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Amroha News: शहर में 45 भवन जर्जर, बरसात में ढहने का खतरा
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अमरोहा। बरसात का मौसम उन भवनों के लिए खतरा बन रहा है, जो गिराऊ हालत में हैं। अमरोहा शहर में करीब 45 ऐसे भवन हैं, जिनसे इन भवनों में रह रहे और आसपास के लोगों के जीवन को खतरा बना हुआ है।
अमरोहा शहर में बरसात शुरू होने से पहले ही पालिका की ओर से भवन मालिकों को नोटिस दिए गए हैं, जबकि नौगांवा सादात में जर्जर भवनों को चिह्नित करने का काम किया जा रहा है। मंडी धनौरा, बछरायूं, हसनपुर, जोया, उझारी, सैदनगली और गजरौला पालिका के अफसरों ने उनके शहर में जर्जर भवन होने से ही इन्कार कर दिया है। हालांकि, पालिका की ओर से इन भवनों के मालिकों को नोटिस तो जारी किया जाता है, लेकिन इससे आगे कार्रवाई नहीं बढ़ पाती। जिम्मेदारों को जर्जर भवन के ध्वस्तीकरण की बजाय किसी बड़े हादसे का इंतजार है। पहले भी जिले में जर्जर भवन और दीवारें गिरने की घटनाएं किसी से छिपी नहीं हैं।
अमरोहा शहर की बात करें तो चिह्नित किए गए जर्जर भवनों की सबसे ज्यादा संख्या मोहल्ला कुरेशी में है। यहां सात भवन खस्ताहाल है। इसके अलावा बाजार रज्जाक में तीन, लकड़ा और घेर पच्छैया में एक-एक, मंडी चौक में दो, कूचा खत्रियान, मोहल्ला चौक, राजू सराय, शफातपोता, मोहल्ला सद्दो, शाही चबूतरा, बगला, नौबतखाना और मोहल्ला कोट में भी जर्जर भवन है।
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खर्च मकान मालिक देता
नगर पालिका जर्जर भवनों को गिराने का खर्च मकान मालिक से ही लेता है। इसलिए इस पर कार्रवाई आगे नहीं बढ़ पाती है। वहीं, कई मामलों में किराएदारी विवाद भी कोर्ट में हैं। इसलिए कार्रवाई नही हो पाती है।
कब्जा नहीं छोड़ना चाहते लोग
शहर से लेकर गांवों तक में जर्जर भवनों के कई मामले अदालतों भी चल रहे हैं। किसी मकान में किराएदार ने कब्जा कर रखा है, तो कई मकानों पर अधिकार को लेकर परिवारों में भी विवाद है, लेकिन बड़ी संख्या में ऐसे भवन भी हैं, जिनका किसी तरह का विवाद नहीं है।
जर्जर भवनों खाली कराने के लिए समय-समय पर नोटिस दिए जाते हैं। पिछले सालों में कई भवनों को खाली और ध्वस्त भी कराया गया है। ऐसे भवनों को ठीक कराने या फिर खाली करने को लोगों को जागरूक भी किया जाता है। प्रशासन का प्रयास रहता है कि किसी तरह का हादसा न हो। - डॉ. बृजेश सिंह, ईओ, अमरोहा
ईंट से बने छत की उम्र 50 वर्ष अनुमानित
जानकारों का कहना है कि शहर में अधिकतर जर्जर भवनों के छत ईंट से बने हैं। जिसकी उम्र 50 वर्ष मानी जाती है, जबकि आरसीसी छत की उम्र करीब 90 वर्ष। घनी आबादी के बीच जर्जर हालत में इन भवनों में रहना खतरनाक है। कई छह से नौ दशक पुराने भवन हैं, जो खंडहर में तब्दील हो चुके हैं।
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अमरोहा शहर में बरसात शुरू होने से पहले ही पालिका की ओर से भवन मालिकों को नोटिस दिए गए हैं, जबकि नौगांवा सादात में जर्जर भवनों को चिह्नित करने का काम किया जा रहा है। मंडी धनौरा, बछरायूं, हसनपुर, जोया, उझारी, सैदनगली और गजरौला पालिका के अफसरों ने उनके शहर में जर्जर भवन होने से ही इन्कार कर दिया है। हालांकि, पालिका की ओर से इन भवनों के मालिकों को नोटिस तो जारी किया जाता है, लेकिन इससे आगे कार्रवाई नहीं बढ़ पाती। जिम्मेदारों को जर्जर भवन के ध्वस्तीकरण की बजाय किसी बड़े हादसे का इंतजार है। पहले भी जिले में जर्जर भवन और दीवारें गिरने की घटनाएं किसी से छिपी नहीं हैं।
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अमरोहा शहर की बात करें तो चिह्नित किए गए जर्जर भवनों की सबसे ज्यादा संख्या मोहल्ला कुरेशी में है। यहां सात भवन खस्ताहाल है। इसके अलावा बाजार रज्जाक में तीन, लकड़ा और घेर पच्छैया में एक-एक, मंडी चौक में दो, कूचा खत्रियान, मोहल्ला चौक, राजू सराय, शफातपोता, मोहल्ला सद्दो, शाही चबूतरा, बगला, नौबतखाना और मोहल्ला कोट में भी जर्जर भवन है।
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खर्च मकान मालिक देता
नगर पालिका जर्जर भवनों को गिराने का खर्च मकान मालिक से ही लेता है। इसलिए इस पर कार्रवाई आगे नहीं बढ़ पाती है। वहीं, कई मामलों में किराएदारी विवाद भी कोर्ट में हैं। इसलिए कार्रवाई नही हो पाती है।
कब्जा नहीं छोड़ना चाहते लोग
शहर से लेकर गांवों तक में जर्जर भवनों के कई मामले अदालतों भी चल रहे हैं। किसी मकान में किराएदार ने कब्जा कर रखा है, तो कई मकानों पर अधिकार को लेकर परिवारों में भी विवाद है, लेकिन बड़ी संख्या में ऐसे भवन भी हैं, जिनका किसी तरह का विवाद नहीं है।
जर्जर भवनों खाली कराने के लिए समय-समय पर नोटिस दिए जाते हैं। पिछले सालों में कई भवनों को खाली और ध्वस्त भी कराया गया है। ऐसे भवनों को ठीक कराने या फिर खाली करने को लोगों को जागरूक भी किया जाता है। प्रशासन का प्रयास रहता है कि किसी तरह का हादसा न हो। - डॉ. बृजेश सिंह, ईओ, अमरोहा
ईंट से बने छत की उम्र 50 वर्ष अनुमानित
जानकारों का कहना है कि शहर में अधिकतर जर्जर भवनों के छत ईंट से बने हैं। जिसकी उम्र 50 वर्ष मानी जाती है, जबकि आरसीसी छत की उम्र करीब 90 वर्ष। घनी आबादी के बीच जर्जर हालत में इन भवनों में रहना खतरनाक है। कई छह से नौ दशक पुराने भवन हैं, जो खंडहर में तब्दील हो चुके हैं।