीन 139 गांव आते हैं। इसके अलावा नगर और औद्योगिक इकाइयों में काम करने वाले श्रमिकों के साथ ही रजबपुर, ब्रजघाट तक के लोग सीएचसी में आते हैं। घायल और मरीजों के लिए यहां पर स्वास्थ्य सुविधाएं बेहतर होनी चाहिए, मगर ऐसा नहीं है। सीएचसी में छह विशेषज्ञों में पांच की तैनाती है। मगर सबसे अहम यहां पर सर्जन बीते छह साल से नहीं है। यहां पर तैनात डॉ. प्रदीप अग्रवाल का छह साल पूर्व तबादला कर दिया गया। उनके बाद यहां पर किसी की तैनाती नहीं की गई। जिसके चलते सड़क हादसे में घायल उन लोगों को खासी परेशानी का सामना करना पड़ता है, जिनको ऑपरेशन की जरूरत होती है। हाईवे से लेकर धनौरा-गजरौला मार्ग, हसनपुर-संभल मार्ग पर आए दिन हादसे में लोग गंभीर रूप से घायल हो रहे हैं। इनमें अधिकांश को तुरंत ऑपरेशन की जरूरत पड़ती है, लेकिन सीएचसी में सर्जन नहीं होने के कारण रेफर करना पड़ता है। इसके अलावा हर्निया, प्रोस्टेट आदि के मरीजों को ऑपरेशन की व्यवस्था नहीं है। उनको जिला अस्पताल या अन्य अस्पताल भेजना पड़ता है। सीएचसी प्रभारी डॉ. योगेंद्र सिंह का कहना है कि यहां पर सर्जन की तैनाती हो जाए तो आसपास के लोगों को फायदा मिलेगा। रोजाना चार से पांच लोग ऐसे आते हैं, जिनको ऑपरेशन की जरूरत पड़ती है।
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गजरौला (अमरोहा)। गजरौला सीएचसी में छह साल से सर्जन नहीं है, जिसके चलते यहां पर लोगों को ऑपरेशन की सुविधा नहीं मिल रही। मरीज को सीएचसी से जिला अस्पताल रेफर करना पड़ता है। जबकि हाईवे से लेकर अन्य मार्गों पर आए दिन हादसे में चार से पांच मामले ऐसे आते हैं, जिनमें घायल को ऑपरेशन की जरूरत होती है।
गजरौला सीएचसी के अधीन 139 गांव आते हैं। इसके अलावा नगर और औद्योगिक इकाइयों में काम करने वाले श्रमिकों के साथ ही रजबपुर, ब्रजघाट तक के लोग सीएचसी में आते हैं। घायल और मरीजों के लिए यहां पर स्वास्थ्य सुविधाएं बेहतर होनी चाहिए, मगर ऐसा नहीं है। सीएचसी में छह विशेषज्ञों में पांच की तैनाती है। मगर सबसे अहम यहां पर सर्जन बीते छह साल से नहीं है। यहां पर तैनात डॉ. प्रदीप अग्रवाल का छह साल पूर्व तबादला कर दिया गया। उनके बाद यहां पर किसी की तैनाती नहीं की गई। जिसके चलते सड़क हादसे में घायल उन लोगों को खासी परेशानी का सामना करना पड़ता है, जिनको ऑपरेशन की जरूरत होती है। हाईवे से लेकर धनौरा-गजरौला मार्ग, हसनपुर-संभल मार्ग पर आए दिन हादसे में लोग गंभीर रूप से घायल हो रहे हैं। इनमें अधिकांश को तुरंत ऑपरेशन की जरूरत पड़ती है, लेकिन सीएचसी में सर्जन नहीं होने के कारण रेफर करना पड़ता है। इसके अलावा हर्निया, प्रोस्टेट आदि के मरीजों को ऑपरेशन की व्यवस्था नहीं है। उनको जिला अस्पताल या अन्य अस्पताल भेजना पड़ता है। सीएचसी प्रभारी डॉ. योगेंद्र सिंह का कहना है कि यहां पर सर्जन की तैनाती हो जाए तो आसपास के लोगों को फायदा मिलेगा। रोजाना चार से पांच लोग ऐसे आते हैं, जिनको ऑपरेशन की जरूरत पड़ती है।
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