{"_id":"65970f8ca925ca4c6f09ea1a","slug":"farmers-guarding-their-fields-in-cold-nights-save-their-crops-or-their-lives-jpnagar-news-c-284-1-jpn1003-11593-2024-01-05","type":"story","status":"publish","title_hn":"Amroha News: सर्द रातों में खेतों में पहरेदारी कर रहे किसान, फसल बचाएं या जान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Amroha News: सर्द रातों में खेतों में पहरेदारी कर रहे किसान, फसल बचाएं या जान
विज्ञापन
अमरोहा। एक कहावत है कि अगर न हो किसान तो खेतों में कौन फसल उपजाएगा, फिर सोचो बिना फसल के कैसे भारत देश महान कहलाएगा। यह कहावत इन दिनों सच देखने को मिल रही है। यहां पड़ रही भीषण ठंड की परवाह किए किसान परिवारजनों के साथ खुले आसमान में फसलों की रखवाली कर रहा है। किसानाें की फसल बर्बाद कर रहे छुट्टा पशु रातों की नींद और दिन का चैन छीने हुए हैं। इनके आतंक से किसान परेशान हैं।
हालात ये हैं कि किसानों को कड़ाके की ठंड और घनघोर अंधेरी रात में खून-पसीने की कमाई को छुट्टा पशुओं से बचाने को खेत में पहरा देना पड़ रहा है। शीत लहर के प्रकोप के बीच कड़ाके की सर्दी में रातभर जागकर किसान फसलों की रखवाली करने को मजबूर है। हाथ में लाठी व टार्च लेकर खेत पर डेरा जमाए इन किसानों की रात दर्दभरी है। इन दिनों रात के समय न्यूनतम तापमान 3 डिग्री सेल्सियस के नीचे आ जा रहा है। अलाव जलाकर सर्द रातें कट रही हैं। किसान रात में फसलों की पहरेदारी करने को मजबूर हैं। वे झुंड में घुसे छुट्टा पशुओं को खेत से निकालते हैं लेकिन थोड़ी देर बाद फिर लौट आते हैं। समझ में नहीं आता कि क्या करें?। जिम्मेदार भी कोई इंतजाम नहीं करते इन छुट्टा पशुओं का। ये पीड़ा अमरोहा के किसानों की है। बुधवार की रात संवाद न्यूज एजेंसी की टीम ने गांव में पहुंचकर हकीकत को परखा। यहां गांव-गांव किसान कड़ाके की ठंड में फसलों की रखवाली करते मिले।
-- -- -- -- -- -- --
इन गांवों में रात 10 बजे के बाद पहरा देते मिले किसान
नौगांवा सादात थेत्र के गांव फाजलपुर, अहलेदादपुर, जलालपुर नारायन, धावड़ी, पंजूसराय, हादीपुर रजबपुर क्षेत्र के हाकमपुर, मंडी धनौरा क्षेत्र के दिसौरा और मिठनपुर आदि गांवों में छुट्टा पशुओं की भरमार है। इन गांवों में किसान अपनी गेहूं, आलु, सरसों और मटर आदि की फसलों को बचाने के लिए पूरी-पूरी रात जागकर खेतों में पहरा दे रहे थे। रात के दस बज रहे थे। मिठनपुर के रहने वाले ग्रामीण लाठी-डंडों से लैस होकर खेत किनारे अलाव जलाकर बैठे मिले। उन्होंने ने बताया कि छुट्टा पशुओं से फसल बचाना मुश्किल हो गया है। फाजलपुर गांव में तीन किसान सोभित, आनंद और मुकेश लाठी व टार्च के साथ मिले।
विज्ञापन
-- -- -- -- -- -- -- --
ठिठुरते हुए छुट्टा पशुओं से फसलों को बचा रहे किसान
हसनपुर/आदमपुर/ढबारसी। छुट्टा पशुओं से फसलों को बचाने के लिए किसान सर्द रातों में खेतों पर रहकर पहरा दे रहे हैं। रात 10 बजे हसनपुर के गांव गंगाचोली में किसान खेत पर फसलों की रखवाली करते मिले। इसके अलावा गांव ढबारसी में भी 11:30 बजे किसान खेतों पर फसलों की रखवाली करते मिले। उनके हाथों में टार्च एवं डंडे थे। गंगेश्वरी ब्लॉक क्षेत्र के गांव सांथलपुर में रात 12:30 बजे किसान फसलों की रखवाली करते हुए खेत पर मिले। किसानों ने बताया कि छुट्टा पशुओं के बहुत आतंक है। वह फसलों को उजाड़ रहे हैं। इसलिए यदि खेत पर नहीं रहेंगे तो पशु फसलों को उजाड़ देंगे। रात करीब एक बजे आदमपुर क्षेत्र के गांव फत्तेहपुर अधेक में किसान फसलों की रखवाली करते हुए मिले। कुछ किसान मचान पर बैठे हुए थे तो कुछ किसान चकरोड में खड़े होकर हाथ में डंडा व टाॅर्च की सहायता से फसलों की रखवाली करते मिले।
-- -- -- -- -- -- -- -- -
एक हाथ में टॉर्च दूसरे में डंडा
किसान एक हाथ में टॉर्च दूसरे में डंडा लेकर खेत में चौकन्ने रहते है। इस मौसम में 24 घंटे फसलों की रखवाली करनी पड़ रही है। हर समय खेतों पर घर का कोई न कोई सदस्य जरूर रहता है। वहीं , प्रशासन किसानों की इस समस्याओं को जानकर भी अनजान बना रहता है और रात में पहरा दे रहे इन किसानों की सुध न शासन ले रहा है न ही क्षेत्रीय प्रतिनिधि सांसद विधायक जो इन छुट्टा पशुओं से निजात दिला सके या फिर कोई इंतजाम कर सके। जिससे किसान इस सर्द मौसम में घर पर रह कर परिवार चेन की नींद ले सकें।
-- -- -- -- -- -- -- -
तारों से की बैरिकेडिंग
किसानों ने खेतों के चारों ओर लोहे के तारों से बैरिकेडिंग भी की है। मगर जब पशुओं का झुंड आता है तो वह तारों को तोड़ता हुआ खेतों में घुस जाता है। इसलिए किसानों को फसलों की रखवाली के लिए पहरेदारी करनी पड़ रही है। तारों के साथ किसानों ने इस बार लोहे का शेड भी लगा दिया है ताकि आवारा जानवर खेत में ना घुस सकें। फिर भी किसानों द्वारा की गई दीवार भी आवारा जानवरों के लिए कुछ नहीं है वह चाहे जब इन दीवारों को तोड़कर खेतों में घुस जाते हैं।
-- -- -- -- -- -- -- -- -
सरकार ने दिया था ये आदेश
रबी की फसल की बुवाई से पहले ही सरकार ने आवारा जानवरों को गोशाला में रखने की व्यवस्था करने का आदेश दिया था लेकिन ये आदेश जिम्मेदारों के कागजों तक सीमित रहा गया है। जिले में अभी भी हजारों की तादाद में जानवर घूम रहे हैं, जिसकी वजह से किसानों को मजबूरन खेतों की रखवाली करनी पड़ रही है। जिले करीब 18 गोशालाएं बनी हुईं हैं। जहां सरकार के आदेश के बाद भूसे और चारे का बंदोबस्त करना प्रशासन की जिम्मेदारी है।
-- -- -- -- -- -- -- -- -- --
ठंड से बिगड़ जाती है किसानों की तबियत
पिछले दिनों कोकापुर गांव निवासी रूपचन्द्र रात में घर से खाना खाकर खेत पर पशुओं की रखवाली करने गए थे। छुट्टा पशुओं से परेशान किसानों ने अपने खेतों पर ही मचान बना लिया है। मचान पर चारपाई डाल रखी थी। लेकिन रूपचन्द्र खेत से वापस घर नहीं पहुंचे तो उनके भतीजे जोगेन्दर व ऋषिपाल खेत पर देखने गए। आवाज देने पर रूपचन्द्र नहीं बोले। भतीजों ने मचान पर चढ़कर देखा तो रूपचन्द्र के हाथ व पैर अकड़े हुए थे, केवल उनकी सांस चल रही थी। सूचना मिलने पर परिजन और ग्रामीण मौके पर पहुंच गए। बाद में रूपचंद्र को मचान से नीचे उतारा और गंभीर अवस्था में ढबारसी के निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
-- -- -- -- -- -- -- -- --
किसानों का दर्द-
- छुट्टा पशु फसलों को बर्बाद कर रहे हैं। गेहूं, आलू की फसल में काफी नुकसान पहुंचा रहे हैं। इस ओर किसी का ध्यान नहीं है। किसान बर्बादी के कगार पर हैं। - सोमपाल सिंह, किसान
- पूरी रात खेतों की रखवाली में गुजारनी पड़ रही है। छुट्टा पशुओं को खेतों से भगाते हैं तो वे हमलावर हो जाते हैं। समस्या का कोई समाधान नहीं हो रहा है। - हरज्ञान सिंह, किसान
- सर्द रातें हैं। पशुओं के हमलों का डर है। ठिठुरन के बीच डर सताता रहता है, लेकिन क्या करें फसलों की रखवाली के लिए परेशानी झेलना मजबूरी है।- राजेंद्र सिंह, किसान
- पशुओं से फसलों को बचाया जाए। टोलियों में पशु आते हैं और फसलों को बर्बाद कर चले जाते हैं। पांच बीघा मटर की फसल में काफी बर्बाद कर दी है।- गजेंद्र, किसान
-- -- -- -- -- -- -- --
यह हैं सरकारी व्यवस्थाएं
- 18 हैं जिले में कुल गोशालाएं और आश्रय स्थल।
- 1 निजी गोशाला है।
- 3300 गोवंश हैं गोशालाओं में संरक्षित।
- 850 गोवंश दिए जा चुके हैं पशुपालकों को।
-- -- -- -- -- -- -- -- -
छुट्टा पशुओं के हमले में इनकी गई जान
-12 मार्च 2023- सांड़ की टक्कर से बाइक सवार बिजनौर निवासी युवक की नौगांवा सादात क्षेत्र में मौत हो गई थी।
-19 मार्च 2023- रजबपुर के गांव गजरौला प्रभुवन के रहने वाले रामरत्न सिंह व उनके बेटे मुनेन्द्र सिंह बाइक से जा रहे थे। उन्हें छुट्टा पशु ने टक्कर मार दी। जिसमें मुनेन्द्र की मौत हो गई थी।
-मार्च 2023- में ही सैदनगली क्षेत्र के ग्राम गलसुआ निवासी किसान असगर को सांड़ ने हमला कर मौत के घाट उतार दिया था।
-22 मार्च 2023- ढबारसी निवासी भूरे सैफी को खेत पर काम करते हुए सांड़ ने कुचल कर कर मार डाला था।
- मार्च 2023 में ही आदमपुर थानाक्षेत्र में बीजनपुर गांव निवासी नेमचंद को सांड़ ने हमला कर मार डाला था।
-07 अप्रैल 2023- रहरा थाना क्षेत्र के गांव भावली निवासी किसान रामवीर पर हमला कर सांड़ ने जान ले ली थी।
-29 मई 2023- रहरा थाना क्षेत्र के गांव नबावपुरा खादर निवासी छब्बीस वर्षीय फौजी अंकित कुमार की सांड़ के हमले में मौत हो गई थी।
- 6 जून 2023- रूखालू निवासी 11 वर्षीय कक्षा पांच के छात्र दुष्यंत पर सांड़ ने हमला कर घायल कर दिया था। उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई थी।
-10 जुलाई 2023- गांव पौरारा निवासी सत्तर वर्षीय होती सिंह पर सांड़ ने हमला कर दिया था। जिसमें उपचार के दौरान मौत हो गई।
-14 जुलाई 2023- गांव मंगरौली में सांड़ के हमले में घायल चालीस वर्षीय छत्रपाली की उपचार के दौरान मौत हो गई।
-17 जुलाई 2023- गांव नगला खादर में सांड़ के हमले में चौदह वर्षीय लोकेश की मौत हो गई।
-26 अगस्त 2023- गांव खुर्तिया निवासी होमगार्ड सतवीर की बाइक सांड़ के टकराने से मौत हो गई।
- 05 अक्टूबर 2023- को गांव आदमपुर में कुंवरपाल सैनी की बीस वर्षीय बेटी कविता की सांड़ के हमले में मौत हो गई।
-30 नबंवर 2023- को गांव आगापुर उर्फ याकूबपुर निवासी बाइक सवार पैंतालीस वर्षीय शौकत अली को संभल मार्ग पर सांड़ ने टक्कर मार दी। जिससे उनकी मौत हो गई।
-- -- -- -- -- -- -- --
छुट्टा पशुओं को पकड़ने की कवायद की जा रही है। पिछले एक महीने में 1650 पशुओं को पकड़कर गोशाला छोड़ा गया है। जिले में तीन बड़ी गोशालाओं को निर्माण चल रहा है। एक बार फिर अभियान चलाकर छुट्टा पशुओं को पकड़ा जाएगा। डॉ. खुशीराम सिंह, सीवीओ
-- --
अधिकांश स्थानाें से छुट्टा पशुओं को पकड़कर गोशाला भिजवाया जा चुका है। ग्रामीणों को खुद भी जागरूक होना पड़ेगा कि वह पशुओं को खुला न छोड़ें। यदि फिर भी पशु जंगल में घूम रहे हैं तो टीम भेजकर दिखवाया जाएगा।
राजेश कुमार त्यागी, डीएम
विज्ञापन
हालात ये हैं कि किसानों को कड़ाके की ठंड और घनघोर अंधेरी रात में खून-पसीने की कमाई को छुट्टा पशुओं से बचाने को खेत में पहरा देना पड़ रहा है। शीत लहर के प्रकोप के बीच कड़ाके की सर्दी में रातभर जागकर किसान फसलों की रखवाली करने को मजबूर है। हाथ में लाठी व टार्च लेकर खेत पर डेरा जमाए इन किसानों की रात दर्दभरी है। इन दिनों रात के समय न्यूनतम तापमान 3 डिग्री सेल्सियस के नीचे आ जा रहा है। अलाव जलाकर सर्द रातें कट रही हैं। किसान रात में फसलों की पहरेदारी करने को मजबूर हैं। वे झुंड में घुसे छुट्टा पशुओं को खेत से निकालते हैं लेकिन थोड़ी देर बाद फिर लौट आते हैं। समझ में नहीं आता कि क्या करें?। जिम्मेदार भी कोई इंतजाम नहीं करते इन छुट्टा पशुओं का। ये पीड़ा अमरोहा के किसानों की है। बुधवार की रात संवाद न्यूज एजेंसी की टीम ने गांव में पहुंचकर हकीकत को परखा। यहां गांव-गांव किसान कड़ाके की ठंड में फसलों की रखवाली करते मिले।
विज्ञापन
इन गांवों में रात 10 बजे के बाद पहरा देते मिले किसान
नौगांवा सादात थेत्र के गांव फाजलपुर, अहलेदादपुर, जलालपुर नारायन, धावड़ी, पंजूसराय, हादीपुर रजबपुर क्षेत्र के हाकमपुर, मंडी धनौरा क्षेत्र के दिसौरा और मिठनपुर आदि गांवों में छुट्टा पशुओं की भरमार है। इन गांवों में किसान अपनी गेहूं, आलु, सरसों और मटर आदि की फसलों को बचाने के लिए पूरी-पूरी रात जागकर खेतों में पहरा दे रहे थे। रात के दस बज रहे थे। मिठनपुर के रहने वाले ग्रामीण लाठी-डंडों से लैस होकर खेत किनारे अलाव जलाकर बैठे मिले। उन्होंने ने बताया कि छुट्टा पशुओं से फसल बचाना मुश्किल हो गया है। फाजलपुर गांव में तीन किसान सोभित, आनंद और मुकेश लाठी व टार्च के साथ मिले।
विज्ञापन
ठिठुरते हुए छुट्टा पशुओं से फसलों को बचा रहे किसान
हसनपुर/आदमपुर/ढबारसी। छुट्टा पशुओं से फसलों को बचाने के लिए किसान सर्द रातों में खेतों पर रहकर पहरा दे रहे हैं। रात 10 बजे हसनपुर के गांव गंगाचोली में किसान खेत पर फसलों की रखवाली करते मिले। इसके अलावा गांव ढबारसी में भी 11:30 बजे किसान खेतों पर फसलों की रखवाली करते मिले। उनके हाथों में टार्च एवं डंडे थे। गंगेश्वरी ब्लॉक क्षेत्र के गांव सांथलपुर में रात 12:30 बजे किसान फसलों की रखवाली करते हुए खेत पर मिले। किसानों ने बताया कि छुट्टा पशुओं के बहुत आतंक है। वह फसलों को उजाड़ रहे हैं। इसलिए यदि खेत पर नहीं रहेंगे तो पशु फसलों को उजाड़ देंगे। रात करीब एक बजे आदमपुर क्षेत्र के गांव फत्तेहपुर अधेक में किसान फसलों की रखवाली करते हुए मिले। कुछ किसान मचान पर बैठे हुए थे तो कुछ किसान चकरोड में खड़े होकर हाथ में डंडा व टाॅर्च की सहायता से फसलों की रखवाली करते मिले।
एक हाथ में टॉर्च दूसरे में डंडा
किसान एक हाथ में टॉर्च दूसरे में डंडा लेकर खेत में चौकन्ने रहते है। इस मौसम में 24 घंटे फसलों की रखवाली करनी पड़ रही है। हर समय खेतों पर घर का कोई न कोई सदस्य जरूर रहता है। वहीं , प्रशासन किसानों की इस समस्याओं को जानकर भी अनजान बना रहता है और रात में पहरा दे रहे इन किसानों की सुध न शासन ले रहा है न ही क्षेत्रीय प्रतिनिधि सांसद विधायक जो इन छुट्टा पशुओं से निजात दिला सके या फिर कोई इंतजाम कर सके। जिससे किसान इस सर्द मौसम में घर पर रह कर परिवार चेन की नींद ले सकें।
तारों से की बैरिकेडिंग
किसानों ने खेतों के चारों ओर लोहे के तारों से बैरिकेडिंग भी की है। मगर जब पशुओं का झुंड आता है तो वह तारों को तोड़ता हुआ खेतों में घुस जाता है। इसलिए किसानों को फसलों की रखवाली के लिए पहरेदारी करनी पड़ रही है। तारों के साथ किसानों ने इस बार लोहे का शेड भी लगा दिया है ताकि आवारा जानवर खेत में ना घुस सकें। फिर भी किसानों द्वारा की गई दीवार भी आवारा जानवरों के लिए कुछ नहीं है वह चाहे जब इन दीवारों को तोड़कर खेतों में घुस जाते हैं।
सरकार ने दिया था ये आदेश
रबी की फसल की बुवाई से पहले ही सरकार ने आवारा जानवरों को गोशाला में रखने की व्यवस्था करने का आदेश दिया था लेकिन ये आदेश जिम्मेदारों के कागजों तक सीमित रहा गया है। जिले में अभी भी हजारों की तादाद में जानवर घूम रहे हैं, जिसकी वजह से किसानों को मजबूरन खेतों की रखवाली करनी पड़ रही है। जिले करीब 18 गोशालाएं बनी हुईं हैं। जहां सरकार के आदेश के बाद भूसे और चारे का बंदोबस्त करना प्रशासन की जिम्मेदारी है।
ठंड से बिगड़ जाती है किसानों की तबियत
पिछले दिनों कोकापुर गांव निवासी रूपचन्द्र रात में घर से खाना खाकर खेत पर पशुओं की रखवाली करने गए थे। छुट्टा पशुओं से परेशान किसानों ने अपने खेतों पर ही मचान बना लिया है। मचान पर चारपाई डाल रखी थी। लेकिन रूपचन्द्र खेत से वापस घर नहीं पहुंचे तो उनके भतीजे जोगेन्दर व ऋषिपाल खेत पर देखने गए। आवाज देने पर रूपचन्द्र नहीं बोले। भतीजों ने मचान पर चढ़कर देखा तो रूपचन्द्र के हाथ व पैर अकड़े हुए थे, केवल उनकी सांस चल रही थी। सूचना मिलने पर परिजन और ग्रामीण मौके पर पहुंच गए। बाद में रूपचंद्र को मचान से नीचे उतारा और गंभीर अवस्था में ढबारसी के निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
किसानों का दर्द-
- छुट्टा पशु फसलों को बर्बाद कर रहे हैं। गेहूं, आलू की फसल में काफी नुकसान पहुंचा रहे हैं। इस ओर किसी का ध्यान नहीं है। किसान बर्बादी के कगार पर हैं। - सोमपाल सिंह, किसान
- पूरी रात खेतों की रखवाली में गुजारनी पड़ रही है। छुट्टा पशुओं को खेतों से भगाते हैं तो वे हमलावर हो जाते हैं। समस्या का कोई समाधान नहीं हो रहा है। - हरज्ञान सिंह, किसान
- सर्द रातें हैं। पशुओं के हमलों का डर है। ठिठुरन के बीच डर सताता रहता है, लेकिन क्या करें फसलों की रखवाली के लिए परेशानी झेलना मजबूरी है।- राजेंद्र सिंह, किसान
- पशुओं से फसलों को बचाया जाए। टोलियों में पशु आते हैं और फसलों को बर्बाद कर चले जाते हैं। पांच बीघा मटर की फसल में काफी बर्बाद कर दी है।- गजेंद्र, किसान
यह हैं सरकारी व्यवस्थाएं
- 18 हैं जिले में कुल गोशालाएं और आश्रय स्थल।
- 1 निजी गोशाला है।
- 3300 गोवंश हैं गोशालाओं में संरक्षित।
- 850 गोवंश दिए जा चुके हैं पशुपालकों को।
छुट्टा पशुओं के हमले में इनकी गई जान
-12 मार्च 2023- सांड़ की टक्कर से बाइक सवार बिजनौर निवासी युवक की नौगांवा सादात क्षेत्र में मौत हो गई थी।
-19 मार्च 2023- रजबपुर के गांव गजरौला प्रभुवन के रहने वाले रामरत्न सिंह व उनके बेटे मुनेन्द्र सिंह बाइक से जा रहे थे। उन्हें छुट्टा पशु ने टक्कर मार दी। जिसमें मुनेन्द्र की मौत हो गई थी।
-मार्च 2023- में ही सैदनगली क्षेत्र के ग्राम गलसुआ निवासी किसान असगर को सांड़ ने हमला कर मौत के घाट उतार दिया था।
-22 मार्च 2023- ढबारसी निवासी भूरे सैफी को खेत पर काम करते हुए सांड़ ने कुचल कर कर मार डाला था।
- मार्च 2023 में ही आदमपुर थानाक्षेत्र में बीजनपुर गांव निवासी नेमचंद को सांड़ ने हमला कर मार डाला था।
-07 अप्रैल 2023- रहरा थाना क्षेत्र के गांव भावली निवासी किसान रामवीर पर हमला कर सांड़ ने जान ले ली थी।
-29 मई 2023- रहरा थाना क्षेत्र के गांव नबावपुरा खादर निवासी छब्बीस वर्षीय फौजी अंकित कुमार की सांड़ के हमले में मौत हो गई थी।
- 6 जून 2023- रूखालू निवासी 11 वर्षीय कक्षा पांच के छात्र दुष्यंत पर सांड़ ने हमला कर घायल कर दिया था। उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई थी।
-10 जुलाई 2023- गांव पौरारा निवासी सत्तर वर्षीय होती सिंह पर सांड़ ने हमला कर दिया था। जिसमें उपचार के दौरान मौत हो गई।
-14 जुलाई 2023- गांव मंगरौली में सांड़ के हमले में घायल चालीस वर्षीय छत्रपाली की उपचार के दौरान मौत हो गई।
-17 जुलाई 2023- गांव नगला खादर में सांड़ के हमले में चौदह वर्षीय लोकेश की मौत हो गई।
-26 अगस्त 2023- गांव खुर्तिया निवासी होमगार्ड सतवीर की बाइक सांड़ के टकराने से मौत हो गई।
- 05 अक्टूबर 2023- को गांव आदमपुर में कुंवरपाल सैनी की बीस वर्षीय बेटी कविता की सांड़ के हमले में मौत हो गई।
-30 नबंवर 2023- को गांव आगापुर उर्फ याकूबपुर निवासी बाइक सवार पैंतालीस वर्षीय शौकत अली को संभल मार्ग पर सांड़ ने टक्कर मार दी। जिससे उनकी मौत हो गई।
छुट्टा पशुओं को पकड़ने की कवायद की जा रही है। पिछले एक महीने में 1650 पशुओं को पकड़कर गोशाला छोड़ा गया है। जिले में तीन बड़ी गोशालाओं को निर्माण चल रहा है। एक बार फिर अभियान चलाकर छुट्टा पशुओं को पकड़ा जाएगा। डॉ. खुशीराम सिंह, सीवीओ
अधिकांश स्थानाें से छुट्टा पशुओं को पकड़कर गोशाला भिजवाया जा चुका है। ग्रामीणों को खुद भी जागरूक होना पड़ेगा कि वह पशुओं को खुला न छोड़ें। यदि फिर भी पशु जंगल में घूम रहे हैं तो टीम भेजकर दिखवाया जाएगा।
राजेश कुमार त्यागी, डीएम