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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Amroha News ›   Farhan, arrested from Noida, has in-laws' house in Rajabpur, house and land too.

Amroha News: नोएडा से गिरफ्तार फरहान की ससुराल रजबपुर में, मकान और जमीन भी

Moradabad  Bureau मुरादाबाद ब्यूरो
Updated Sat, 13 Dec 2025 02:49 AM IST
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Farhan, arrested from Noida, has in-laws' house in Rajabpur, house and land too.
अमरोहा। करीब एक महीने पहले नोएडा से एटीएस द्वारा गिरफ्तार किए गए फरहान नबी सिद्दीकी की ससुराल रजबपुर में है। इतना ही नहीं उसने यहां पर करीब तीन सौ गज में मकान बनाया और जमीन भी खरीदी है। इस मकान में एक युवती करीब 15 से 20 बच्चों को ट्यूशन पढ़ाती है।
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स्थानीय खुफिया विभाग की टीमों ने रजबपुर पहुंचकर फरहान की मकान और जमीन से जुड़ा ब्योरा जुटाया है। फरहान की गिरफ्तारी के बाद एटीएस का इनपुट मिलते ही स्थानीय खुफिया विभाग की टीम सतर्क हो गई थी। फरहान पर विदेशी फंडिंग जुटाकर पंजाब और अमरोहा में मदरसा व मस्जिद बनाने के लिए जमीन खरीदने का आरोप है। शुरुआती जांच में फरहान के जिस मकान में युवती बच्चों को पढ़ाती है उसे मदरसा समझा जा रहा था। लेकिन ऐसा नहीं है। पढ़ने वाले बच्चों में मुस्लिम ही नहीं हिंदू भी हैं।
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धार्मिक पुस्तकों को छापने के नाम पर करोड़ों रुपयों की विदेशी फंडिंग लेने के आरोप में एटीएस ने सात नवंबर की रात नोएडा से दिल्ली के निजामुद्दीन इलाके के रहने वाले फरहान नबी सिद्दीकी की गिरफ्तारी की थी। फरहान ने अपने कुबूलनामे में कई चौंकाने वाले खुलासे किए। एटीएस के मुताबिक फरहान ने पंजाब के अलावा अमरोहा जिले में भी अपनी कंपनियों के साथ ही मस्जिदों और मदरसों के नाम से भी कईं जमीनें खरीदी हैं। एटीएस अब फरहान को रिमांड पर लेकर वेस्ट यूपी खासकर अमरोहा में उसके पूरे नेटवर्क को ट्रेस करने की तैयारी कर रही है। इन जमीनों की खरीद-फरोख्त में अमरोहा के भी कई लोग फरहान के संपर्क में होने का खुलासा हुआ है। एटीएस से मिले इनपुट पर स्थानीय खुफिया विभाग की टीमें अलर्ट मोड पर आ गई थीं।
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यह है पूरा मामला
एटीएस ने नोएडा से आरोपी फरहान नबी को गिरफ्तार किया। वह मूलरूप से दिल्ली के निजामुद्दीन इलाके का रहने वाला है। उस पर आरोप है कि विदेशी फंडिंग जुटाकर यूपी और पंजाब में मदरसा व मस्जिदों के अलावा अपनी कंपनियों के नाम से जमीनें खरीदने की बात सामने आई थी। फरहान पर तुर्की, जर्मनी और बांग्लादेश से अवैध तरीके से आए लोगों को देश में शरण देने का आरोप था। धार्मिक पुस्तकों को छापने के नाम पर उसे करोड़ों रुपये की विदेशी फंडिंग मिलती थी। एटीएस ने दावा कि था कि पूछताछ के दौरान फरहान ने कबूल किया कि इन पुस्तकों के जरिए दो धर्मों के बीच शत्रुता व वैमनस्यता फैलाने का काम करता था। इसके लिए उसे विदेशों से हवाला व अन्य माध्यम से 11 करोड़ रुपये कुछ दिन पहले ही मिले थे।

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इन कंपनियों के नाम पर करोड़ों रुपये आने का दावा
एटीएस के मुताबिक फरहान नबी, नासी तोर्बा और कुछ अन्य साथियों ने इंस्तांबुल इंटरनेशनल लिमिटेड., हकीकत वक्फी फाउंडेशन, रियल ग्लोबल एक्सप्रेस लॉजिस्टिक लिमिटेड. नाम से ग्रेटर नोएडा में कंपनियां खोली। इन सभी फरहान खुद सह निदेशक था। फरहान विदेशों से आए लोगों को इन्ही कंपनी का कर्मचारी बताकर अलग-अलग स्थान पर रुकवाता था। एटीएस को यह भी पता चला कि अवैध रूप से भारत में दर्जनों बांग्लादेशियों को भी फरहान ने शरण दी। उसके कब्जे से दो मोबाइल, तीन लैपटॉप, हिन्दी,उर्दू, अरबी, बांग्ला भाषा में छपी 12 किताबें बरामद हुई थीं।
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