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जरूरत पर नहीं मिला रक्त, तो रक्दान को बना लिया जीवन का मकसद
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दिल की बीमारी से जूझ रहीं बुआ के लिए 20 साल की उम्र में पहली बार डरते-डरते रक्तदान करने वाले जोया के कौशल कुमार गुप्ता को बुआ के स्वस्थ होने से ऐसा आत्मिक संतोष मिला कि रक्तदान उनके जीवन का मकसद बन गया। 62 वर्ष के हो चुके कौशल कुमार अब तक 52 बार रक्तदान कर कई जरूरतमंदों के मददगार बन चुके हैं। यही नहीं, उन्होंने मरणोपरांत देहदान के लिए संकल्पपत्र भरकर भी स्वास्थ्य विभाग को सौंप दिया है। जोया के मोहल्ला खेड़ा निवासी कौशल कुमार गुप्ता लोहे का कारोबार करते हैं। उनका कहना है कि खुद के लिए तो हर कोई जिंदगी जी रहा है, लेकिन इंसान वही है जो दूसरों को खुशी दे। दूसरों की जिंदगी को मजबूती देने का अवसर बड़ा सुख और संतोष देता है। उन्होंने कहा कि संतोष का यही भाव उन्हें बार-बार रक्तदान के लिए प्रेरित करता है। चिकित्सक अनुमति दें तो वह 62 वर्ष की आयु में भी रक्तदान के लिए तैयार हैं।
मन में इस तरह के भाव जागने के पीछे उन्होंने वर्ष 1980 का एक वाकया बताया। कहा कि उस वक्त मुरादाबाद निवासी उनकी बुआ यशोदा गुप्ता दिल की गंभीर बीमारी के इलाज के लिए दिल्ली के अस्पताल में भर्ती थीं। इलाज के दौरान डॉक्टरों ने बुआ के लिए बिना देरी एक यूनिट रक्त का इंतजाम करने के लिए कहा। काफी प्रयास के बाद भी खून नहीं मिला। उस वक्त मजबूरी में उन्होंने घबराते हुए 20 वर्ष की उम्र में पहली बार रक्तदान किया।
कौशल कुमार गुप्ता ने बताया कि इसके बाद बुआ की हालत में सुधार से अकल्पनीय खुशी मिली। इसी खुशी ने बार-बार रक्तदान के लिए प्रेरित किया। यही वजह है कि वह अब तक 52 बार रक्तदान कर चुके हैं। साथ ही अन्य लोगों को भी रक्तदान करने के लिए प्रेरित करते हैं। उनका कहना है कि आपका रक्तदान दूसरों की जिंदगी की डोर मजबूत करता है। खुद की कोशिश से किसी और की जिंदगी मजबूत होने का एहसास परमसुख है।
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किडनी के लिए एक परिवार की पीड़ा देख लिया देहदान का संकल्प
अमरोहा। कौशल कुमार गुप्ता बताते हैं कि 25 वर्ष पूर्व हुई एक घटना ने उन्हें मरणोपरांत देहदान के लिए प्रेरित किया। बताते हैं कि उस वक्त दिल्ली के एक अस्पताल में पिता राजेंद्र कुमार गुप्ता का इलाज करवा रहे थे। वहां उन्होंने एक युवक को बिलखते हुए देखा। पूछने पर पता चला कि उसके पिता की दोनों किडनी खराब हो चुकी हैं। कोशिश के बाद भी किडनी डोनर नहीं मिल पा रहा था। कमजोर आर्थिक स्थिति वाले उस परिवार की पीड़ा देखकर घर लौटते ही मरणोपरांत देहदान का संकल्पपत्र भरकर स्वास्थ्य विभाग को सौंप दिया। इस इरादे से परिजनों को भी अवगत करा दिया। उनका कहना है कि मृत्यु उपरांत उनके शरीर के अधिकतम अंग अधिकतम जरूरतमंदों के काम आ सकें, यही उनकी सोच है।
तीन माह बाद फिर संभव है रक्तदान
चिकित्सकों के मुताबिक कोई भी स्वस्थ व्यक्ति रक्तदान के तीन माह बाद पुन: रक्तदान कर सकता है। रक्तदान से पूर्व कुछ जांचों से यह देख लिया जाता है कि रक्तदाता को कोई बीमारी या संक्रमण तो नहीं है। स्वस्थ होने के साथ 18 वर्ष से 60 वर्ष तक की आयु तक रक्तदान किया जा सकता है। जिला चिकित्सालय के ब्लड बैंक प्रभारी प्रमोद कुमार ने बताया कि पूर्ण स्वस्थ होने और शरीर में रक्त की मात्रा पर्याप्त होने पर 65 वर्ष की आयु तक के लोग स्वैच्छिक रक्तदान कर सकते हैं।
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मन में इस तरह के भाव जागने के पीछे उन्होंने वर्ष 1980 का एक वाकया बताया। कहा कि उस वक्त मुरादाबाद निवासी उनकी बुआ यशोदा गुप्ता दिल की गंभीर बीमारी के इलाज के लिए दिल्ली के अस्पताल में भर्ती थीं। इलाज के दौरान डॉक्टरों ने बुआ के लिए बिना देरी एक यूनिट रक्त का इंतजाम करने के लिए कहा। काफी प्रयास के बाद भी खून नहीं मिला। उस वक्त मजबूरी में उन्होंने घबराते हुए 20 वर्ष की उम्र में पहली बार रक्तदान किया।
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कौशल कुमार गुप्ता ने बताया कि इसके बाद बुआ की हालत में सुधार से अकल्पनीय खुशी मिली। इसी खुशी ने बार-बार रक्तदान के लिए प्रेरित किया। यही वजह है कि वह अब तक 52 बार रक्तदान कर चुके हैं। साथ ही अन्य लोगों को भी रक्तदान करने के लिए प्रेरित करते हैं। उनका कहना है कि आपका रक्तदान दूसरों की जिंदगी की डोर मजबूत करता है। खुद की कोशिश से किसी और की जिंदगी मजबूत होने का एहसास परमसुख है।
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किडनी के लिए एक परिवार की पीड़ा देख लिया देहदान का संकल्प
अमरोहा। कौशल कुमार गुप्ता बताते हैं कि 25 वर्ष पूर्व हुई एक घटना ने उन्हें मरणोपरांत देहदान के लिए प्रेरित किया। बताते हैं कि उस वक्त दिल्ली के एक अस्पताल में पिता राजेंद्र कुमार गुप्ता का इलाज करवा रहे थे। वहां उन्होंने एक युवक को बिलखते हुए देखा। पूछने पर पता चला कि उसके पिता की दोनों किडनी खराब हो चुकी हैं। कोशिश के बाद भी किडनी डोनर नहीं मिल पा रहा था। कमजोर आर्थिक स्थिति वाले उस परिवार की पीड़ा देखकर घर लौटते ही मरणोपरांत देहदान का संकल्पपत्र भरकर स्वास्थ्य विभाग को सौंप दिया। इस इरादे से परिजनों को भी अवगत करा दिया। उनका कहना है कि मृत्यु उपरांत उनके शरीर के अधिकतम अंग अधिकतम जरूरतमंदों के काम आ सकें, यही उनकी सोच है।
तीन माह बाद फिर संभव है रक्तदान
चिकित्सकों के मुताबिक कोई भी स्वस्थ व्यक्ति रक्तदान के तीन माह बाद पुन: रक्तदान कर सकता है। रक्तदान से पूर्व कुछ जांचों से यह देख लिया जाता है कि रक्तदाता को कोई बीमारी या संक्रमण तो नहीं है। स्वस्थ होने के साथ 18 वर्ष से 60 वर्ष तक की आयु तक रक्तदान किया जा सकता है। जिला चिकित्सालय के ब्लड बैंक प्रभारी प्रमोद कुमार ने बताया कि पूर्ण स्वस्थ होने और शरीर में रक्त की मात्रा पर्याप्त होने पर 65 वर्ष की आयु तक के लोग स्वैच्छिक रक्तदान कर सकते हैं।