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Amroha News: अपार आईडी बनाने में लापरवाही पर 933 स्कूल-मदरसे रडार पर, नोटिस
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अमरोहा। यू-डायस प्लस पोर्टल पर सत्र 2026-27 का डाटा फीड करने और अपार आईडी जनरेट करने में जिले के कई स्कूलों व मदरसों की लापरवाही सामने आई है। चार माह से चल रहे कार्य के बावजूद बड़ी संख्या में विद्यार्थियों की अपार आईडी नहीं बनी है। बीएसए ने संबंधित संस्थानों को सात दिन में कार्य शत-प्रतिशत पूरा करने के निर्देश दिए हैं। दोबारा नोटिस जारी करते हुए चेतावनी दी गई है कि लापरवाही जारी रहने पर मान्यता प्रत्याहरण और यू-डायस कोड निरस्त करने की कार्रवाई की जाएगी।
जिले के 3002 विद्यालयों और मदरसों में कक्षा एक से 12 तक के विद्यार्थियों का डाटा अपलोड किया जा रहा है। 486 मदरसों के 23680 विद्यार्थियों में 10070 (43 प्रतिशत), बेसिक शिक्षा विभाग से मान्यता प्राप्त 808 विद्यालयों के 99169 में 44449 (45 प्रतिशत), 355 मान्यता प्राप्त इंटर कॉलेजों के 128892 में 71245 (55 प्रतिशत) और 54 सहायता प्राप्त विद्यालयों के 25690 में 19824 (78 प्रतिशत) की अपार आईडी बन चुकी है। परिषदीय विद्यालयों की स्थिति बेहतर है। 1266 विद्यालयों के 79163 विद्यार्थियों में 68171 (86 प्रतिशत) की आईडी जनरेट हो चुकी है।
अपार आईडी में लापरवाही पर 559 मान्यता प्राप्त विद्यालयों और 374 मदरसों को तीन अगस्त को नोटिस दिया गया था। जिला समन्वयक प्रशांत कुमार ने बताया कि अपार आईडी बनने से शैक्षिक अभिलेख व प्रमाणपत्र डिजिटल रूप में सुरक्षित रहते हैं और डीजीलॉकर से आसानी से उपलब्ध होते हैं। स्कूल या कॉलेज बदलने पर शैक्षिक क्रेडिट स्थानांतरित करने में भी सुविधा मिलती है।
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जिले के 3002 विद्यालयों और मदरसों में कक्षा एक से 12 तक के विद्यार्थियों का डाटा अपलोड किया जा रहा है। 486 मदरसों के 23680 विद्यार्थियों में 10070 (43 प्रतिशत), बेसिक शिक्षा विभाग से मान्यता प्राप्त 808 विद्यालयों के 99169 में 44449 (45 प्रतिशत), 355 मान्यता प्राप्त इंटर कॉलेजों के 128892 में 71245 (55 प्रतिशत) और 54 सहायता प्राप्त विद्यालयों के 25690 में 19824 (78 प्रतिशत) की अपार आईडी बन चुकी है। परिषदीय विद्यालयों की स्थिति बेहतर है। 1266 विद्यालयों के 79163 विद्यार्थियों में 68171 (86 प्रतिशत) की आईडी जनरेट हो चुकी है।
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अपार आईडी में लापरवाही पर 559 मान्यता प्राप्त विद्यालयों और 374 मदरसों को तीन अगस्त को नोटिस दिया गया था। जिला समन्वयक प्रशांत कुमार ने बताया कि अपार आईडी बनने से शैक्षिक अभिलेख व प्रमाणपत्र डिजिटल रूप में सुरक्षित रहते हैं और डीजीलॉकर से आसानी से उपलब्ध होते हैं। स्कूल या कॉलेज बदलने पर शैक्षिक क्रेडिट स्थानांतरित करने में भी सुविधा मिलती है।
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