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Amroha News: गलत यूनिट दर्शाकर जारी किया 70 हजार का बिजली बिल निरस्त

Moradabad  Bureau मुरादाबाद ब्यूरो
Updated Tue, 09 Dec 2025 02:29 AM IST
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Electricity bill of Rs 70,000 issued by showing wrong units cancelled
अमरोहा। गलत यूनिट दिखाकर बिजली विभाग ने उपभोक्ता को 70 हजार रुपये से ज्यादा का बिजली का बिल जारी कर दिया जबकि उपभोक्ता हर महीने बिजली का बिल जमा कर रहा था। उपभोक्ता फोरम ने इस बिल को निरस्त कर दिया है।
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हसनपुर के मोहल्ला कायस्थान सुफियान मस्जिद के पास मोहम्मद अकरम का परिवार रहता है। उनके घर पर विद्युत कनेक्शन है जिसका वह हर माह बिल जमा करते हैं। नौ अक्तूबर 2019 को बिजली विभाग ने 3402 का बिल जारी किया था जिसे उन्होंने जमा कर दिया था लेकिन बिजली विभाग ने आईडीएफ जारी कर दिया। यह बात बिजली विभाग के अफसरों ने नहीं बताई लिहाजा मोहम्मद अकरम पहले की तरह रीडिंग के अनुसार बिल जमा करते रहे।
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31 दिसंबर 2020 को बिजली विभाग ने 3504 का बिल जारी किया जिसे मोहम्मद अकरम ने रीडिंग के अनुसार मानते हुए जमा कर दिया लेकिन नौ फरवरी 2021 को बिजली विभाग ने 70,364 रुपये का बिजली का बिल जारी किया। इसमें 65,964 रुपये बकाया दिखाया गया। मोहम्मद अकरम ने मामले की शिकायत बिजली अफसरों से की लेकिन सुनवाई नहीं हुई। तीन जून 2021 को बिजली विभाग के अफसरों ने नोटिस जारी कर दिया और बिल को संशोधित करने का अनुरोध किया था।
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पीड़ित दफ्तरों के चक्कर काटता रहा पर सुनवाई नहीं हुई
बावजूद इसके मोहम्मद अकरम बिजली विभाग के दफ्तरों के चक्कर काटते रहे और कोई सुनवाई नहीं हुई। बिजली विभाग के कारनामे से मानसिक और आर्थिक रूप से परेशान मोहम्मद अकरम ने जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग की शरण ली। आयोग के अध्यक्ष रमाशंकर सिंह और महिला सदस्य अंजू रानी दीक्षित ने बिजली विभाग के अधिकारियों को तलब कर लिया। बिजली विभाग के अधिकारियों ने तर्क दिया कि मीटर धीमी गति से चल रहा था, इसलिए अतिरिक्त बिल जारी किया गया है।

दोनों पक्षों को सुनने के बाद फोरम ने बिजली विभाग को गलत बिल जारी करने का दोषी पाया। साथ ही स्पष्ट कहा कि मीटर धीमा चलने के लिए उपभोक्ता कैसे दोषी था, क्योंकि मीटर के इंस्टॉलेशन और डिफेक्टिव इंस्टॉलेशन के लिए तब तक विद्युत विभाग ही जिम्मेदार है जब तक मीटर से कोई छेड़खानी उपभोक्ता द्वारा नहीं की गई। इसलिए उपभोक्ता द्वारा मीटर से छेड़खानी नहीं की गई। इसलिए उन्हें उत्तरदाई नहीं ठहराया जा सकता। इसलिए बिजली विभाग के द्वारा उपभोक्ता को जिम्मेदार ठहराते हुए अतिरिक्त बल जारी करना तर्कसंगत नहीं है। लिहाजा, उपभोक्ता फोरम ने बिजली विभाग की ओर से जारी 70,364 रुपये के बिल को निरस्त कर दिया।
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