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सलेमपुर गोसाईं में बुखार से तीन की मौत
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झारी में बिजली विभाग के खिलाफ प्रदर्शन करते लोग।
- फोटो : JPNAGAR
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गजरौला (अमरोहा)। ब्लॉक के सलेमपुर गोसाईं में बुखार पीड़ित दो महिलाओं समेत तीन ग्रामीणों की मौत हो गई। गांव में सैकड़ों की तादाद में बच्चे और बड़े बुखार, वायरल, डेंगू और डेंगू आशंकित बताए जा रहे हैं। गुस्साए ग्रामीणों ने स्वास्थ्य विभाग के खिलाफ प्रदर्शन भी किया।
बृहस्पतिवार की सुबह चार बजे गांव सलेमपुर गोसाईं निवासी छोटेलाल कश्यप (70) पुत्र त्रिलोकी की घर में ही उपचार के दौरान मौत हो गई। मृतक की पत्नी कुसुम और पुत्र डालचंद ने बताया कि वह काफी दिनों से बुखार से पीड़ित चल रहे थे। इसी गांव में रहने वाली दुलारी (65) पत्नी स्व.चंदर को मुरादाबाद के एक हास्पिटल में भर्ती कराया गया था। सुबह लगभग दस बजे उन्हें वहीं से मेरठ ले जाते समय रास्ते में ही उनकी सांसें थम गईं। मृतका के पुत्र बबलू और राजपाल के मुताबिक उन्हें काफी दिनों से बुखार था। गांव में सुधार नहीं होने पर मुरादाबाद ले गए थे। इसी गांव की खजानो (70) पत्नी छिद्दा सिंह ने बुधवार की रात सवा नौ बजे दम तोड़ दिया। मृतका के पुत्र मदन, जयपाल और राजपाल ने बताया कि वह भी बुखार से पीड़ित थीं। वहीं गांव में एक साथ तीन मौतों के बाद ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा और उन्होंने स्वास्थ्य विभाग के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। इनका कहना था कि इन मौतों के लिए विभाग ही जिम्मेदार है। उन्होंने गांव में स्थित पीएचसी में चिकित्सकों के नहीं आने का भी आरोप लगाया। प्रदर्शन करने वालों में क्रांति देवी, सोमवती, कुसुम, क्रांति, शिमला, सावित्री, सर्वेश, सरोज, नरेंद्र गोला, सतेंद्र, संतोष, रूपवती, सूरजमुखी, गंगादेई, कलावती आदि रहे।
डीएम को शिकायत के बाद ही गांव पहुंची टीम
गजरौला। गांव सलेमपुर गोसाईं में बुखार का जबरदस्त प्रकोप है। स्वास्थ्य विभाग भले ही लाख दावे करे लेकिन गांव के हर तीसरे घर में कोई न कोई रोगी अवश्य मिल जाएगा। आलम यह है कि गांव में सजी अप्रशिक्षित चिकित्सकों की दुकानों पर मेला सा लगा हुआ है। पीएचसी में चिकित्सक नहीं होने के कारण वहां सन्नाटा पसरा रहता है। बृहस्पतिवार को गांव निवासी डॉ. अरविंद गोस्वामी, नरेंद्र गोला, धर्मानंद शास्त्री, जयदेव आदि ने इसकी शिकायत डीएम उमेश मिश्र से की थी। मामले की गंभीरता को देख डीएम श्री मिश्र ने तत्काल गांव में स्वास्थ्य विभाग की टीम को जाने के आदेश दिए।
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स्वास्थ्य विभाग का दावा अन्य कारणों से हुईं मौत
गजरौला। डीएम उमेश मिश्र के आदेश पर स्वास्थ्य विभाग की टीम अपराह्न तीन बजे गांव पहुंची और एक घंटे बाद ही वहां से लौट आई। शाम को सीएचसी अधीक्षक डॉ. योगेंद्र सिंह की ओर से जारी प्रेसनोट के मुताबिक गांव में बुखार, वायरल, डेंगू अथवा डेंगू आशंकित कोई रोगी नहीं है। इनमें दुलारी की मौत पूर्व में बाइक दुर्घटना के दौरान सिर में लगी चोट से हुई है। छोटे लाल खांसी पीड़ित थे और उन्हें सांस लेने में दिक्कत होती थी। उनकी मौत फेफड़ों की बीमारी से हुई है जबकि खजानो देवी हेपेटाइटिस सी से पीड़ित थीं और उन्हें खून की उल्टी हुई थी। सीएचसी अधीक्षक डॉ. योगेंद्र सिंह ने बताया कि गांव में कीटनाशक दवाओं का छिड़काव भी कराया जा चुका है।
बेटे को बुखार, बहू को हैं डेंगू, मेरठ में भर्ती
गजरौला। गांव सलेमपुर गोसाईं में बुखार पीड़ितों की तादाद पांच सौ के पार है। गांव निवासी चंडी प्रसाद ने बताया कि उनके बेटे प्रमोद को काफी दिनों से बीमार है। जबकि दूसरे बेटे पुष्पेंद्र की पत्नी लवी मेरठ में डेंगू का उपचार करा रही है। इसके अलावा जयदेव पुत्र राजपाल सिंह, कमला पत्नी राजेंद्र, अनीता पत्नी मिंटू, नरेंद्र पुत्र महावीर, बबलू पुत्र चंदर सिंह, बंटी पुत्री बबलू, कपिल पुत्र दोजिंदर, रोहताश पुत्र उमराव, चंदर पुत्र घनश्याम, गजेंद्र पुत्र सूरज सिंह, धर्मानंद शास्त्री, जयदेव, वीरेंद्र सैनी, सुभाष, जिया, हरस्वरूप, कृष्णा, कुसुम, छतरे, निशा, मायावती, पुनीत, महिपाल, ओमकार, गीता, नन्हे आदि समेत सैकड़ों लोगों ने बुखार आदि रोगों से पीड़ित होने की बात कही है।
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बृहस्पतिवार की सुबह चार बजे गांव सलेमपुर गोसाईं निवासी छोटेलाल कश्यप (70) पुत्र त्रिलोकी की घर में ही उपचार के दौरान मौत हो गई। मृतक की पत्नी कुसुम और पुत्र डालचंद ने बताया कि वह काफी दिनों से बुखार से पीड़ित चल रहे थे। इसी गांव में रहने वाली दुलारी (65) पत्नी स्व.चंदर को मुरादाबाद के एक हास्पिटल में भर्ती कराया गया था। सुबह लगभग दस बजे उन्हें वहीं से मेरठ ले जाते समय रास्ते में ही उनकी सांसें थम गईं। मृतका के पुत्र बबलू और राजपाल के मुताबिक उन्हें काफी दिनों से बुखार था। गांव में सुधार नहीं होने पर मुरादाबाद ले गए थे। इसी गांव की खजानो (70) पत्नी छिद्दा सिंह ने बुधवार की रात सवा नौ बजे दम तोड़ दिया। मृतका के पुत्र मदन, जयपाल और राजपाल ने बताया कि वह भी बुखार से पीड़ित थीं। वहीं गांव में एक साथ तीन मौतों के बाद ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा और उन्होंने स्वास्थ्य विभाग के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। इनका कहना था कि इन मौतों के लिए विभाग ही जिम्मेदार है। उन्होंने गांव में स्थित पीएचसी में चिकित्सकों के नहीं आने का भी आरोप लगाया। प्रदर्शन करने वालों में क्रांति देवी, सोमवती, कुसुम, क्रांति, शिमला, सावित्री, सर्वेश, सरोज, नरेंद्र गोला, सतेंद्र, संतोष, रूपवती, सूरजमुखी, गंगादेई, कलावती आदि रहे।
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डीएम को शिकायत के बाद ही गांव पहुंची टीम
गजरौला। गांव सलेमपुर गोसाईं में बुखार का जबरदस्त प्रकोप है। स्वास्थ्य विभाग भले ही लाख दावे करे लेकिन गांव के हर तीसरे घर में कोई न कोई रोगी अवश्य मिल जाएगा। आलम यह है कि गांव में सजी अप्रशिक्षित चिकित्सकों की दुकानों पर मेला सा लगा हुआ है। पीएचसी में चिकित्सक नहीं होने के कारण वहां सन्नाटा पसरा रहता है। बृहस्पतिवार को गांव निवासी डॉ. अरविंद गोस्वामी, नरेंद्र गोला, धर्मानंद शास्त्री, जयदेव आदि ने इसकी शिकायत डीएम उमेश मिश्र से की थी। मामले की गंभीरता को देख डीएम श्री मिश्र ने तत्काल गांव में स्वास्थ्य विभाग की टीम को जाने के आदेश दिए।
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स्वास्थ्य विभाग का दावा अन्य कारणों से हुईं मौत
गजरौला। डीएम उमेश मिश्र के आदेश पर स्वास्थ्य विभाग की टीम अपराह्न तीन बजे गांव पहुंची और एक घंटे बाद ही वहां से लौट आई। शाम को सीएचसी अधीक्षक डॉ. योगेंद्र सिंह की ओर से जारी प्रेसनोट के मुताबिक गांव में बुखार, वायरल, डेंगू अथवा डेंगू आशंकित कोई रोगी नहीं है। इनमें दुलारी की मौत पूर्व में बाइक दुर्घटना के दौरान सिर में लगी चोट से हुई है। छोटे लाल खांसी पीड़ित थे और उन्हें सांस लेने में दिक्कत होती थी। उनकी मौत फेफड़ों की बीमारी से हुई है जबकि खजानो देवी हेपेटाइटिस सी से पीड़ित थीं और उन्हें खून की उल्टी हुई थी। सीएचसी अधीक्षक डॉ. योगेंद्र सिंह ने बताया कि गांव में कीटनाशक दवाओं का छिड़काव भी कराया जा चुका है।
बेटे को बुखार, बहू को हैं डेंगू, मेरठ में भर्ती
गजरौला। गांव सलेमपुर गोसाईं में बुखार पीड़ितों की तादाद पांच सौ के पार है। गांव निवासी चंडी प्रसाद ने बताया कि उनके बेटे प्रमोद को काफी दिनों से बीमार है। जबकि दूसरे बेटे पुष्पेंद्र की पत्नी लवी मेरठ में डेंगू का उपचार करा रही है। इसके अलावा जयदेव पुत्र राजपाल सिंह, कमला पत्नी राजेंद्र, अनीता पत्नी मिंटू, नरेंद्र पुत्र महावीर, बबलू पुत्र चंदर सिंह, बंटी पुत्री बबलू, कपिल पुत्र दोजिंदर, रोहताश पुत्र उमराव, चंदर पुत्र घनश्याम, गजेंद्र पुत्र सूरज सिंह, धर्मानंद शास्त्री, जयदेव, वीरेंद्र सैनी, सुभाष, जिया, हरस्वरूप, कृष्णा, कुसुम, छतरे, निशा, मायावती, पुनीत, महिपाल, ओमकार, गीता, नन्हे आदि समेत सैकड़ों लोगों ने बुखार आदि रोगों से पीड़ित होने की बात कही है।