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पूरे कार्यकाल का सांसद निधि खत्म करना मंजूर, लेकिन खर्च संसदीय क्षेत्र में जरुरी
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सांसद निधि खत्म करना मंजूर, लेकिन खर्च संसदीय क्षेत्र में जरूरी
- सर्वदलीय बैठक के पहले कैबिनेट के फैसले पर सांसद दानिश अली का जोरदार हमला
संवाद न्यूज एजेंसी
अमरोहा। बसपा सांसद कुंवर दानिश अली ने केंद्र सरकार की नीयत पर सवाल खड़ा किया है। कहा है कि सर्वदलीय बैठक के बाद सरकार को निर्णय लेना चाहिए, लेकिन सरकार पहले निर्णय लेती है उसके बाद बैठक बुलाती है। उन्होंने कहा कि अब बाकी अवधि का सांसद निधि स्थगित कर दे सरकार, लेकिन उन रुपये से संसदीय क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने में खर्च किया जाए।
पीएम नरेंद्र मोदी ने कोविड 19 के दौरान पीड़ितों को स्वास्थ्य सेवाओं की बेहतरी के लिए सांसद निधि दो साल तक के लिए स्थगित कर दी है इसके अलावा राष्ट्रपति और सांसद के वेतन में 30 फीसदी की कटौती की है। उन्होंने सरकार के इस फैसले पर सवाल उठाया है। कहा कि सरकार संकट के दौरान भी नफा नुकसान का आकलन कर रही है। जो बिल्कुल गलत है। कहा कि सर्वदलीय बैठक होनी वाली है आखिर इतनी कौन सी जल्दी हो गई है कि वेतन और भत्ता में कटौती का ऐलान किया। उन्होंने बताया कि 50 लाख रुपये और एक महीना का वेतन दान कर दिया है। स्वास्थ्य के बुनियादी ढांचे में सुधार के लिए अधिक धनराशि खर्च की जाए। ताकि हम लंबे समय तक कोरोना वायरस और अन्य स्वास्थ्य समस्या से लड़ सकें। उन्होंने कहा कि हैरत की बात है कि जिलेे के सरकारी अस्पताल में एक वेंटिलेटर तक नहीं है। उन्होंने कहा कि सरकार यह सुनिश्चित करें कि जिस क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों ने निधि का हिस्सा दान किया है उनके क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने में खर्च किया जाए।
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- सर्वदलीय बैठक के पहले कैबिनेट के फैसले पर सांसद दानिश अली का जोरदार हमला
संवाद न्यूज एजेंसी
अमरोहा। बसपा सांसद कुंवर दानिश अली ने केंद्र सरकार की नीयत पर सवाल खड़ा किया है। कहा है कि सर्वदलीय बैठक के बाद सरकार को निर्णय लेना चाहिए, लेकिन सरकार पहले निर्णय लेती है उसके बाद बैठक बुलाती है। उन्होंने कहा कि अब बाकी अवधि का सांसद निधि स्थगित कर दे सरकार, लेकिन उन रुपये से संसदीय क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने में खर्च किया जाए।
पीएम नरेंद्र मोदी ने कोविड 19 के दौरान पीड़ितों को स्वास्थ्य सेवाओं की बेहतरी के लिए सांसद निधि दो साल तक के लिए स्थगित कर दी है इसके अलावा राष्ट्रपति और सांसद के वेतन में 30 फीसदी की कटौती की है। उन्होंने सरकार के इस फैसले पर सवाल उठाया है। कहा कि सरकार संकट के दौरान भी नफा नुकसान का आकलन कर रही है। जो बिल्कुल गलत है। कहा कि सर्वदलीय बैठक होनी वाली है आखिर इतनी कौन सी जल्दी हो गई है कि वेतन और भत्ता में कटौती का ऐलान किया। उन्होंने बताया कि 50 लाख रुपये और एक महीना का वेतन दान कर दिया है। स्वास्थ्य के बुनियादी ढांचे में सुधार के लिए अधिक धनराशि खर्च की जाए। ताकि हम लंबे समय तक कोरोना वायरस और अन्य स्वास्थ्य समस्या से लड़ सकें। उन्होंने कहा कि हैरत की बात है कि जिलेे के सरकारी अस्पताल में एक वेंटिलेटर तक नहीं है। उन्होंने कहा कि सरकार यह सुनिश्चित करें कि जिस क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों ने निधि का हिस्सा दान किया है उनके क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने में खर्च किया जाए।
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