{"_id":"6a9f1f99ab562580c90dce04","slug":"cattle-hit-by-lumpy-virus-over-50-animals-infected-across-14-villages-jpnagar-news-c-284-1-smbd1013-172402-2026-09-08","type":"story","status":"publish","title_hn":"Amroha News: लंपी वायरस की चपेट में गोवंश, 14 गांवों में 50 से ज्यादा पशु संक्रमित","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Amroha News: लंपी वायरस की चपेट में गोवंश, 14 गांवों में 50 से ज्यादा पशु संक्रमित
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अमरोहा। जिले में लंपी वायरस ने गोवंशीय पशुओं को अपनी चपेट में लिया है। अब तक अलग-अलग 14 गांवों में 50 से अधिक पशुओं में बीमारी की पुष्टि हुई है। संक्रमण बढ़ने से पशुपालकों की चिंता बढ़ गई है। पशुओं के बीमार होने से दूध उत्पादन प्रभावित होने की आशंका है। इसे देखते हुए पशुपालन विभाग ने सभी पशु चिकित्सकों को अलर्ट करते हुए निगरानी बढ़ा दी है। स्वास्थ्य विभाग ने देसी नुस्खों से इम्युनिटी बढ़ाने की सलाह दी है।
जिले में दो लाख से अधिक गोवंशीय पशु पाले जाते हैं। ऐसे में संक्रमण को लेकर पशुपालकों में भय का माहौल है। विभाग की ओर से संक्रमित पशुओं को तत्काल स्वस्थ पशुओं से अलग रखने की सलाह दी गई है, ताकि संक्रमण दूसरे पशुओं तक न पहुंचे। पशुओं के रहने के स्थान पर साफ-सफाई रखने और मक्खी-मच्छरों की रोकथाम के लिए आसपास कपूर या उपयुक्त कीटनाशक का छिड़काव करने को कहा गया है। पशुपालकों से समय पर पशुओं का टीकाकरण कराने की अपील की गई है। पशु की हालत गंभीर होने पर बिना देरी किए पशु चिकित्सक से संपर्क करने की सलाह दी गई है।
पशुओं की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए पशुपालक घरेलू नुस्खों का भी इस्तेमाल कर रहे हैं। एक मुट्ठी नीम और तुलसी के पत्ते, 10-10 नग लहसुन, लौंग और काली मिर्च, 15 ग्राम जीरा, 10 ग्राम हल्दी पाउडर और गुड़ मिलाकर मिश्रण तैयार किया जा रहा है। इसे लड्डू के रूप में बनाकर सुबह-शाम 10 से 14 दिन तक देने की बात कही जा रही है। हालांकि, ऐसे घरेलू उपायों को पशु चिकित्सक की सलाह और उपचार का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए।
विज्ञापन
मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. आभा दत्त ने बताया कि लंपी वायरस से बचाव को लेकर सभी पशु चिकित्सकों को अलर्ट किया गया है। बीमारी की रोकथाम के लिए स्वस्थ पशुओं का टीकाकरण कराया जा रहा है। पशुपालकों को बीमारी के लक्षण, बचाव और संक्रमित पशुओं को अलग रखने के संबंध में जानकारी देने के लिए एडवाइजरी भी जारी की गई है। विभाग की ओर से गांवों में स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है, ताकि संक्रमण को फैलने से रोका जा सके।
-- --
गोशाला में कुछ पंखे बंद मिले, संक्रमित गोवंश अलग रखे
गजरौला। नगर पालिका की कान्हा गोशाला में निरीक्षण के दौरान गोवंश के लिए चारे के पर्याप्त इंतजाम मिले, लेकिन एक टिनशेड के नीचे लगे कुछ पंखे बंद मिले। गोशाला में कुल 231 गोवंशीय पशु हैं, जिनमें 91 गाय और बछिया तथा बाकी सांड़ और बछड़े हैं। दोपहर करीब 12 बजे अधिकांश पशु चारा खाते या आराम करते मिले। कुछ पशुओं में लंपी के लक्षण मिलने पर उन्हें अलग कर उपचार कराया गया था। संचालक ने बताया कि करीब एक सप्ताह पहले गोवंश का टीकाकरण कराया गया है। बंद पंखों को ठीक कराने के लिए कर्मचारी को सूचना दी गई। निरीक्षण के समय हालांकि गर्मी कम थी। संवाद
-- -- -- -- -- -- --
कान्हा गोशाला में नहीं मिला लंपी संक्रमित पशु
मंडी धनौरा। नगर पालिका की कान्हा गोशाला में सोमवार दोपहर बाद निरीक्षण के दौरान सभी गोवंशीय पशु स्वस्थ मिले। गोशाला में 114 पशु आश्रय पा रहे हैं, जिनमें 63 नर और 51 मादा हैं। पशुओं के लिए हरे चारे की पर्याप्त व्यवस्था मिली और सफाई भी संतोषजनक पाई गई। गोशाला में मौजूद पैरावेट नेपाल सिंह ने बताया कि लंपी वायरस समेत अन्य बीमारियों से बचाव के लिए पशुओं का समय से टीकाकरण कराया जा चुका है। कुछ दिन पूर्व खादर क्षेत्र के एक गांव में ग्रामीण की गाय के लंपी संक्रमित होने की चर्चा हुई थी। हालांकि पशु चिकित्सक डॉ. भागेश सिंह ने जांच के बाद गाय में लंपी बीमारी होने से इन्कार किया था। संवाद
विज्ञापन
जिले में दो लाख से अधिक गोवंशीय पशु पाले जाते हैं। ऐसे में संक्रमण को लेकर पशुपालकों में भय का माहौल है। विभाग की ओर से संक्रमित पशुओं को तत्काल स्वस्थ पशुओं से अलग रखने की सलाह दी गई है, ताकि संक्रमण दूसरे पशुओं तक न पहुंचे। पशुओं के रहने के स्थान पर साफ-सफाई रखने और मक्खी-मच्छरों की रोकथाम के लिए आसपास कपूर या उपयुक्त कीटनाशक का छिड़काव करने को कहा गया है। पशुपालकों से समय पर पशुओं का टीकाकरण कराने की अपील की गई है। पशु की हालत गंभीर होने पर बिना देरी किए पशु चिकित्सक से संपर्क करने की सलाह दी गई है।
विज्ञापन
पशुओं की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए पशुपालक घरेलू नुस्खों का भी इस्तेमाल कर रहे हैं। एक मुट्ठी नीम और तुलसी के पत्ते, 10-10 नग लहसुन, लौंग और काली मिर्च, 15 ग्राम जीरा, 10 ग्राम हल्दी पाउडर और गुड़ मिलाकर मिश्रण तैयार किया जा रहा है। इसे लड्डू के रूप में बनाकर सुबह-शाम 10 से 14 दिन तक देने की बात कही जा रही है। हालांकि, ऐसे घरेलू उपायों को पशु चिकित्सक की सलाह और उपचार का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए।
विज्ञापन
मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. आभा दत्त ने बताया कि लंपी वायरस से बचाव को लेकर सभी पशु चिकित्सकों को अलर्ट किया गया है। बीमारी की रोकथाम के लिए स्वस्थ पशुओं का टीकाकरण कराया जा रहा है। पशुपालकों को बीमारी के लक्षण, बचाव और संक्रमित पशुओं को अलग रखने के संबंध में जानकारी देने के लिए एडवाइजरी भी जारी की गई है। विभाग की ओर से गांवों में स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है, ताकि संक्रमण को फैलने से रोका जा सके।
गोशाला में कुछ पंखे बंद मिले, संक्रमित गोवंश अलग रखे
गजरौला। नगर पालिका की कान्हा गोशाला में निरीक्षण के दौरान गोवंश के लिए चारे के पर्याप्त इंतजाम मिले, लेकिन एक टिनशेड के नीचे लगे कुछ पंखे बंद मिले। गोशाला में कुल 231 गोवंशीय पशु हैं, जिनमें 91 गाय और बछिया तथा बाकी सांड़ और बछड़े हैं। दोपहर करीब 12 बजे अधिकांश पशु चारा खाते या आराम करते मिले। कुछ पशुओं में लंपी के लक्षण मिलने पर उन्हें अलग कर उपचार कराया गया था। संचालक ने बताया कि करीब एक सप्ताह पहले गोवंश का टीकाकरण कराया गया है। बंद पंखों को ठीक कराने के लिए कर्मचारी को सूचना दी गई। निरीक्षण के समय हालांकि गर्मी कम थी। संवाद
कान्हा गोशाला में नहीं मिला लंपी संक्रमित पशु
मंडी धनौरा। नगर पालिका की कान्हा गोशाला में सोमवार दोपहर बाद निरीक्षण के दौरान सभी गोवंशीय पशु स्वस्थ मिले। गोशाला में 114 पशु आश्रय पा रहे हैं, जिनमें 63 नर और 51 मादा हैं। पशुओं के लिए हरे चारे की पर्याप्त व्यवस्था मिली और सफाई भी संतोषजनक पाई गई। गोशाला में मौजूद पैरावेट नेपाल सिंह ने बताया कि लंपी वायरस समेत अन्य बीमारियों से बचाव के लिए पशुओं का समय से टीकाकरण कराया जा चुका है। कुछ दिन पूर्व खादर क्षेत्र के एक गांव में ग्रामीण की गाय के लंपी संक्रमित होने की चर्चा हुई थी। हालांकि पशु चिकित्सक डॉ. भागेश सिंह ने जांच के बाद गाय में लंपी बीमारी होने से इन्कार किया था। संवाद