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मूसलाधार बारिश ने रोके डीएम के कदम
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गांव अलीनगर से दारानगर जाने के लिए ट्रेक्टर स्टार्ट करते डीएम उमेश मिश्र।
- फोटो : GAJRAULA
गजरौला (अमरोहा)। नेता अथवा जनप्रतिनिधि बाढ़ के पानी में घिरे गांवों के लोगों का दर्द भले ही न समझें, लेकिन डीएम उमेश मिश्र बाढ़ के पानी की विभीषिका झेल रहे दारानगर के बाशिंदों की परेशानी जानने के लिए अलीनगर में बंधे तक जा पहुंचे और ट्रैक्टर में बैठकर गंगा तक जाने लगे, लेकिन अचानक शुरू हुई झमाझम बारिश के कारण उन्हें मजूबरन लौटना पड़ा। हालांकि डीएम का कहना है कि दारानगर समेत बाढ़ के पानी से घिरे समस्त गांवों के लोगों की सुरक्षा को लेकर प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद है।
मंगलवार को अपरान्ह लगभग दो बजे डीएम उमेश मिश्र पुलिस प्रशासनिक टीम के संग खादर में स्थित गांव अलीनगर पहुंचें। उस वक्त मामूली बारिश हो रही थी। गांव से होकर बंधे की ओर सरकारी वाहनों का काफिला गुजरा तो कई ग्रामीण वहां जा पहुंचे। वहां सरकारी स्कूल के पास डीएम अपनी गाड़ी से उतरे और ग्रामीणों से गंगापार के गांव दारानगर के संबंध में जानकारी ली। इसी दौरान तेज बारिश शुरू हो गई। कुछ ही मिनट में खड़ंजे वाली टूटी-फूटी सड़क पर पानी भर गया। वहां पहले से ही बाढ़ का पानी आया हुआ था। डीएम वहीं खड़े एक ट्रैक्टर पर चालक की सीट पर जा बैठे। उनके संग एएसपी अजय प्रताप सिंह भी सवार हो गए। डीएम ट्रैक्टर लेकर आगे बढ़े ही थे कि अचानक झमाझम बारिश शुरू हो गई। इस पर वहां मौजूद ग्रामीणों ने उनसे अनुरोध किया कि अभी गंगा यहां से काफी दूर है और वहां से भी दारानगर जाने के लिए नाव में सवार होना पड़ेगा। मौसम खराब है और बाढ़ का पानी भी सड़क पर तेजी से बह रहा है। इसलिए आगे ना जाएं। डीएम ने काफी देर रुककर बारिश बंद होने का इंतजार भी किया, लेकिन बारिश और तेज हो गई। इस पर डीएम भीगते हुए ही वहां से लौट आए।
दारानगर और बाढ़ के पानी से घिरे अन्य गांवों के लोगों की सुरक्षा को लेकर प्रशासन पूरी तरह गंभीर है। किसी को भी कोई परेशानी नहीं होने दी जाएगी। -उमेश मिश्र, डीएम
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ग्रामीणों का सुरक्षित जगह जाने से साफ इनकार
गजरौला। बाढ़ के पानी से घिरा होने के बावजूद भी दारानगर के ग्रामीण गांव छोड़कर किसी दूसरी सुरक्षित जगह पर जाने को तैयार नहीं हैं। उन्हें चिंता अपनी भूमि की सता रही है कि कहीं कोई उस पर कब्जा न कर ले। मंगलवार को डीएम उमेश मिश्र के गांव दारानगर पहुंचने के कार्यक्रम की जानकारी होने पर तहसीलदार राकेश कुमार एवं भूमि संरक्षण अधिकारी अवधेश कुमार यादव अपरान्ह के समय ही गांव जा पहुंचे। उस वक्त बारिश नहीं हो रही थी। तहसीलदार ने ग्रामीणों को समझाया कि सुरक्षित स्थानों पर चलें। प्रशासन उनकी मदद को तैयार है, लेकिन ग्रामीणों ने दो टूक कह दिया कि वे गांव छोड़कर कहीं नहीं जाएंगे। इसके पीछे तर्क दिया कि उनके जाने के बाद कोई भी उनकी जमीनों पर कब्जा कर लेगा। हालांकि उन्होंने तहसीलदार से अनुरोध किया कि शेरपुर में बन रहे बंधे को गुलालपुर तक बनवाया जाए। इस पर तहसीलदार ने कहा कि वह डीएम महोदय को अवगत करा देंगे। वहीं तहसीलदार ने गांव में कटान कर रही गंगा के किनारे रेत के कट्टे और पेड़ डलवाए जाने के कार्य का निरीक्षण भी किया।
टीकोवाली, शीशोवाली, जाटोवाली में बिगड़े हालात
गजरौला। रामगंगा पोषक नहर के पार स्थित गंगा में आई बाढ़ के पानी से घिरे गांव टोकोवाली, शीशोवाली, जाटोवाली, ढाकोवाली आदि में बाढ़ का पानी आबादी तक आ पहुंचा है। इससे ग्रामीणों की दुश्वारियां बरकरार हैं। गंगा किनारे स्थित घरों में अंदर तक बाढ़ का पानी आने लगा है। घरों के बाहर स्थित पशुशालाओं में भी पानी भरा हुआ है। इससे पशुओं की सुरक्षा को लेकर भी सवाल खड़ा हो गया है। मंगलवार को हुई झमाझम बारिश और हरिद्वार, बिजनौर बैराज से पौने दो लाख क्यूसेक से अधिक पानी छोड़े जाने की खबर से इन गांवों के लोगों की नींद उड़ चुकी है।
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मंगलवार को अपरान्ह लगभग दो बजे डीएम उमेश मिश्र पुलिस प्रशासनिक टीम के संग खादर में स्थित गांव अलीनगर पहुंचें। उस वक्त मामूली बारिश हो रही थी। गांव से होकर बंधे की ओर सरकारी वाहनों का काफिला गुजरा तो कई ग्रामीण वहां जा पहुंचे। वहां सरकारी स्कूल के पास डीएम अपनी गाड़ी से उतरे और ग्रामीणों से गंगापार के गांव दारानगर के संबंध में जानकारी ली। इसी दौरान तेज बारिश शुरू हो गई। कुछ ही मिनट में खड़ंजे वाली टूटी-फूटी सड़क पर पानी भर गया। वहां पहले से ही बाढ़ का पानी आया हुआ था। डीएम वहीं खड़े एक ट्रैक्टर पर चालक की सीट पर जा बैठे। उनके संग एएसपी अजय प्रताप सिंह भी सवार हो गए। डीएम ट्रैक्टर लेकर आगे बढ़े ही थे कि अचानक झमाझम बारिश शुरू हो गई। इस पर वहां मौजूद ग्रामीणों ने उनसे अनुरोध किया कि अभी गंगा यहां से काफी दूर है और वहां से भी दारानगर जाने के लिए नाव में सवार होना पड़ेगा। मौसम खराब है और बाढ़ का पानी भी सड़क पर तेजी से बह रहा है। इसलिए आगे ना जाएं। डीएम ने काफी देर रुककर बारिश बंद होने का इंतजार भी किया, लेकिन बारिश और तेज हो गई। इस पर डीएम भीगते हुए ही वहां से लौट आए।
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दारानगर और बाढ़ के पानी से घिरे अन्य गांवों के लोगों की सुरक्षा को लेकर प्रशासन पूरी तरह गंभीर है। किसी को भी कोई परेशानी नहीं होने दी जाएगी। -उमेश मिश्र, डीएम
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ग्रामीणों का सुरक्षित जगह जाने से साफ इनकार
गजरौला। बाढ़ के पानी से घिरा होने के बावजूद भी दारानगर के ग्रामीण गांव छोड़कर किसी दूसरी सुरक्षित जगह पर जाने को तैयार नहीं हैं। उन्हें चिंता अपनी भूमि की सता रही है कि कहीं कोई उस पर कब्जा न कर ले। मंगलवार को डीएम उमेश मिश्र के गांव दारानगर पहुंचने के कार्यक्रम की जानकारी होने पर तहसीलदार राकेश कुमार एवं भूमि संरक्षण अधिकारी अवधेश कुमार यादव अपरान्ह के समय ही गांव जा पहुंचे। उस वक्त बारिश नहीं हो रही थी। तहसीलदार ने ग्रामीणों को समझाया कि सुरक्षित स्थानों पर चलें। प्रशासन उनकी मदद को तैयार है, लेकिन ग्रामीणों ने दो टूक कह दिया कि वे गांव छोड़कर कहीं नहीं जाएंगे। इसके पीछे तर्क दिया कि उनके जाने के बाद कोई भी उनकी जमीनों पर कब्जा कर लेगा। हालांकि उन्होंने तहसीलदार से अनुरोध किया कि शेरपुर में बन रहे बंधे को गुलालपुर तक बनवाया जाए। इस पर तहसीलदार ने कहा कि वह डीएम महोदय को अवगत करा देंगे। वहीं तहसीलदार ने गांव में कटान कर रही गंगा के किनारे रेत के कट्टे और पेड़ डलवाए जाने के कार्य का निरीक्षण भी किया।
टीकोवाली, शीशोवाली, जाटोवाली में बिगड़े हालात
गजरौला। रामगंगा पोषक नहर के पार स्थित गंगा में आई बाढ़ के पानी से घिरे गांव टोकोवाली, शीशोवाली, जाटोवाली, ढाकोवाली आदि में बाढ़ का पानी आबादी तक आ पहुंचा है। इससे ग्रामीणों की दुश्वारियां बरकरार हैं। गंगा किनारे स्थित घरों में अंदर तक बाढ़ का पानी आने लगा है। घरों के बाहर स्थित पशुशालाओं में भी पानी भरा हुआ है। इससे पशुओं की सुरक्षा को लेकर भी सवाल खड़ा हो गया है। मंगलवार को हुई झमाझम बारिश और हरिद्वार, बिजनौर बैराज से पौने दो लाख क्यूसेक से अधिक पानी छोड़े जाने की खबर से इन गांवों के लोगों की नींद उड़ चुकी है।