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संविदाकर्मी प्लंबर ने की थी आत्महत्या, पोस्टमार्टम रिपोर्ट में हुई पुष्टि
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उझारी नगर पंचायत कार्यालय में संविदा कर्मचारी ने खुद ही फंदे पर लटक कर जान दी थी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में आत्महत्या करने की पुष्टि हुई है।
सैदनगली थानाक्षेत्र के तरारा गांव निवासी प्रेमशंकर उझारी नगर पंचायत कार्यालय में पिछले तीस साल से संविदाकर्मी के रूप में प्लंबर के पद पर तैनात थे। रविवार सुबह करीब 10.30 बजे उनका शव नगर पंचायत कार्यालय परिसर स्थित रैन बसेरा के कमरे में बिजली के तार से पंखे के सहारे फांसी पर लटकता हुआ मिला था। उसके पैर जमीन से टिके हुए थे। घटना की जानकारी मिलते ही नगर पंचायत के ईओ पुष्पेंद्र सिंह राठौर मौके पर पहुंच गए और पुलिस को घटना की जानकारी दी थी। सूचना मिलते ही प्रेमशंकर के परिजन भी मौके पर पहुंच गए थे। पुलिस ने मृतक के बेटे की तहरीर पर अधिशासी अधिकारी, ठेकेदार सहित तीन लोगों के खिलाफ हत्या और एससी/एसटी एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज की थी। शाम को डॉक्टरों के पैनल से शव का पोस्टमार्टम कराने के बाद पुलिस की मौजूदगी में देर रात परिजनों ने संविदा कर्मी का अंतिम संस्कार किया। थानाध्यक्ष सतेंद्र कुमार ने बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में प्रेमशंकर की मौत हैंगिंग के कारण होना बताया गया है। उसके शरीर पर चोट के निशान भी नहीं पाए गए, यानी उसने आत्महत्या की थी।
संविदा कर्मी की मौत के मामले की विवेचना शुरू
उझारी नगर पंचायत कार्यालय में संविदा कर्मी की मौत के मामले में सीओ हसनपुर ने विवेचना शुरू कर दी है। पुलिस की अब तक की जांच में परिजनों द्वारा लगाए गए आरोपों की पुष्टि नहीं हो रही है। अधिशासी अधिकारी पर प्रेमशंकर का तीन माह का वेतन रोकने का आरोप जांच में सही नहीं पाया गया। पुलिस की जांच में आया है कि पालिका ने फरवरी तक के वेतन का भुगतान कर दिया था। पुलिस ने मृतक का मोबाइल कब्जे में लिया है। बेटे का आरोप था कि पिता प्रेमशंकर के फोन पर एक ही नंबर से सात बार कॉल आई थी। जांच में पुलिस को ऐसा कोई नंबर नहीं मिला, जिससे घटना से पहले सात बार कॉल की गई हो। फिलहाल पुलिस मृतक के नंबर का कॉल डिटेल रिकॉर्ड निकलवा रही है। सीओ सतीश कुमार पांडेय ने बताया कि जांच की जा ही है।
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सैदनगली थानाक्षेत्र के तरारा गांव निवासी प्रेमशंकर उझारी नगर पंचायत कार्यालय में पिछले तीस साल से संविदाकर्मी के रूप में प्लंबर के पद पर तैनात थे। रविवार सुबह करीब 10.30 बजे उनका शव नगर पंचायत कार्यालय परिसर स्थित रैन बसेरा के कमरे में बिजली के तार से पंखे के सहारे फांसी पर लटकता हुआ मिला था। उसके पैर जमीन से टिके हुए थे। घटना की जानकारी मिलते ही नगर पंचायत के ईओ पुष्पेंद्र सिंह राठौर मौके पर पहुंच गए और पुलिस को घटना की जानकारी दी थी। सूचना मिलते ही प्रेमशंकर के परिजन भी मौके पर पहुंच गए थे। पुलिस ने मृतक के बेटे की तहरीर पर अधिशासी अधिकारी, ठेकेदार सहित तीन लोगों के खिलाफ हत्या और एससी/एसटी एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज की थी। शाम को डॉक्टरों के पैनल से शव का पोस्टमार्टम कराने के बाद पुलिस की मौजूदगी में देर रात परिजनों ने संविदा कर्मी का अंतिम संस्कार किया। थानाध्यक्ष सतेंद्र कुमार ने बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में प्रेमशंकर की मौत हैंगिंग के कारण होना बताया गया है। उसके शरीर पर चोट के निशान भी नहीं पाए गए, यानी उसने आत्महत्या की थी।
संविदा कर्मी की मौत के मामले की विवेचना शुरू
उझारी नगर पंचायत कार्यालय में संविदा कर्मी की मौत के मामले में सीओ हसनपुर ने विवेचना शुरू कर दी है। पुलिस की अब तक की जांच में परिजनों द्वारा लगाए गए आरोपों की पुष्टि नहीं हो रही है। अधिशासी अधिकारी पर प्रेमशंकर का तीन माह का वेतन रोकने का आरोप जांच में सही नहीं पाया गया। पुलिस की जांच में आया है कि पालिका ने फरवरी तक के वेतन का भुगतान कर दिया था। पुलिस ने मृतक का मोबाइल कब्जे में लिया है। बेटे का आरोप था कि पिता प्रेमशंकर के फोन पर एक ही नंबर से सात बार कॉल आई थी। जांच में पुलिस को ऐसा कोई नंबर नहीं मिला, जिससे घटना से पहले सात बार कॉल की गई हो। फिलहाल पुलिस मृतक के नंबर का कॉल डिटेल रिकॉर्ड निकलवा रही है। सीओ सतीश कुमार पांडेय ने बताया कि जांच की जा ही है।
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