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मकान तो बना लिए, कच्चे रास्ते से होकर आ जा रहे लोग
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अमरोहा। शहर के अफगानान के बाहरी इलाके में रहने वाले लोगों का जीवन दुश्वार हो गया है। यहां मकान तो पक्के बन गए हैं, लेकिन रास्ते अभी भी कच्चे हैं। आलम ये है कि स्कूली बच्चों को कीचड़ युक्त कच्चे रास्ते से गुजरना पड़ रहा हैं। जिससे उनके कपड़े खराब हो जाते हैं। कई बार सड़क निर्माण की मांग की गई है, लेकिन नगर पालिका में सुनवाई नहीं हुई है। इसके चलते यह इलाका विकास की किरण से दूर प्रतीत हो रहा है।
नगर पालिका परिषद का सीमा विस्तार 1965 में हुआ इस दौरान चारों तरफ कई इलाके शामिल किए गए। इसके चलते चौहद्दी बढ़ गई। इसके बाद वर्ष 1971 में भी सीमा विस्तार हुई हालांकि इस वक्त केवल जोया रोड में रेलवे क्रॉसिंग से शुगर मिल की बाउंड्रीवाल तक हुई। इससे सड़क के दोनों तरफ की पटरियों के कुछ हिस्से शहर में शामिल हो गए।
हालांकि वर्ष 1965 में शहरी सीमा में शामिल हो चुके कई इलाके मूलभूत नागरिक सुविधा को तरस रहे हैं। शहर के कांठ रोड से अफगानान मोहल्ले में मकबरा से होकर जाने वाले रास्ते कच्चे हैं। यहां से रोजाना सैकड़ों बच्चें स्कूल आते जाते हैं। आस पास में कई लोगों ने अपने मकान बनवा लिए हैं, लेकिन अब तक पक्की सड़क नहीं बन सकी है। रास्ता नहीं होने से लोगों को सूर्यास्त के बाद घर से निकलने में गुरेज करते हैं। हालांकि बिजली के ख्ंाभों से आपूर्ति हो रही है, लेकिन पक्की सड़क का इंतजार है।
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नगर पालिका परिषद का सीमा विस्तार 1965 में हुआ इस दौरान चारों तरफ कई इलाके शामिल किए गए। इसके चलते चौहद्दी बढ़ गई। इसके बाद वर्ष 1971 में भी सीमा विस्तार हुई हालांकि इस वक्त केवल जोया रोड में रेलवे क्रॉसिंग से शुगर मिल की बाउंड्रीवाल तक हुई। इससे सड़क के दोनों तरफ की पटरियों के कुछ हिस्से शहर में शामिल हो गए।
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हालांकि वर्ष 1965 में शहरी सीमा में शामिल हो चुके कई इलाके मूलभूत नागरिक सुविधा को तरस रहे हैं। शहर के कांठ रोड से अफगानान मोहल्ले में मकबरा से होकर जाने वाले रास्ते कच्चे हैं। यहां से रोजाना सैकड़ों बच्चें स्कूल आते जाते हैं। आस पास में कई लोगों ने अपने मकान बनवा लिए हैं, लेकिन अब तक पक्की सड़क नहीं बन सकी है। रास्ता नहीं होने से लोगों को सूर्यास्त के बाद घर से निकलने में गुरेज करते हैं। हालांकि बिजली के ख्ंाभों से आपूर्ति हो रही है, लेकिन पक्की सड़क का इंतजार है।
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