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Amroha News: शिक्षकों की कमी से जूझ रहे राजकीय विद्यालय, 284 पद खाली
Mon, 16 Dec 2024 01:53 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अमरोहा
संवाद न्यूज एजेंसी, अमरोहा
Updated Mon, 16 Dec 2024 01:53 AM IST
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अमरोहा।
यूपी बोर्ड परीक्षा की समय सारिणी जारी हो चुकी है। विद्यार्थी परीक्षा की तैयारियों में जुटे हैं। लेकिन, राजकीय विद्यालयों में शिक्षकों की कमी यहां पढ़ने वाले बच्चों के लिए परेशानी का सबब बनी है। इन विद्यालयों में शिक्षकों की संख्या पूरी न होने से छात्रों को विषयों को समझने में परेशानी का सामना करना पड़ता है। जिले के राजकीय विद्यालयों में प्रधानाचार्य, प्रवक्ता और सहायक अध्यापकों के 458 पद है। जबकि, इनमें से 284 पद खाली हैं।
जिले में 25 राजकीय विद्यालयों का संचालन होता है। इनमें 14 इंटर कॉलेज और 11 विद्यालय हाईस्कूल तक संचालित होते हैं। जिसमें कई हजार बच्चे पढ़ते हैं। बच्चों का शैक्षिक स्तर सुधारने लिए सरकार भी लगातार कई योजनाएं अभियान चलाती है। जिस पर करोड़ों रुपये खर्च भी किए जाते हैं। लेकिन, इन काॅलेजों में विषयों का पाठ्यक्रम पूरा करने में शिक्षकों की कमी आड़े आ रही है।
जिले के अधिकांश राजकीय विद्यालय शिक्षकों की कमी से जूझ रहे हैं। जिससे विद्यार्थियों को पाठ्यक्रम पूरा करने व समझने में भी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। 14 राजकीय इंटर कॉलेजों में से सिर्फ दो कॉलेज में ही प्रधानाचार्य की तैनाती है। बाकी कॉलेजों में वरिष्ठ शिक्षक की प्रधानाचार्य के दायित्वों का निर्वहन कर रहे हैं। इसके अतिरिक्त प्रवक्ता, सहायक अध्यापक के अलावा लिपिक एवं चपरासी के पद भी बड़ी संख्या में रिक्त चल रहे हैं। (संवाद)
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बच्चों काे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म का सहारा
शिक्षकों की कमी के चलते विद्यालयों में ऑनलाइन शिक्षा की व्यवस्था की गई है। जिसके सहारे विद्यार्थियों को कोर्स पूरा कराया जाता है। इसके अलावा कुछ विद्यालयों में विषयों का पाठ्यक्रम पूरा कराने के लिए अस्थाई शिक्षकों की व्यवस्था भी की गई है।
राजकीय विद्यालयों में स्टाफ का ब्योरा
पदनाम - स्वीकृत पद - कार्यरत - रिक्त
प्रधानाचार्य/ प्रधानाध्यापक - 25 - 10 - 11
प्रवक्ता - 126 - 21 - 105
सहायक अध्यापक - 205 - 102 - 103
लिपिक - 36 - 29 - 7
चतुर्थ श्रेणी - 67 - 8 - 59
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राजकीय विद्यालयों में शिक्षकों की नियुक्ति आयोग की ओर से की जाती है। जहां प्रधानाचार्यों का अभाव है, वहां वरिष्ठ शिक्षकों की जिम्मेदारी दी गई है। उम्मीद है कि जल्द ही विद्यालयों में शिक्षकों की कमी पूरी होगी और आयोग से शिक्षकों की तैनाती हाेगी। पढ़ाई प्रभावित न होने इसके लिए ऑनलाइन पोर्टल व अस्थाई शिक्षकों का सहारा लिया जाता है। - ललित कुमार, प्रभारी डीआईओएस/ प्रधानाचार्य, राजकीय इंटर कॉलेज अमरोहा
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यूपी बोर्ड परीक्षा की समय सारिणी जारी हो चुकी है। विद्यार्थी परीक्षा की तैयारियों में जुटे हैं। लेकिन, राजकीय विद्यालयों में शिक्षकों की कमी यहां पढ़ने वाले बच्चों के लिए परेशानी का सबब बनी है। इन विद्यालयों में शिक्षकों की संख्या पूरी न होने से छात्रों को विषयों को समझने में परेशानी का सामना करना पड़ता है। जिले के राजकीय विद्यालयों में प्रधानाचार्य, प्रवक्ता और सहायक अध्यापकों के 458 पद है। जबकि, इनमें से 284 पद खाली हैं।
जिले में 25 राजकीय विद्यालयों का संचालन होता है। इनमें 14 इंटर कॉलेज और 11 विद्यालय हाईस्कूल तक संचालित होते हैं। जिसमें कई हजार बच्चे पढ़ते हैं। बच्चों का शैक्षिक स्तर सुधारने लिए सरकार भी लगातार कई योजनाएं अभियान चलाती है। जिस पर करोड़ों रुपये खर्च भी किए जाते हैं। लेकिन, इन काॅलेजों में विषयों का पाठ्यक्रम पूरा करने में शिक्षकों की कमी आड़े आ रही है।
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जिले के अधिकांश राजकीय विद्यालय शिक्षकों की कमी से जूझ रहे हैं। जिससे विद्यार्थियों को पाठ्यक्रम पूरा करने व समझने में भी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। 14 राजकीय इंटर कॉलेजों में से सिर्फ दो कॉलेज में ही प्रधानाचार्य की तैनाती है। बाकी कॉलेजों में वरिष्ठ शिक्षक की प्रधानाचार्य के दायित्वों का निर्वहन कर रहे हैं। इसके अतिरिक्त प्रवक्ता, सहायक अध्यापक के अलावा लिपिक एवं चपरासी के पद भी बड़ी संख्या में रिक्त चल रहे हैं। (संवाद)
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बच्चों काे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म का सहारा
शिक्षकों की कमी के चलते विद्यालयों में ऑनलाइन शिक्षा की व्यवस्था की गई है। जिसके सहारे विद्यार्थियों को कोर्स पूरा कराया जाता है। इसके अलावा कुछ विद्यालयों में विषयों का पाठ्यक्रम पूरा कराने के लिए अस्थाई शिक्षकों की व्यवस्था भी की गई है।
राजकीय विद्यालयों में स्टाफ का ब्योरा
पदनाम - स्वीकृत पद - कार्यरत - रिक्त
प्रधानाचार्य/ प्रधानाध्यापक - 25 - 10 - 11
प्रवक्ता - 126 - 21 - 105
सहायक अध्यापक - 205 - 102 - 103
लिपिक - 36 - 29 - 7
चतुर्थ श्रेणी - 67 - 8 - 59
राजकीय विद्यालयों में शिक्षकों की नियुक्ति आयोग की ओर से की जाती है। जहां प्रधानाचार्यों का अभाव है, वहां वरिष्ठ शिक्षकों की जिम्मेदारी दी गई है। उम्मीद है कि जल्द ही विद्यालयों में शिक्षकों की कमी पूरी होगी और आयोग से शिक्षकों की तैनाती हाेगी। पढ़ाई प्रभावित न होने इसके लिए ऑनलाइन पोर्टल व अस्थाई शिक्षकों का सहारा लिया जाता है। - ललित कुमार, प्रभारी डीआईओएस/ प्रधानाचार्य, राजकीय इंटर कॉलेज अमरोहा