{"_id":"62f159d4c1654c4a8f175bfa","slug":"amroha-civic-jpnagar-news-mbd4372714134","type":"story","status":"publish","title_hn":"ट्यूबवेलों पर मीटर लगाने के विरोध में भाकियू असली का प्रदर्शन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
ट्यूबवेलों पर मीटर लगाने के विरोध में भाकियू असली का प्रदर्शन
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अमरोहा। किसानों के ट्यूबवेल पर बिजली मीटर लगाने और बिजली संशोधन बिल 2022 के विरोध में भाकियू असली के पदाधिकारियों ने विरोध प्रदर्शन किया। बिजली घरों का घेराव कर केंद्र सरकार व प्रदेश सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन विभिन्न अफसरों को सौंपकर जल्द समस्याओं का समाधान नहीं होने पर सड़कों पर उतरकर उग्र आंदोलन करने की चेतावनी दी।
सोमवार को भारतीय किसान यूनियन असली के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी सुरेंद्र सिंह के नेतृत्व में तमाम पदाधिकारी सोमवार को एसई कार्यालय पर एकत्र हुए। वहीं जिलाध्यक्ष महावीर सिंह के नेतृत्व में रजबपुर, अनिल कुमार के नेतृत्व में मुंडाखेड़ा, युवा जिला अध्यक्ष राधेश्याम के नेतृत्व में गजरौला, कलुआ खां के नेतृत्व में चुचैला कलां, नरेश कुमार के नेतृत्व में कुआंखेड़ा, डूंगर सिंह के नेतृत्व में आजमपुर और हसनपुर में समरपाल सिंह के नेतृत्व में पदाधिकारी एकत्र हुए। यहां किसानों ने केंद्र और प्रदेश सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।
संबंधित अधिकारियों को ज्ञापन सौंपकर बताया कि केंद्र सरकार ने आंदोलन के दौरान किसानों के संगठनों के साथ एक समझौता किया गया था। जिसमें वायदा किया गया था कि जब भी सरकार बिजली संशोधन बिल संसद में लाएगी वह किसान संगठनों के साथ वार्ता करेगी। इसके बाद ही बिल पेश किया जाएगा। जबकि जानकारी मिल रही है कि सरकार वर्तमान सत्र में ये बिल पेश करने वाली है। उत्तर प्रदेश किसानों के निजी नलकूपों पर बिजली मीटर लगाए जा रहे हैं। जबकि वर्तमान मुख्यमंत्री ने चुनाव के दौरान किसानों को सिंचाई के लिए नि:शुल्क बिजली देेने का वादा किया था।
विज्ञापन
किसानों ने कहा कि बिजली संशोधन बिल 2022 के आने के बाद किसानों को दी जाने वाली बिजली पर सब्सिडी खत्म हो जाएगी। साथ ही 9.10 रुपये प्रति यूनिट के हिसाब से किसानों को हर महीने 10 हजार रुपये तक का बिजली बिल भुगतान करना पड़ेगा। सरकार द्वारा बिजली बोर्ड का निजीकरण किया जाएगा, जिससे किसानों के लिए खेती करना महंगा सौदा हो जाएगा। किसानों के नलकूपों से बिजली मीटर न हटाने और बिजली कर्मचारी व जनता विरोधी बिजली संशोधन बिल को लाने का कुप्रयास करने पर किसानों के पास सड़कों पर उतरकर आंदोलन करने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचेगा।
इसकी जिम्मेदारी सरकार की होगी। एसई कार्यालय पर चौधरी राजवीर सिंह, मंडल प्रभारी चौधरी जयकीरत सिंह, राजीव, रघुवीर सिंह, देवराज सिंह, प्रीतम सिंह, अनिल कुमार, संजीव, रघुराज, महिपाल, सतपाल, जगवीर सिंह आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन
सोमवार को भारतीय किसान यूनियन असली के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी सुरेंद्र सिंह के नेतृत्व में तमाम पदाधिकारी सोमवार को एसई कार्यालय पर एकत्र हुए। वहीं जिलाध्यक्ष महावीर सिंह के नेतृत्व में रजबपुर, अनिल कुमार के नेतृत्व में मुंडाखेड़ा, युवा जिला अध्यक्ष राधेश्याम के नेतृत्व में गजरौला, कलुआ खां के नेतृत्व में चुचैला कलां, नरेश कुमार के नेतृत्व में कुआंखेड़ा, डूंगर सिंह के नेतृत्व में आजमपुर और हसनपुर में समरपाल सिंह के नेतृत्व में पदाधिकारी एकत्र हुए। यहां किसानों ने केंद्र और प्रदेश सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।
विज्ञापन
संबंधित अधिकारियों को ज्ञापन सौंपकर बताया कि केंद्र सरकार ने आंदोलन के दौरान किसानों के संगठनों के साथ एक समझौता किया गया था। जिसमें वायदा किया गया था कि जब भी सरकार बिजली संशोधन बिल संसद में लाएगी वह किसान संगठनों के साथ वार्ता करेगी। इसके बाद ही बिल पेश किया जाएगा। जबकि जानकारी मिल रही है कि सरकार वर्तमान सत्र में ये बिल पेश करने वाली है। उत्तर प्रदेश किसानों के निजी नलकूपों पर बिजली मीटर लगाए जा रहे हैं। जबकि वर्तमान मुख्यमंत्री ने चुनाव के दौरान किसानों को सिंचाई के लिए नि:शुल्क बिजली देेने का वादा किया था।
विज्ञापन
किसानों ने कहा कि बिजली संशोधन बिल 2022 के आने के बाद किसानों को दी जाने वाली बिजली पर सब्सिडी खत्म हो जाएगी। साथ ही 9.10 रुपये प्रति यूनिट के हिसाब से किसानों को हर महीने 10 हजार रुपये तक का बिजली बिल भुगतान करना पड़ेगा। सरकार द्वारा बिजली बोर्ड का निजीकरण किया जाएगा, जिससे किसानों के लिए खेती करना महंगा सौदा हो जाएगा। किसानों के नलकूपों से बिजली मीटर न हटाने और बिजली कर्मचारी व जनता विरोधी बिजली संशोधन बिल को लाने का कुप्रयास करने पर किसानों के पास सड़कों पर उतरकर आंदोलन करने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचेगा।
इसकी जिम्मेदारी सरकार की होगी। एसई कार्यालय पर चौधरी राजवीर सिंह, मंडल प्रभारी चौधरी जयकीरत सिंह, राजीव, रघुवीर सिंह, देवराज सिंह, प्रीतम सिंह, अनिल कुमार, संजीव, रघुराज, महिपाल, सतपाल, जगवीर सिंह आदि मौजूद रहे।