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Amroha News: मंदिरों में उमड़ा आस्था का सैलाब, गूंजे जयकारे

Mon, 31 Mar 2025 02:23 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, अमरोहा
संवाद न्यूज एजेंसी, अमरोहा Updated Mon, 31 Mar 2025 02:23 AM IST
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A flood of faith surged in the temples, cheers resounded
अमरोहा।
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चैत्र नवरात्र के साथ ही हिंदू नववर्ष की शुरुआत भी हो गई। माता की पूजा के लिए सुबह से ही मंदिरों में भक्तों सलाब उमड़ पड़ा। मंदिरों के बाहर कतारें लग गईं। दिनभर जिलेभर के प्रमुख देवी मंदिरों में माता के जयकारे गूंजते रहे। श्रद्धालुओं ने विधिविधान से माता का पूजन कर परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की।
नवरात्र के पहले दिन रविवार भोर होत ही श्रद्धालु माता के मंदिरों में पहुंचना शुरू हो गए थे। भक्तों ने पहले दिन मां शैलपुत्री देवी का पूजन कर परिवार खुशहाली की कामना की। उधर, सुबह से ही मंदिरों में माता के जयकारे और घंटियां गूंजने लगी। जिससे वातावरण भक्तिमय हो गया। देवी के मंदिर सुबह शुरू हुआ पूजा का दौर दोपहर तक जारी रहा। वहीं शाम तक मंदिरों में भजन-कीर्तन का दौर चला, जिसमें महिलाओं ने देवी मां का गुणगान किया। नगर के मोहल्ला कोट स्थित रियासत वाला मंदिर, बाबा गंगानाथ मंदिर, श्री वासुदेव तीर्थ, चौरासी घंटा मंदिर, शिव शक्ति मंदिर में सुबह से ही श्रद्धालुओं की कतारें लगी रहीं। भक्त मां के दर्शन के लिए अपने नंबर का इंतजार करते रहे।
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घरों में कलश स्थापित कर की पूजा-अर्चना
अमरोहा। नवरात्र के पहले दिन भक्तों ने माता के पहले स्वरूप मां शैलपुत्री का पूजन किया गया। कई जगह हवन में आहुतियां देकर परिवार के कल्याण की कामना की गई। दिनभर घरों से लेकर मंदिरों तक मां का पूजन जारी रहा। शाम के समय मंदिरों में महिला श्रद्धालुओं ने भजन-कीर्तन किए, जिससे वातावरण भक्तिमय हो गया।
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भक्तों ने रविवार सुबह स्नान कर घरों में शुभ मुहूर्त में कलश स्थापित किया और देवी मां का दरबार सजाया। इसके बाद परिवार सहित देवी मां की आराधना की। नवरात्र का पर्व मां दुर्गा को समर्पित है। इसमें मां दुर्गा के नौ स्वरूप की पूजा की जाती है। इस बार दो तिथि एक साथ होने के कारण आठ नवरात्र होंगे। रविवार को मां शैलपुत्री के पूजन के साथ नवरात्र शुरू हो गए। पर्वतराज हिमालय की पुत्री रूप में उत्पन्न होने के कारण इनका नाम शैलपुत्री रखा गया। पूर्व जन्म में ये प्रजापति दक्ष की कन्या थी, तब इनका नाम सती था। माता शैलपुत्री का वाहन वृषभ (बैल) है, इसलिए इन्हें वृषभारूढ़ा भी कहा जाता है।


माता के इस स्वरूप की पूजा करने से मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है और सभी दोष दूर होते हैं। दिनभर घरों से लेकर मंदिरों तक पूजा का दौर जारी रहा। वहीं, शाम के समय मंदिरों और कई घरों में महिलाओं ने भजन-कीर्तन भी किए। वहीं, हिंदू नर्ववर्ष शुरू होने पर जगह-जगह कार्यक्रम आयोजित किए गए। कहीं हवन किया गया तो कहीं भजन कीर्तन का दौर चला।
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