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सरकारी तेल निजी कार्य में इस्तेमाल करने की जांच करेंगे एडीएम, खलबली
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अमरोहा। सीएमओ कार्यालय में सरकारी तेल का इस्तेमाल निजी कार्यों करने का खुलासा होने के बाद प्रशासन में हड़कंप मचा है। हरकत में आए डीएम ने गड़बड़ी की जांच एडीएम को सौंपी है। वर्ष 2020 में प्रयागराज शव भेजने के नाम पर 130 लीटर तेल का गबन किया था।
अतरासी रोड स्थित मंगूपुरा के रहने वाले संजय कुमार सीएमओ कार्यालय में शव वाहन/एंबुलेंस चालक के पद पर कार्यरत है। उन्होंने डीएम बीके त्रिपाठी को शिकायती पत्र देकर आरोप लगाया था कि 18 नवंबर 2020 को नोडल अधिकारी डॉ सुरेंद्र कुमार ने जबरदस्ती उसके शव वाहन को लॉग बुक में प्रयागराज शव भेजना दिखा कर 130 लीटर डीजल का गबन कर लिया। जबकि इस डीजल का उपयोग उन्होंने अपने निजी कार्य में इस्तेमाल किया था। नोडल अधिकारी खुद अपने निजी वाहन से प्रयागराज गए थे। उसने इसका विरोध किया तो नोडल अधिकारी रंजिश रखने लगे। आरोप है कि नोडल अधिकारी करीब एक सप्ताह पहले उसकी निजी कार को लेकर गजरौला गए थे। जहां उन्होंने एआरटीओ को बुलाकर रंजिशन कार को सीज करा दिया। जबकि उसकी कार न तो टैक्सी में चल रही है और न सीएमओ कार्यालय में अनुबंधित है। अमर उजाला ने खबर को प्रमुखता से प्रकाशित किया था। जिसके बाद डीएम बीके त्रिपाठी संज्ञान लिया। उन्होंने पूरे मामले की जांच एडीएम भगवान शरण को सौंप दी है। साथ ही जांच रिपोर्ट सात दिन के भीतर तलब की है। डीएम के तेवर देकर स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी-कर्मचारियों के बीच खलबली मची हुई है।
शिकायत के अधार पर मामले की जांच कराई जा रही है। जांच एडीएम को सौंपी गई है। उनकी जांच रिपोर्ट आने के बाद दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई कराई जाएगी।- बीके त्रिपाठी, डीएम
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अतरासी रोड स्थित मंगूपुरा के रहने वाले संजय कुमार सीएमओ कार्यालय में शव वाहन/एंबुलेंस चालक के पद पर कार्यरत है। उन्होंने डीएम बीके त्रिपाठी को शिकायती पत्र देकर आरोप लगाया था कि 18 नवंबर 2020 को नोडल अधिकारी डॉ सुरेंद्र कुमार ने जबरदस्ती उसके शव वाहन को लॉग बुक में प्रयागराज शव भेजना दिखा कर 130 लीटर डीजल का गबन कर लिया। जबकि इस डीजल का उपयोग उन्होंने अपने निजी कार्य में इस्तेमाल किया था। नोडल अधिकारी खुद अपने निजी वाहन से प्रयागराज गए थे। उसने इसका विरोध किया तो नोडल अधिकारी रंजिश रखने लगे। आरोप है कि नोडल अधिकारी करीब एक सप्ताह पहले उसकी निजी कार को लेकर गजरौला गए थे। जहां उन्होंने एआरटीओ को बुलाकर रंजिशन कार को सीज करा दिया। जबकि उसकी कार न तो टैक्सी में चल रही है और न सीएमओ कार्यालय में अनुबंधित है। अमर उजाला ने खबर को प्रमुखता से प्रकाशित किया था। जिसके बाद डीएम बीके त्रिपाठी संज्ञान लिया। उन्होंने पूरे मामले की जांच एडीएम भगवान शरण को सौंप दी है। साथ ही जांच रिपोर्ट सात दिन के भीतर तलब की है। डीएम के तेवर देकर स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी-कर्मचारियों के बीच खलबली मची हुई है।
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शिकायत के अधार पर मामले की जांच कराई जा रही है। जांच एडीएम को सौंपी गई है। उनकी जांच रिपोर्ट आने के बाद दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई कराई जाएगी।- बीके त्रिपाठी, डीएम
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