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जानलेवा हमले में चार साल कैद व 11 हजार जुर्माना
ब्यूरो/अमर उजाला अमरोहा
Updated Thu, 25 Aug 2016 01:45 AM IST
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सजा सुनने के बाद भाग
- फोटो : amar ujala
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जानलेवा हमले के दोषी को अदालत ने चार साल सश्रम कारावास व 11 हजार रुपए जुर्माने की सजा सुनाई है। इस मामले के दो दोषियों को पहले ही सजा दी जा चुकी है। जिस दोषी की सजा का फैसला बुधवार को सुनाया गया, वह तारीख पर हाजिर नहीं होने की वजह से उसकी पत्रावली अलग रख ली गई थी, जिस पर बुधवार को सुनवाई हुई।
मामला मंडी धनौरा थाना क्षेत्र के गांव वसी मुस्तकम का है। यहां की रहने वाली माया देवी पत्नी स्व. विपिन ने 25 अक्टूबर 2013 को थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि उसका बेटा नंदू उर्फ परमानंद व मिथुन छप्पर में सो रहा था।
रात में दीवार कूदकर चार लोग अंदर दाखिल हो गए थे। उसके बेटे नंदू पर छुरी से ताबड़तोड़ वार किए थे, जिससे वह लहूलुहान हो गया था। जिस पर उसने अजय, विजय पुत्रगण चतुर्भुज निवासी बाईपास रोड हापुड़, दुष्यंत पुत्र धर्मवीर निवासी मो. नई मंडी अंबेडकर नगर थाना हापुड़ देहात के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी।
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तब से ये केस एफटीसी प्रथम की अदालत में विचाराधीन था। 16 जुलाई 2016 को केस की सुनवाई करते हुए न्यायाधीश अखिलेश कुमार ने दोषी अजय व विजय को सजा सुना दी थी। तीसरे आरोपी दुष्यंत के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किए थे। पुलिस ने उसको पकड़कर जेल भेज दिया था। बुधवार को न्यायाधीश ने फिर मसले की सुनवाई की।
अभियोजन पक्ष के अधिवक्ता निशात अकरम फारुकी ने सुबूत पेश करते हुए आरोपी को सख्त से सख्त सजा देने की मांग की थी। इसके बाद न्यायाधीश ने उपलब्ध पत्रावलियों के साक्ष्यों का अवलोकन किया और दुष्यंत को भी दोषी माना। तत्पश्चात उन्होंने दोषी को चार साल के सश्रम कारावास व 11 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई।
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मामला मंडी धनौरा थाना क्षेत्र के गांव वसी मुस्तकम का है। यहां की रहने वाली माया देवी पत्नी स्व. विपिन ने 25 अक्टूबर 2013 को थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि उसका बेटा नंदू उर्फ परमानंद व मिथुन छप्पर में सो रहा था।
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रात में दीवार कूदकर चार लोग अंदर दाखिल हो गए थे। उसके बेटे नंदू पर छुरी से ताबड़तोड़ वार किए थे, जिससे वह लहूलुहान हो गया था। जिस पर उसने अजय, विजय पुत्रगण चतुर्भुज निवासी बाईपास रोड हापुड़, दुष्यंत पुत्र धर्मवीर निवासी मो. नई मंडी अंबेडकर नगर थाना हापुड़ देहात के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी।
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तब से ये केस एफटीसी प्रथम की अदालत में विचाराधीन था। 16 जुलाई 2016 को केस की सुनवाई करते हुए न्यायाधीश अखिलेश कुमार ने दोषी अजय व विजय को सजा सुना दी थी। तीसरे आरोपी दुष्यंत के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किए थे। पुलिस ने उसको पकड़कर जेल भेज दिया था। बुधवार को न्यायाधीश ने फिर मसले की सुनवाई की।
अभियोजन पक्ष के अधिवक्ता निशात अकरम फारुकी ने सुबूत पेश करते हुए आरोपी को सख्त से सख्त सजा देने की मांग की थी। इसके बाद न्यायाधीश ने उपलब्ध पत्रावलियों के साक्ष्यों का अवलोकन किया और दुष्यंत को भी दोषी माना। तत्पश्चात उन्होंने दोषी को चार साल के सश्रम कारावास व 11 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई।