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Amroha News: हर बार चला कागजी अभियान, जिम्मेदारों की लापरवाही ने ले ली दो की जान
Sat, 19 Jul 2025 01:50 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अमरोहा
संवाद न्यूज एजेंसी, अमरोहा
Updated Sat, 19 Jul 2025 01:50 AM IST
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अमरोहा। हर बार की तरह इस बार भी कागजी अभियान चलाकर खानापूर्ति करने वाले जिम्मेदारों की लापरवाही ने दो और जान ले लीं। सरकारी रिकॉर्ड में 71 अनफिट स्कूली वाहनों से बच्चों को ढोया जा रहा है जबकि सैकड़ों ऐसे हैं जो रिकॉर्ड में ही नहीं है। शहर से लेकर गांव तक ऐसे वाहनों की भरमार है।
स्कूली बच्चों के साथ होने वाले हादसों को लेकर जिम्मेदार गंभीर नहीं है। अनफिट और अवैध रूप से संचालित स्कूली वाहनों पर कार्रवाई के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति जा रही है। शुक्रवार को हसनपुर क्षेत्र में हुआ हादसा भी इसी लापरवाही का नतीजा है। अगर अनफिट और निजी वाहनों को कॉमर्शियल में इस्तेमाल करने वाले स्कूल प्रबंधन पर कड़ी कार्रवाई की जाए तो इस तरह के हादसों पर अंकुश लग सकता है।
निजी स्कूल संचालकों ने छात्रों की संख्या बढ़ाने के लिए ट्रांसपोर्ट की व्यवस्था तो कर ली है, लेकिन उनकी फिटनेस कराने के लिए तैयार नहीं हैं। जिले के कुछ स्कूलों को छोड़कर बाकी स्कूलों के वाहनों की गुणवत्ता पर कोई ध्यान नहीं दे रहे हैं। अमूमन हर मार्ग पर ऐसे खतरनाक वाहन फर्राटा भर रहे हैं। मैक्स, मारूति वैन और टाटा मैजिक, ई रिक्शा सहित तमाम वाहनों में स्कूली बच्चों को ढोने का काम कर रहे हैं। इनमें से अधिकांश की हालत खस्ता है जबकि कई वाहनों में तो नियम विरुद्ध गैस किट भी लगी हैं और इनमें सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं है। साथ ही फर्स्ट एड बॉक्स भी नहीं है।
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ग्रीष्मावकाश के बाद एक जुलाई से जिले के सभी सरकारी और निजी स्कूल व कॉलेजों में शिक्षण कार्य शुरू हो गया है। शासन की ओर से एक से 15 जुलाई तक अनफिट वाहनों के खिलाफ अभियान चलाकर कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे। अभियान भी चलाया गया लेकिन कार्रवाई के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति ही हुई। परिवहन विभाग के रिकॉर्ड में जिले करीब 692 स्कूल वाहन पंजीकृत हैं लेकिन सड़कों पर इससे कहीं ज्यादा स्कूली वाहन दौड़ रहे हैं। कुल 692 स्कूल वाहनों में से 71 की फिटनेस भी नहीं हो सकी है जबकि इन स्कूली वाहनों से बच्चों को ढोया जा रहा है। ग्रामीण इलाकों के स्कूलों की स्थिति ज्यादा खराब है। यहां अधिकांश स्कूलों में लगे वाहन न तो एआरटीओ कार्यालय के रिकार्ड में दर्ज हैं और न स्कूली वाहनों के मानकों को पूरा करते हैं। शुक्रवार को भी अनफिट और स्कूलों में लगे अवैध वाहनों को भी बच्चों को जाते-ले जाते देखा गया।
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स्कूली बच्चों के साथ होने वाले हादसों को लेकर जिम्मेदार गंभीर नहीं है। अनफिट और अवैध रूप से संचालित स्कूली वाहनों पर कार्रवाई के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति जा रही है। शुक्रवार को हसनपुर क्षेत्र में हुआ हादसा भी इसी लापरवाही का नतीजा है। अगर अनफिट और निजी वाहनों को कॉमर्शियल में इस्तेमाल करने वाले स्कूल प्रबंधन पर कड़ी कार्रवाई की जाए तो इस तरह के हादसों पर अंकुश लग सकता है।
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निजी स्कूल संचालकों ने छात्रों की संख्या बढ़ाने के लिए ट्रांसपोर्ट की व्यवस्था तो कर ली है, लेकिन उनकी फिटनेस कराने के लिए तैयार नहीं हैं। जिले के कुछ स्कूलों को छोड़कर बाकी स्कूलों के वाहनों की गुणवत्ता पर कोई ध्यान नहीं दे रहे हैं। अमूमन हर मार्ग पर ऐसे खतरनाक वाहन फर्राटा भर रहे हैं। मैक्स, मारूति वैन और टाटा मैजिक, ई रिक्शा सहित तमाम वाहनों में स्कूली बच्चों को ढोने का काम कर रहे हैं। इनमें से अधिकांश की हालत खस्ता है जबकि कई वाहनों में तो नियम विरुद्ध गैस किट भी लगी हैं और इनमें सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं है। साथ ही फर्स्ट एड बॉक्स भी नहीं है।
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ग्रीष्मावकाश के बाद एक जुलाई से जिले के सभी सरकारी और निजी स्कूल व कॉलेजों में शिक्षण कार्य शुरू हो गया है। शासन की ओर से एक से 15 जुलाई तक अनफिट वाहनों के खिलाफ अभियान चलाकर कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे। अभियान भी चलाया गया लेकिन कार्रवाई के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति ही हुई। परिवहन विभाग के रिकॉर्ड में जिले करीब 692 स्कूल वाहन पंजीकृत हैं लेकिन सड़कों पर इससे कहीं ज्यादा स्कूली वाहन दौड़ रहे हैं। कुल 692 स्कूल वाहनों में से 71 की फिटनेस भी नहीं हो सकी है जबकि इन स्कूली वाहनों से बच्चों को ढोया जा रहा है। ग्रामीण इलाकों के स्कूलों की स्थिति ज्यादा खराब है। यहां अधिकांश स्कूलों में लगे वाहन न तो एआरटीओ कार्यालय के रिकार्ड में दर्ज हैं और न स्कूली वाहनों के मानकों को पूरा करते हैं। शुक्रवार को भी अनफिट और स्कूलों में लगे अवैध वाहनों को भी बच्चों को जाते-ले जाते देखा गया।