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फैक्टि्रयों का ‘जहर’ पी रहे गजरौला काे मिलेगी राहत
ब्यूरो/अमर उजाला अमरोहा
Updated Fri, 28 Apr 2017 01:11 AM IST
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हसनपुर में औद्योगिक इकाई बंद होने के आदेश पर खुशी मनाते मानवाधिकार कार्यकर्ता।
- फोटो : amar ujala
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अमरोहा में बगद नदी को प्रदूषित करने वाली जुबिलेंट लाइफ साइंसेज, टेवा एपीआई समेत 13 औद्योगिक इकाइयों को नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) द्वारा बंद करने के आदेश से क्षेत्रवासियों में खुशी की लहर दौड़ गई है। प्रदूषण से निजात दिलाने के लिए वर्षोँ से आंदोलित संगठनों व युवाओं की टीमों ने इस फैसले की सराहना की है। अमर उजाला ने बगद के प्रदूषण की खबर को प्रमुखता के साथ्ा प्रकाशित किया थ्ाा।
औद्योगिक नगरी गजरौला में नेशनल हाइवे-24 पर जुबिलेंट लाइफ साइंसेज कंपनी से बगल से होकर जा रही बगद नदी और उसके आसपास के भूजल स्तर को जहरीला हुए एक अरसा हो गया। आलम ये है कि बगद से सटे गांव के हैंडपंप और खेतों पर लगे ट्यूबवेल भी जहरीला पीला और लाल पानी उगलते हैं।
बता दें कि वर्ष 2016 के अप्रैल माह में बगद नदी से सटे 42 गांव के युवाओं की एक टीम ने जुबिलेंट कंपनी समेत औद्योगिक इकाइयों से होने वाले जल प्रदूषण के खिलाफ मुहिम छेड़ी थी।
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बगद नदी समेत नदी से सटे गांव और खेतों का भ्रमण कर ट्यूबवेल और हैंडपंपों के पानी के सैंपल लिये थे। ये सैंपल दिल्ली की एक लेबोरेटरी में जांच के लिए भेजे थे। साथ ही मौके पर ही टोटल डिजॉल्व सॉल्वेंट मीटर (टीडीएस मीटर) से नदी के पानी समेत हैंडपंपों के पानी की गुणवत्ता की जांच भी की थी।
टीडीएस मीटर से टीडीएस और पीएच वैल्यू चेक की थी। टीडीएस मीटर में आई रीडिंग से पानी पीने योग्य नहीं होने की बात सामने आयी थी। इसे अमर उजाला ने 17 अप्रैल 2016 को ‘जहरीला हुआ बगद नदी का पानी’ शीर्षक से प्रमुखता से प्रकाशित किया था। लगातार खबरें प्रकाशित कीं। इसके िलए लोगों ने अमर उजाला का धन्यवाद दिया।
ये आई थी टीडीएस मीटर की रिपोर्ट
गजरौला। टीडीएस मीटर के मुताबिक बगद के पानी का टीडीएस करीब 4800 और पीएच वैल्यू 11 पाया गया था, जबकि नदी के आसपास के खेतों में लगे ट्यूबवेल के पानी की का टीडीएस 2800 और हैंडपंपों के पानी का टीडीएस 1200 पाया गया था। प्रदूषण बोर्ड के पैरामीटर्स के मुताबिक पीने योग्य पानी का टीडीएस 120 से 350 होता है। पीएच वैल्यू 6.5 से 7.5, कार्बन ऑक्सीजन डिमांड 150, बायोलॉजिकल ऑक्सीजन डिमांड 30 होती है। इससे स्पष्ट था कि इस नदी के दूषित पानी से ट्यूबवेल और हैंडपंप का पानी भी जहरीला हो रहा है।
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औद्योगिक नगरी गजरौला में नेशनल हाइवे-24 पर जुबिलेंट लाइफ साइंसेज कंपनी से बगल से होकर जा रही बगद नदी और उसके आसपास के भूजल स्तर को जहरीला हुए एक अरसा हो गया। आलम ये है कि बगद से सटे गांव के हैंडपंप और खेतों पर लगे ट्यूबवेल भी जहरीला पीला और लाल पानी उगलते हैं।
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बता दें कि वर्ष 2016 के अप्रैल माह में बगद नदी से सटे 42 गांव के युवाओं की एक टीम ने जुबिलेंट कंपनी समेत औद्योगिक इकाइयों से होने वाले जल प्रदूषण के खिलाफ मुहिम छेड़ी थी।
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बगद नदी समेत नदी से सटे गांव और खेतों का भ्रमण कर ट्यूबवेल और हैंडपंपों के पानी के सैंपल लिये थे। ये सैंपल दिल्ली की एक लेबोरेटरी में जांच के लिए भेजे थे। साथ ही मौके पर ही टोटल डिजॉल्व सॉल्वेंट मीटर (टीडीएस मीटर) से नदी के पानी समेत हैंडपंपों के पानी की गुणवत्ता की जांच भी की थी।
टीडीएस मीटर से टीडीएस और पीएच वैल्यू चेक की थी। टीडीएस मीटर में आई रीडिंग से पानी पीने योग्य नहीं होने की बात सामने आयी थी। इसे अमर उजाला ने 17 अप्रैल 2016 को ‘जहरीला हुआ बगद नदी का पानी’ शीर्षक से प्रमुखता से प्रकाशित किया था। लगातार खबरें प्रकाशित कीं। इसके िलए लोगों ने अमर उजाला का धन्यवाद दिया।
ये आई थी टीडीएस मीटर की रिपोर्ट
गजरौला। टीडीएस मीटर के मुताबिक बगद के पानी का टीडीएस करीब 4800 और पीएच वैल्यू 11 पाया गया था, जबकि नदी के आसपास के खेतों में लगे ट्यूबवेल के पानी की का टीडीएस 2800 और हैंडपंपों के पानी का टीडीएस 1200 पाया गया था। प्रदूषण बोर्ड के पैरामीटर्स के मुताबिक पीने योग्य पानी का टीडीएस 120 से 350 होता है। पीएच वैल्यू 6.5 से 7.5, कार्बन ऑक्सीजन डिमांड 150, बायोलॉजिकल ऑक्सीजन डिमांड 30 होती है। इससे स्पष्ट था कि इस नदी के दूषित पानी से ट्यूबवेल और हैंडपंप का पानी भी जहरीला हो रहा है।