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साल में पांच सेमी तक बढ़नी चाहिए बच्चों की लंबाई : डॉ. कोचर
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मुरादाबाद। गर्भावस्था में होने वाली समस्याओं, अनुवांशिक कारणों व विभिन्न बीमारियों के कारण बच्चों की वृद्धि प्रभावित होती है। यदि एक साल में बच्चों की लंबाई कम से कम पांच सेमी न बढ़े तो चिंता का विषय है। डॉक्टर के पास जाकर हार्मोंस की जांच करानी चाहिए। यदि ग्रोथ हार्मोंस बनाने वाली मास्टर ग्रंथि में कोई खामी भी है तो घबराएं नहीं।
यह बात नोएडा के अपोलो अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. आईपीएस कोचर ने कही। रविवार को दिल्ली हाईवे स्थित एक होटल में आयोजित आईएमए की वार्षिक सीएमई में डॉ. कोचर बच्चों में हार्मोंस की समस्या पर बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि हार्मोंस के इलाज के लिए अब रोज इंजेक्शन लगाने की जरूरत नहीं है। नई पद्धति में सप्ताह में एक इंजेक्शन से भी काम हो सकता है। यह दवा व्यक्ति को कई वर्ष तक करानी पड़ती है।
आईएमए की वार्षिक सीएमई में पश्चिमी उत्तर प्रदेश के विभिन्न विशेषज्ञ डॉक्टरों ने शिरकत की। क्रिटिकल केयर, लिवर ट्रांसप्लांट, न्यूक्लियर मेडिसिन पर विस्तृत चर्चा हुई। गाजियाबाद से आए डॉ. निकुंज बंसल ने कहा कि न्यूक्लियर मेडिसिन में गामा कैमरा व पेट सीटी के जरिये कई जटिल रोगों की जांच की जा सकती है। थायराइड कैंसर, ऑर्गन कैंसर, प्रोस्टेट कैंसर में यह विधि बहुत कारगर है।
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उन्होंने पावर प्वाइंट प्रेेजेंटेशन के जरिये इसका महत्व बताया। उन्होंने बताया कि सर्जरी के बाद मरीज को न्यूक्लियर थेरेपी दी जाती है। सर गंगाराम अस्पताल के पीडियाट्रिक सर्जन डॉ. सतीश अग्रवाल ने तकनीक के साथ बेसिक मेडिकल प्रैक्टिस पर जोर दिया। बच्चों के अंडकोष में होने वाले दर्द को गंभीरता से लेने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि यदि अंडकोष घूम गए हैं और दो माह में सर्जरी नहीं हुई तो इन्हें निकालना पड़ता है।
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इंटरवेंशनल रेडियोलॉजी, रोबोटिक सर्जरी पर भी हुई चर्चा
डॉ. एसएम रजी ने थायराइड ग्रंथि की समस्याओं पर, फोर्टिस गुरुग्राम के डॉ. संदीप दीवान ने क्रिटिकल केयर पर, डॉ. मंजरी अग्रवाल ने रेह्यूमेटोलॉजी पर, मैक्स वैशाली के डॉ. राजेश डे ने लिवर ट्रांसप्लांट पर, डॉ. सुबूही रिजवी ने गर्भस्थ शिशु की अल्ट्रासाउंड जांच में पाए जाने वाले सॉफ्ट मार्कर्स पर, डॉ. अमिता महाजन ने एनीमिया पर, डॉ. तरुण चरण ने इंटरवेंशनल रेडियोलॉजी पर, डॉ. मगन मेहरोत्रा ने रोबोटिक सर्जरी पर, डॉ. संदीप ने रेडिएशन थेरेपी पर, डॉ. ऋतु वर्मा, डॉ. विवेक चतुर्वेदी ने हार्ट अटैक के कारणों पर व्याख्यान दिया। सीपीआर और इनटूबेशन की ट्रेनिंग वर्कशॉप का आयोजन डॉ. स्मिता गुप्ता, डॉ. पंकज बुंदेला ने किया। सीएमई का संचालन डॉ. सौभाग्य मिश्रा और डॉ. सुशांत श्रीधर ने किया। दूसरी ओर डॉ. गौरव अग्रवाल और डॉ. विनम्र सिंघल ने किया।
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इनकी रही मौजूदगी
डिप्टी सीएमओ डॉ. संजीव बेलवाल, आईएमए के प्रेसिडेंट इलेक्ट डॉ. सीपी सिंह, वर्तमान अध्यक्ष डॉ. प्रीति गुप्ता, पूर्व अध्यक्ष डॉ. रवि गंगल, सचिव डॉ. सुदीप कौर, कोषाध्यक्ष डॉ. रूबी चुग, डॉ. बीके दत्त, डॉ. अनुराग अग्रवाल, डॉ. राकेश कुमार, डॉ. अनंत राणा, डॉ. लीना मेहरोत्रा, डॉ. संजीव सिंघल, डॉ. नितिन अग्रवाल, डॉ. नीरज गुप्ता, डॉ. विनय गुप्ता, डॉ. यूसी रस्तोगी, डॉ. नितिन बत्रा, डॉ. अमित रस्तोगी, डॉ. केजी गुप्ता, डॉ. अरुण चुग आदि मौजूद रहे।
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डॉक्टरों के वर्जन
क्रिटिकल केयर में फेफड़े व दिल के मरीजों को वेंटिलेटर पर लेने के बाद आधुनिक उपकरण के जरिये कृत्रिम फेफड़ों से सांस दी जाती है। मरीज के रक्त में ऑक्सीजन पहुंचाई जाती है। इससे दवाएं आठ से 10 दिन में असर दिखाती हैं और मरीज ठीक होने लगता है। रेड पाइजन खाने वाले मरीज को भी 15-20 प्रतिशत पंपिंग पर आठ घंटे के भीतर अस्पताल लाया जाए तो जान बचाई जा सकती है। - डॉ. संदीप दीवान, फोर्टिस गुड़गांव
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अल्ट्रासाउंड में सॉफ्ट मार्कर्स के जरिये गर्भस्थ शिशु की स्थिति का सही पता लगाया जा सकता है। इसके जरिये तीन माह पूरे होने से पहले ही बच्चे में डाउन सिंड्रोम का पता लगाया जा सकता है। इससे स्वजन किसी निर्णय पर पहुंच सकते हैं।
- डॉ. सुबूही रिजवी
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मोबाइल ज्यादा देखने के कारण भी बच्चों में वृद्धि प्रभावित होती है। एक साल में यदि बच्चे की लंबाई पांच सेमी नहीं बढ़ रही है तो ग्रोथ हार्मोन स्टीम्यूलेशन टेस्ट कराना चाहिए। इसके आधार पर बच्चे की दवा चलती है।
- डॉ. आईपीएस कोचर, अपोलो अस्पताल, नोएडा
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न्यूक्लियर मेडिसिन में गामा कैमरा व पेट सीटी से पूरे शरीर की स्क्रीनिंग हो जाती है। मरीज के शरीर में थोड़ी सी दवा इंजेक्शन से दी जाती है। जहां समस्या होती है वहां से किरणें निकलती हैं और मशीन उसे पकड़ लेती है।
- डॉ. निकुंज जैन, गाजियाबाद
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बच्चे को अगर पीलिया है और वह सफेद रंग का मल त्याग रहा है तो यह चिंताजनक है। हर हाल में दो माह के भीतर बच्चे की सर्जरी होनी चाहिए, अन्यथा जान का खतरा हो सकता है। आजकल अल्ट्रासाउंड से बच्चों में जन्म से पहले ही बीमारियों का पता लगाया जा सकता है।
- डॉ. सतीश अग्रवाल, सर गंगाराम अस्पताल
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सर्जरी में अत्याधुनिक रोबोटिक तकनीक का इस्तेमाल कर कई गुना अच्छे परिणाम पाए जा सकते हैं। इससे मरीज जल्दी रिकवर होता है और ऑपरेशन के दौरान सटीकता बढ़ती है। दूसरे देश भारत को देखकर इस तकनीक को सीख रहे हैं।
- डॉ. मगन मेहरोत्रा, अपेक्स अस्पताल
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यह बात नोएडा के अपोलो अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. आईपीएस कोचर ने कही। रविवार को दिल्ली हाईवे स्थित एक होटल में आयोजित आईएमए की वार्षिक सीएमई में डॉ. कोचर बच्चों में हार्मोंस की समस्या पर बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि हार्मोंस के इलाज के लिए अब रोज इंजेक्शन लगाने की जरूरत नहीं है। नई पद्धति में सप्ताह में एक इंजेक्शन से भी काम हो सकता है। यह दवा व्यक्ति को कई वर्ष तक करानी पड़ती है।
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आईएमए की वार्षिक सीएमई में पश्चिमी उत्तर प्रदेश के विभिन्न विशेषज्ञ डॉक्टरों ने शिरकत की। क्रिटिकल केयर, लिवर ट्रांसप्लांट, न्यूक्लियर मेडिसिन पर विस्तृत चर्चा हुई। गाजियाबाद से आए डॉ. निकुंज बंसल ने कहा कि न्यूक्लियर मेडिसिन में गामा कैमरा व पेट सीटी के जरिये कई जटिल रोगों की जांच की जा सकती है। थायराइड कैंसर, ऑर्गन कैंसर, प्रोस्टेट कैंसर में यह विधि बहुत कारगर है।
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उन्होंने पावर प्वाइंट प्रेेजेंटेशन के जरिये इसका महत्व बताया। उन्होंने बताया कि सर्जरी के बाद मरीज को न्यूक्लियर थेरेपी दी जाती है। सर गंगाराम अस्पताल के पीडियाट्रिक सर्जन डॉ. सतीश अग्रवाल ने तकनीक के साथ बेसिक मेडिकल प्रैक्टिस पर जोर दिया। बच्चों के अंडकोष में होने वाले दर्द को गंभीरता से लेने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि यदि अंडकोष घूम गए हैं और दो माह में सर्जरी नहीं हुई तो इन्हें निकालना पड़ता है।
इंटरवेंशनल रेडियोलॉजी, रोबोटिक सर्जरी पर भी हुई चर्चा
डॉ. एसएम रजी ने थायराइड ग्रंथि की समस्याओं पर, फोर्टिस गुरुग्राम के डॉ. संदीप दीवान ने क्रिटिकल केयर पर, डॉ. मंजरी अग्रवाल ने रेह्यूमेटोलॉजी पर, मैक्स वैशाली के डॉ. राजेश डे ने लिवर ट्रांसप्लांट पर, डॉ. सुबूही रिजवी ने गर्भस्थ शिशु की अल्ट्रासाउंड जांच में पाए जाने वाले सॉफ्ट मार्कर्स पर, डॉ. अमिता महाजन ने एनीमिया पर, डॉ. तरुण चरण ने इंटरवेंशनल रेडियोलॉजी पर, डॉ. मगन मेहरोत्रा ने रोबोटिक सर्जरी पर, डॉ. संदीप ने रेडिएशन थेरेपी पर, डॉ. ऋतु वर्मा, डॉ. विवेक चतुर्वेदी ने हार्ट अटैक के कारणों पर व्याख्यान दिया। सीपीआर और इनटूबेशन की ट्रेनिंग वर्कशॉप का आयोजन डॉ. स्मिता गुप्ता, डॉ. पंकज बुंदेला ने किया। सीएमई का संचालन डॉ. सौभाग्य मिश्रा और डॉ. सुशांत श्रीधर ने किया। दूसरी ओर डॉ. गौरव अग्रवाल और डॉ. विनम्र सिंघल ने किया।
इनकी रही मौजूदगी
डिप्टी सीएमओ डॉ. संजीव बेलवाल, आईएमए के प्रेसिडेंट इलेक्ट डॉ. सीपी सिंह, वर्तमान अध्यक्ष डॉ. प्रीति गुप्ता, पूर्व अध्यक्ष डॉ. रवि गंगल, सचिव डॉ. सुदीप कौर, कोषाध्यक्ष डॉ. रूबी चुग, डॉ. बीके दत्त, डॉ. अनुराग अग्रवाल, डॉ. राकेश कुमार, डॉ. अनंत राणा, डॉ. लीना मेहरोत्रा, डॉ. संजीव सिंघल, डॉ. नितिन अग्रवाल, डॉ. नीरज गुप्ता, डॉ. विनय गुप्ता, डॉ. यूसी रस्तोगी, डॉ. नितिन बत्रा, डॉ. अमित रस्तोगी, डॉ. केजी गुप्ता, डॉ. अरुण चुग आदि मौजूद रहे।
डॉक्टरों के वर्जन
क्रिटिकल केयर में फेफड़े व दिल के मरीजों को वेंटिलेटर पर लेने के बाद आधुनिक उपकरण के जरिये कृत्रिम फेफड़ों से सांस दी जाती है। मरीज के रक्त में ऑक्सीजन पहुंचाई जाती है। इससे दवाएं आठ से 10 दिन में असर दिखाती हैं और मरीज ठीक होने लगता है। रेड पाइजन खाने वाले मरीज को भी 15-20 प्रतिशत पंपिंग पर आठ घंटे के भीतर अस्पताल लाया जाए तो जान बचाई जा सकती है। - डॉ. संदीप दीवान, फोर्टिस गुड़गांव
अल्ट्रासाउंड में सॉफ्ट मार्कर्स के जरिये गर्भस्थ शिशु की स्थिति का सही पता लगाया जा सकता है। इसके जरिये तीन माह पूरे होने से पहले ही बच्चे में डाउन सिंड्रोम का पता लगाया जा सकता है। इससे स्वजन किसी निर्णय पर पहुंच सकते हैं।
- डॉ. सुबूही रिजवी
मोबाइल ज्यादा देखने के कारण भी बच्चों में वृद्धि प्रभावित होती है। एक साल में यदि बच्चे की लंबाई पांच सेमी नहीं बढ़ रही है तो ग्रोथ हार्मोन स्टीम्यूलेशन टेस्ट कराना चाहिए। इसके आधार पर बच्चे की दवा चलती है।
- डॉ. आईपीएस कोचर, अपोलो अस्पताल, नोएडा
न्यूक्लियर मेडिसिन में गामा कैमरा व पेट सीटी से पूरे शरीर की स्क्रीनिंग हो जाती है। मरीज के शरीर में थोड़ी सी दवा इंजेक्शन से दी जाती है। जहां समस्या होती है वहां से किरणें निकलती हैं और मशीन उसे पकड़ लेती है।
- डॉ. निकुंज जैन, गाजियाबाद
बच्चे को अगर पीलिया है और वह सफेद रंग का मल त्याग रहा है तो यह चिंताजनक है। हर हाल में दो माह के भीतर बच्चे की सर्जरी होनी चाहिए, अन्यथा जान का खतरा हो सकता है। आजकल अल्ट्रासाउंड से बच्चों में जन्म से पहले ही बीमारियों का पता लगाया जा सकता है।
- डॉ. सतीश अग्रवाल, सर गंगाराम अस्पताल
सर्जरी में अत्याधुनिक रोबोटिक तकनीक का इस्तेमाल कर कई गुना अच्छे परिणाम पाए जा सकते हैं। इससे मरीज जल्दी रिकवर होता है और ऑपरेशन के दौरान सटीकता बढ़ती है। दूसरे देश भारत को देखकर इस तकनीक को सीख रहे हैं।
- डॉ. मगन मेहरोत्रा, अपेक्स अस्पताल