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भाजपा नेता और पीएफए पदाधिकारी समेत तीन पर धोखाधड़ी, पशु क्रूरता की रिपोर्ट
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गजरौला (अमरोहा)। पांच साल पहले की गई शिकायत की जांच में आरोप सही पाए जाने पर भारतीय जनता पार्टी के नेता राजीव शुक्ला और पीपुल फॉर एनिमल की प्रदेश रेडिंग टीम प्रभारी उनके भाई रविंद्र मोहन शुक्ला के खिलाफ खिलाफ धोखाधड़ी, गो हत्या निवारण अधिनियम और पशुओं के प्रति क्रूरता निवारण अधिनियम की धाराओं में रिपोर्ट दर्ज की गई है।
शनिवार को एसएसआई प्रमोद कुमार पाठक ने बताया कि शुक्रवार को रजनीश शर्मा पुत्र गीतराम शर्मा हाल निवासी 39ए नंद वाटिका सहारनपुर ने थाने में दी तहरीर में कहा है कि उनकी पत्नी मंजू शर्मा ने पूर्व में कामधेनु योजना गजरौला के संचालक राजीव शुक्ला एवं रविंद्र मोहन शुक्ला के खिलाफ ऑन लाइन शिकायत दर्ज कराई थी। इसमें कहा गया था कि राजीव शुक्ला ने कामधेनु योजना के संचालन के नाम पर फर्जीवाड़ा कर एक बैंक की शाखा से लगभग 40 लाख का ऋण लिया था। कुछ गाय खरीदीं और अधिकांश का बगैर खरीदे ही फर्जी अभिलेख तैयार कर धोखाधड़ी से बीमा भी करा लिया। बाद में बाहर से मृत गायों को लाकर उन्हें दिखाकर बीमा राशि हड़प ली गई। तहरीर में कहा गया है कि इसकी वीडियोग्राफी भी उनके पास है। राजीव शुक्ला एवं रविंद्र मोहन शुक्ला के संदर्भित विषय की जांच संयुक्त निदेशक गायनी पशुपालन विभाग मुरादाबाद मंडल ने की थी। उन्होंने अपनी आख्या में आरोप सही पाए जाने की जानकारी दी। तहरीर में कहा गया है कि 31 अक्तूबर 2015 को रविंद्र मोहन शुक्ला एवं राजीव शुक्ला द्वारा एक गाय को अपने दो लोगों से उनकी आंखों के सामने पन्नी से मुंह दबाकर मार दिया गया था। गाड़ी में एक मृत गाय भी मंगवाकर वहां उतारी गई। इसके बाद दोनों मृत गायों का क्लेम धोखाधड़ी कर ले लिया। पुलिस ने तहरीर के आधार पर दोनों भाइयों एवं एक अज्ञात के खिलाफ धोखाधड़ी, गौहत्या निवारण अधिनियम और पशुओं के प्रति क्रूरता निवारण अधिनियम की धाराओं में रिपोर्ट दर्ज कर ली है। बता दें कि राजीव शुक्ला भाजपा से जुड़े हैं और उनके भाई रविंद्र मोहन शुक्ला पीएफए की प्रदेश रेडिंग टीम के प्रभारी हैं। इनका अपनी ताई से संपत्ति को लेकर विवाद चला आ रहा है। कुछ माह पूर्व दोनों भाई घर में घुसकर मारपीट, जानलेवा हमला, लूटपाट आदि के मामले में जेल से जमानत पर रिहा होकर आए हैं।
उधर, पीएफए की प्रदेश रेडिंग टीम प्रभारी/पशु अधिकार कार्यकर्ता रविंद्र मोहन शुक्ला ने बताया कि शिकायतकर्ता रजनीश शर्मा एवं मंजू शर्मा से न्यायालय में जमीनी विवाद चल रहा है। इसके अलावा दर्ज एफआईआर के मुताबिक शिकायतकर्ता के साथ कोई धोखाधड़ी नहीं हुई है। नियमानुसार वह एफआईआर दर्ज कराने के हकदार नहीं हैं। पांच वर्ष पूर्व हुई घटना पर उसी समय पुलिस को क्यों नहीं बुलाया गया था। रविंद्र शुक्ला का यह भी कहना है कि उन्होंने खुद ही कई के खिलाफ गौवध एवं पशु वध की धाराओं में मुकदमे दर्ज कराए हैं।
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शनिवार को एसएसआई प्रमोद कुमार पाठक ने बताया कि शुक्रवार को रजनीश शर्मा पुत्र गीतराम शर्मा हाल निवासी 39ए नंद वाटिका सहारनपुर ने थाने में दी तहरीर में कहा है कि उनकी पत्नी मंजू शर्मा ने पूर्व में कामधेनु योजना गजरौला के संचालक राजीव शुक्ला एवं रविंद्र मोहन शुक्ला के खिलाफ ऑन लाइन शिकायत दर्ज कराई थी। इसमें कहा गया था कि राजीव शुक्ला ने कामधेनु योजना के संचालन के नाम पर फर्जीवाड़ा कर एक बैंक की शाखा से लगभग 40 लाख का ऋण लिया था। कुछ गाय खरीदीं और अधिकांश का बगैर खरीदे ही फर्जी अभिलेख तैयार कर धोखाधड़ी से बीमा भी करा लिया। बाद में बाहर से मृत गायों को लाकर उन्हें दिखाकर बीमा राशि हड़प ली गई। तहरीर में कहा गया है कि इसकी वीडियोग्राफी भी उनके पास है। राजीव शुक्ला एवं रविंद्र मोहन शुक्ला के संदर्भित विषय की जांच संयुक्त निदेशक गायनी पशुपालन विभाग मुरादाबाद मंडल ने की थी। उन्होंने अपनी आख्या में आरोप सही पाए जाने की जानकारी दी। तहरीर में कहा गया है कि 31 अक्तूबर 2015 को रविंद्र मोहन शुक्ला एवं राजीव शुक्ला द्वारा एक गाय को अपने दो लोगों से उनकी आंखों के सामने पन्नी से मुंह दबाकर मार दिया गया था। गाड़ी में एक मृत गाय भी मंगवाकर वहां उतारी गई। इसके बाद दोनों मृत गायों का क्लेम धोखाधड़ी कर ले लिया। पुलिस ने तहरीर के आधार पर दोनों भाइयों एवं एक अज्ञात के खिलाफ धोखाधड़ी, गौहत्या निवारण अधिनियम और पशुओं के प्रति क्रूरता निवारण अधिनियम की धाराओं में रिपोर्ट दर्ज कर ली है। बता दें कि राजीव शुक्ला भाजपा से जुड़े हैं और उनके भाई रविंद्र मोहन शुक्ला पीएफए की प्रदेश रेडिंग टीम के प्रभारी हैं। इनका अपनी ताई से संपत्ति को लेकर विवाद चला आ रहा है। कुछ माह पूर्व दोनों भाई घर में घुसकर मारपीट, जानलेवा हमला, लूटपाट आदि के मामले में जेल से जमानत पर रिहा होकर आए हैं।
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उधर, पीएफए की प्रदेश रेडिंग टीम प्रभारी/पशु अधिकार कार्यकर्ता रविंद्र मोहन शुक्ला ने बताया कि शिकायतकर्ता रजनीश शर्मा एवं मंजू शर्मा से न्यायालय में जमीनी विवाद चल रहा है। इसके अलावा दर्ज एफआईआर के मुताबिक शिकायतकर्ता के साथ कोई धोखाधड़ी नहीं हुई है। नियमानुसार वह एफआईआर दर्ज कराने के हकदार नहीं हैं। पांच वर्ष पूर्व हुई घटना पर उसी समय पुलिस को क्यों नहीं बुलाया गया था। रविंद्र शुक्ला का यह भी कहना है कि उन्होंने खुद ही कई के खिलाफ गौवध एवं पशु वध की धाराओं में मुकदमे दर्ज कराए हैं।
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