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हाईवे पर किसानों का पैदल मार्च, जाम, हंगामा
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रजबपुर(अमरोहा)। समस्याओं को लेकर किसानों ने हाईवे पर अतरासी चौराहे से पैदल मार्च किया। इससे हाईवे पर जाम लग गया। डीएम ने फोन पर समझाया तो किसान टोल प्लाजा से अतरासी वापस हो गए। आक्रोशित किसानों ने सरकार और जिला प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। किसानों ने मुख्यमंत्री को संबोधित चार सूत्री ज्ञापन एसडीएम सदर को सौंपा। हाईवे पर जाम के दौरान जमकर हंगामा हुआ। दिल्ली और मुरादाबाद की दिशा वाले वाहनों की लंबी लाइन लग गई। राहगीरों को दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
रविवार को भारतीय किसान यूनियन भानु का विरोध प्रदर्शन प्रस्तावित था। राष्ट्रीय उपाध्यक्ष चौधरी दिवाकर सिंह के नेतृत्व में किसान अतरासी तिराहे पर एकत्र हुए। जहां किसान समस्याओं पर चर्चा की गई। पराली जलाने के आरोप में किसानों पर दर्ज हुई मुकदमों का मुद्दा छाया रहा। वक्ताओं ने कहा कि सैकड़ों वर्षों से गन्ना कटाई के बाद गन्ने की पत्ती को जलाकर खेत साफ किया जाता रहा है। इससे बहुत सारे हानिकारक कीट मर जाते हैं। भाजपा सरकार पत्ती जलाने पर किसानों पर रिपोर्ट दर्ज करा रही है। प्रदेश में कारखाने, निरंतर बढ़ते वाहन, एयर कंडीशनर आदि से निर्गत हानिकारक गैसों, विभिन्न त्योहारों पर की जाने वाली आतिशबाजी जानलेवा बन रही है। पराली जलाने पर प्रदूषण नहीं होता। धान की पराली उत्तर प्रदेश में जलाई नहीं जाती। सरकार किसानों का उत्पीड़न कर रही है। निर्देशों के बाद भी 14 दिन के भीतर गन्ना मूल्य का भुगतान नहीं हो रहा। सरकार 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने की बात करती है, लेकिन तीन साल से गन्ने मूल्य में कोई वृद्धि नहीं की गई। सभी रासायन उर्वरक और दैनिक उपयोग की वस्तुएं 20 प्रतिशत महंगी हो गई हैं। इसलिए महंगाई को देखते हुए किसानों का गन्ना मूल्य 10 प्रतिशत बढ़ा अति आवश्यक था। एक साल बीतने के बाद 65 प्रतिशत किसान सम्मान निधि पाने के लिए जनसेवा केंद्रों के चक्कर काट रहे हैं। 28 नवंबर और 12 दिसंबर को जनपद में आंधी-बारिश और ओलावृष्टि की प्राकृतिक आपदा से किसानों की गेहूं ,सरसों, गोभी, आलू, टमाटर, मिर्ची आदि फसलें बर्बाद हो गई है। जिसका तत्काल आकलन कर किसानों को उचित मुआवजा दिया जाए। वहीं, पंचायत में समस्याओं से संबंधित अधिकारियों के नहीं पहुंचने पर किसानों का गुस्सा भड़क गया। आक्रोशित किसान हाईवे पर पहुंच गए और जाम लगाकर नारेबाजी शुरू कर दी। इसके बाद किसान हाईवे पर पैदल मार्च करते हुए जोया टोल प्लाजा की ओर बढ़ने लगे। यह देखकर जिला प्रशासन में हड़कंप मच गया। डीएम उमेश मिश्रा के निर्देश पर तत्काल सदर एसडीएम सुखवीर सिंह को मौके पर पहुंचे। एसडीएम सुखवीर सिंह और इंस्पेक्टर सतेंद्र सिंह ने किसी तरह आक्रोशित किसानों समझा-बुझाकर कर शांत किया। करीब एक किलोमीटर चलने के बाद किसान वापस लौट गए। इस दौरान चौधरी धर्मवीर सिंह, चौधरी देवेंद्र सिंह, गुरविंदर कौर, राजबाला, सतवीर सिंह, योगेंद्र सिंह, नरेंद्र सिंह, वीरेंद्र सिंह, गुरजीत सिंह, समर पाल सिंह, हरपाल सिंह, देवेंद्र सैनी आदि मौजूद रहे।
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रविवार को भारतीय किसान यूनियन भानु का विरोध प्रदर्शन प्रस्तावित था। राष्ट्रीय उपाध्यक्ष चौधरी दिवाकर सिंह के नेतृत्व में किसान अतरासी तिराहे पर एकत्र हुए। जहां किसान समस्याओं पर चर्चा की गई। पराली जलाने के आरोप में किसानों पर दर्ज हुई मुकदमों का मुद्दा छाया रहा। वक्ताओं ने कहा कि सैकड़ों वर्षों से गन्ना कटाई के बाद गन्ने की पत्ती को जलाकर खेत साफ किया जाता रहा है। इससे बहुत सारे हानिकारक कीट मर जाते हैं। भाजपा सरकार पत्ती जलाने पर किसानों पर रिपोर्ट दर्ज करा रही है। प्रदेश में कारखाने, निरंतर बढ़ते वाहन, एयर कंडीशनर आदि से निर्गत हानिकारक गैसों, विभिन्न त्योहारों पर की जाने वाली आतिशबाजी जानलेवा बन रही है। पराली जलाने पर प्रदूषण नहीं होता। धान की पराली उत्तर प्रदेश में जलाई नहीं जाती। सरकार किसानों का उत्पीड़न कर रही है। निर्देशों के बाद भी 14 दिन के भीतर गन्ना मूल्य का भुगतान नहीं हो रहा। सरकार 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने की बात करती है, लेकिन तीन साल से गन्ने मूल्य में कोई वृद्धि नहीं की गई। सभी रासायन उर्वरक और दैनिक उपयोग की वस्तुएं 20 प्रतिशत महंगी हो गई हैं। इसलिए महंगाई को देखते हुए किसानों का गन्ना मूल्य 10 प्रतिशत बढ़ा अति आवश्यक था। एक साल बीतने के बाद 65 प्रतिशत किसान सम्मान निधि पाने के लिए जनसेवा केंद्रों के चक्कर काट रहे हैं। 28 नवंबर और 12 दिसंबर को जनपद में आंधी-बारिश और ओलावृष्टि की प्राकृतिक आपदा से किसानों की गेहूं ,सरसों, गोभी, आलू, टमाटर, मिर्ची आदि फसलें बर्बाद हो गई है। जिसका तत्काल आकलन कर किसानों को उचित मुआवजा दिया जाए। वहीं, पंचायत में समस्याओं से संबंधित अधिकारियों के नहीं पहुंचने पर किसानों का गुस्सा भड़क गया। आक्रोशित किसान हाईवे पर पहुंच गए और जाम लगाकर नारेबाजी शुरू कर दी। इसके बाद किसान हाईवे पर पैदल मार्च करते हुए जोया टोल प्लाजा की ओर बढ़ने लगे। यह देखकर जिला प्रशासन में हड़कंप मच गया। डीएम उमेश मिश्रा के निर्देश पर तत्काल सदर एसडीएम सुखवीर सिंह को मौके पर पहुंचे। एसडीएम सुखवीर सिंह और इंस्पेक्टर सतेंद्र सिंह ने किसी तरह आक्रोशित किसानों समझा-बुझाकर कर शांत किया। करीब एक किलोमीटर चलने के बाद किसान वापस लौट गए। इस दौरान चौधरी धर्मवीर सिंह, चौधरी देवेंद्र सिंह, गुरविंदर कौर, राजबाला, सतवीर सिंह, योगेंद्र सिंह, नरेंद्र सिंह, वीरेंद्र सिंह, गुरजीत सिंह, समर पाल सिंह, हरपाल सिंह, देवेंद्र सैनी आदि मौजूद रहे।
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