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Amroha News: बाजार में मिल रहा मिलावटी बेसर, पनीर में भी फैट कम
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अमरोहा। बाजार में बिकने वाले खाद्य पदार्थों में मिलावट कर लोगों की सेहत से खिलवाड़ किया जा रहा है। दूध में पानी तो बेसन में मटर की मिलावट कर लोगों को गुमराह किया जा रहा है। वहीं, पनीर में फैट की मात्रा भी कम पाई है। त्योहारी मौकों व रूटीन कार्रवाई के तहत खाद्य सुरक्षा विभाग द्वारा लिए गए नमूने जांच में फेल होने के बाद एडीएम कोर्ट में वाद दायर किया गया था जिसमें कोर्ट ने छह मामलों में चार लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। जांच में बेसन, दूध, पनीर व धनिये का नमूना जांच में अधोमानक पाए जाने के बाद यह कार्रवाई की गई है।
खाने-पीने की चीजों में मिलावटखोरी पर अंकुश लगाने के लिए खाद्य सुरक्षा विभाग द्वारा समय-समय पर छापामार कार्रवाई कर नमूने लेकर जांच के लिए भेजे जाते हैं। रिपोर्ट आने के बाद नमूनों में मिलावट मिलने पर खाद्य सुरक्षा विभाग एडीएम कोर्ट में वाद दायर करने की कार्रवाई करता है। जहां सुनवाई के बाद मिलावट का कारोबार करने वाले लोगों पर जुर्माने की कार्रवाई की जाती है।
जुर्माना अदा न करने की स्थिति में आरसी जारी कर जुर्माने की रकम को वसूल किया जाता है। मई व जुलाई माह में दायर किए गए वाद में एडीएम वित्त व राजस्व गरिमा सिंह की कोर्ट ने सभी छह मामलों में जुर्माने की कार्रवाई की है। जुर्माना अदा न करने पर आरसी जारी करने की चेतावनी भी दी गई है।
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नमूने फेल होने पर दो प्रकार से होती है कार्रवाई
जांच के लिए भेजे जाने वाले नमूने दो प्रकार से फेल होते हैं। एक वह जिनमें कोई ऐसी मिलावट तो नहीं होती लेकिन वह शरीर के लिए हानिकारक होते हैं। इन्हें अधोमानक कहा जाता है। इनके लिए अपर जिलाधिकारी न्यायालय में मुकदमा दायर किया जाता है। दूसरे वह नमूने वे फेल होते हैं जिनमें की गई मिलावट शरीर के लिए हानिकारक होते हैं। ऐसे मामले हानिकारक की श्रेणी में आते हैं। इनके लिए एसीजेएम न्यायालय में मुकदमा दायर किया जाता है।
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यह हुई थी मिलावट
दूध में पानी की मात्रा अधिक होने, पनीर में दूध वसा की मात्रा कम होने, क्रीम में फैट की मात्रा व होने व बेसन में मटर की मिलावट होने पर नमूने अधोमानक पाए गए हैं। वहीं धनिया का नमूना भी अधोमानक पाया गया है। इसके साथ ही बिना पंजीकरण कार्य करने पर भी जुर्माना लगाया गया है।
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किस पर कितना जुर्माना
विक्रेता का नाम - नमूना - जुर्माना
सतीश चंद्र - मिश्रित दूध - 30000
सतीश चंद्र - क्रीम - 30000
मोहम्मद फुरकान - धनिया पाउडर - 10000
प्रवीन कुमार - बेसन - 30000
शाहनवाज - मिश्रित दूध - 100000
शाहनवाज - पनीर - 200000
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जो भी नमूने जांच में अधोमानक पाए जाते हैं वे सुनवाई के लिए अपर जिलाधिकारी न्यायालय में दायर किए जाते हैं। ऐसे ही छह मामलों में सुनवाई के बाद अपर जिलाधिकारी ने चार लाख रुपये का जुर्माना लगाया है।- विनय कुमार, सहायक आयुक्त खाद्य सुरक्षा
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खाने-पीने की चीजों में मिलावटखोरी पर अंकुश लगाने के लिए खाद्य सुरक्षा विभाग द्वारा समय-समय पर छापामार कार्रवाई कर नमूने लेकर जांच के लिए भेजे जाते हैं। रिपोर्ट आने के बाद नमूनों में मिलावट मिलने पर खाद्य सुरक्षा विभाग एडीएम कोर्ट में वाद दायर करने की कार्रवाई करता है। जहां सुनवाई के बाद मिलावट का कारोबार करने वाले लोगों पर जुर्माने की कार्रवाई की जाती है।
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जुर्माना अदा न करने की स्थिति में आरसी जारी कर जुर्माने की रकम को वसूल किया जाता है। मई व जुलाई माह में दायर किए गए वाद में एडीएम वित्त व राजस्व गरिमा सिंह की कोर्ट ने सभी छह मामलों में जुर्माने की कार्रवाई की है। जुर्माना अदा न करने पर आरसी जारी करने की चेतावनी भी दी गई है।
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नमूने फेल होने पर दो प्रकार से होती है कार्रवाई
जांच के लिए भेजे जाने वाले नमूने दो प्रकार से फेल होते हैं। एक वह जिनमें कोई ऐसी मिलावट तो नहीं होती लेकिन वह शरीर के लिए हानिकारक होते हैं। इन्हें अधोमानक कहा जाता है। इनके लिए अपर जिलाधिकारी न्यायालय में मुकदमा दायर किया जाता है। दूसरे वह नमूने वे फेल होते हैं जिनमें की गई मिलावट शरीर के लिए हानिकारक होते हैं। ऐसे मामले हानिकारक की श्रेणी में आते हैं। इनके लिए एसीजेएम न्यायालय में मुकदमा दायर किया जाता है।
यह हुई थी मिलावट
दूध में पानी की मात्रा अधिक होने, पनीर में दूध वसा की मात्रा कम होने, क्रीम में फैट की मात्रा व होने व बेसन में मटर की मिलावट होने पर नमूने अधोमानक पाए गए हैं। वहीं धनिया का नमूना भी अधोमानक पाया गया है। इसके साथ ही बिना पंजीकरण कार्य करने पर भी जुर्माना लगाया गया है।
किस पर कितना जुर्माना
विक्रेता का नाम - नमूना - जुर्माना
सतीश चंद्र - मिश्रित दूध - 30000
सतीश चंद्र - क्रीम - 30000
मोहम्मद फुरकान - धनिया पाउडर - 10000
प्रवीन कुमार - बेसन - 30000
शाहनवाज - मिश्रित दूध - 100000
शाहनवाज - पनीर - 200000
जो भी नमूने जांच में अधोमानक पाए जाते हैं वे सुनवाई के लिए अपर जिलाधिकारी न्यायालय में दायर किए जाते हैं। ऐसे ही छह मामलों में सुनवाई के बाद अपर जिलाधिकारी ने चार लाख रुपये का जुर्माना लगाया है।- विनय कुमार, सहायक आयुक्त खाद्य सुरक्षा