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जिले के 2560 हैंडपंपों के सूखे हलक
ब्यूरो अमर उजाला/अमरोहा।
Updated Wed, 20 Jun 2018 01:44 AM IST
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सूख्ाे हैंडपंप
- फोटो : अमर उजाला
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जिले भर के गांव देहात में लगे 2560 इंडिया मार्का हैंडपंपों से पानी नहीं निकल रहा है। जिसके चलते करीब 25 हजार परिवार परेशान हैं। भयंकर गर्मी में भी इन हैंडपंपों को ठीक नहीं कराया गया जबकि, बरसात लगने को हो गई है।
अमरोहा के सभी गांव देेहात में कुल 20143 इंडिया मार्का हैंडपंप लगे हुए हैं। पिछले दिनों ही इनकी हालत पर एक रिपोर्ट तैयार हुई। जिसमें ढाई हजार हैंडपंप खराब पाए गए। मामूली कमियों के चलते दो हजार नल खराब पड़े हुए थे। जिनमें से केवल 810 को ठीक कराया गया। अभी भी 1240 हैंडपंप मामूली कर्मियों के चलते खराब पड़े हुए हैं। इसके अलावा 1570 हैंडपंपों को रिबोर कराया था लेकिन, 250 का ही रिबोर कराया जा सका। फिलहाल ढाई हजार हैंडपंप अभी भी ठीक होने की बाट जोह रहे हैं।
उधर गर्मी की शुरुआत से पहले ही लोग हैंडपंपों की मरम्मत कराने के लिए गुहार लगाने लगे थे। अफसरों के पास भी काफी शिकायतें हैंडपंपों को ठीक कराने की मांग को लेकर ही आती है। इसके बाद भी ग्राम पंचायतें हैंडपंपों की मरम्मत से मुंह मोड़ रही है। इन हैंडपंपों का मामूली औसत भी निकाला जाए तो करीब पच्चीस परिवारों को परेशानी उठानी पड़ रही है। इन्हें दूर से पानी लाना पड़ रहा है। गौरतलब है कि गर्मी के तीन महीने बीत चुके हैं।
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अब बरसात लगने वाली है। गर्मी में लोगों को पानी की ज्यादा जरुरत होती है। जरुरतों के लिहाज से भी हैंडपंपों को ठीक नहीं कराया जाना। पंचायतों की मंशा पर सवाल खड़े कर रहा है।
यह हाल तब है कि जब सरकारे पंचायतों को भारी भरकम रुपया देती है। इसके बाद भी लोगों की समस्याएं जस की तस बनी हुई है। सूत्रों की मानें तो पंचायतों में काफी हैंडपंप तो कागजों में ही ठीक कर दिए जाते हैं।
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अमरोहा के सभी गांव देेहात में कुल 20143 इंडिया मार्का हैंडपंप लगे हुए हैं। पिछले दिनों ही इनकी हालत पर एक रिपोर्ट तैयार हुई। जिसमें ढाई हजार हैंडपंप खराब पाए गए। मामूली कमियों के चलते दो हजार नल खराब पड़े हुए थे। जिनमें से केवल 810 को ठीक कराया गया। अभी भी 1240 हैंडपंप मामूली कर्मियों के चलते खराब पड़े हुए हैं। इसके अलावा 1570 हैंडपंपों को रिबोर कराया था लेकिन, 250 का ही रिबोर कराया जा सका। फिलहाल ढाई हजार हैंडपंप अभी भी ठीक होने की बाट जोह रहे हैं।
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उधर गर्मी की शुरुआत से पहले ही लोग हैंडपंपों की मरम्मत कराने के लिए गुहार लगाने लगे थे। अफसरों के पास भी काफी शिकायतें हैंडपंपों को ठीक कराने की मांग को लेकर ही आती है। इसके बाद भी ग्राम पंचायतें हैंडपंपों की मरम्मत से मुंह मोड़ रही है। इन हैंडपंपों का मामूली औसत भी निकाला जाए तो करीब पच्चीस परिवारों को परेशानी उठानी पड़ रही है। इन्हें दूर से पानी लाना पड़ रहा है। गौरतलब है कि गर्मी के तीन महीने बीत चुके हैं।
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अब बरसात लगने वाली है। गर्मी में लोगों को पानी की ज्यादा जरुरत होती है। जरुरतों के लिहाज से भी हैंडपंपों को ठीक नहीं कराया जाना। पंचायतों की मंशा पर सवाल खड़े कर रहा है।
यह हाल तब है कि जब सरकारे पंचायतों को भारी भरकम रुपया देती है। इसके बाद भी लोगों की समस्याएं जस की तस बनी हुई है। सूत्रों की मानें तो पंचायतों में काफी हैंडपंप तो कागजों में ही ठीक कर दिए जाते हैं।