{"_id":"62f157024ebc826257243c6d","slug":"amroha-cultural-hasanpur-news-mbd4372705140","type":"story","status":"publish","title_hn":"नौ मोहर्रम पर अजरत अली अकबर का शबीहे ताबूत बरामद","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
नौ मोहर्रम पर अजरत अली अकबर का शबीहे ताबूत बरामद
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सैदनगली। कस्बे के मोहल्ला सादात मे नौ मोहर्रम पर तनवीर अब्बास के मकान से हजरत अली अकबर अलैहिस्सलाम का शबीहे ताबूत व अलम बरामद हुआ।
पहले पीर जी इमामबारगाह में मजलिस हुई। जिसमें सोज खुवानी नसीमुल हसन और हमनवा ने की। मजलिस को खिताब करते हुए मास्टर कम्बर रजा ने कहा कि हजरत अली अकबर मौला हुसैन के बेटे थे जो रसूल अल्लाह की शबीह थे। हमशकले पयम्बर थे। हजरत हुसैन को जब भी अपने नाना रसूले खुदा की ज्यारत करना होती थी तो अपने बेटे अली अकबर को देख लेते थे।
अफसोस जालिमों ने अली अकबर को शहीद कर दिया। शहादत सुनकर अजादार फफक कर रोये और मातम बरपा हो गया। नोहे मोहम्मद अब्बास, मिसाल अब्बास आदि ने पढ़े इस मौके पर काफी तादाद में अजादार मौजूद रहे। इसके अलावा रोज की तरह सभी स्थानीय इमामबारगाहों मे मजलिसों का सिलसिला जारी रहा।
विज्ञापन
पहले पीर जी इमामबारगाह में मजलिस हुई। जिसमें सोज खुवानी नसीमुल हसन और हमनवा ने की। मजलिस को खिताब करते हुए मास्टर कम्बर रजा ने कहा कि हजरत अली अकबर मौला हुसैन के बेटे थे जो रसूल अल्लाह की शबीह थे। हमशकले पयम्बर थे। हजरत हुसैन को जब भी अपने नाना रसूले खुदा की ज्यारत करना होती थी तो अपने बेटे अली अकबर को देख लेते थे।
अफसोस जालिमों ने अली अकबर को शहीद कर दिया। शहादत सुनकर अजादार फफक कर रोये और मातम बरपा हो गया। नोहे मोहम्मद अब्बास, मिसाल अब्बास आदि ने पढ़े इस मौके पर काफी तादाद में अजादार मौजूद रहे। इसके अलावा रोज की तरह सभी स्थानीय इमामबारगाहों मे मजलिसों का सिलसिला जारी रहा।
विज्ञापन