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महरपुर गुर्जर में बीमारी से 12 पशुओं की मौत
ब्यूरो/अमर उजाला अमरोहा
Updated Mon, 24 Oct 2016 11:54 PM IST
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- फोटो : demo
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हसनपुर तहसील क्षेत्र के महरपुर गुर्जर गांव में बीमारी से 12 पशुओं की मौत हो गई। इतने ही बीमारी के चलते जिंदगी मौत के बीच झूल रहे हैं। ग्रामीणों की सूचना पर पशु चिकित्सा विभाग से पहुंचे स्टाफ ने बीमार पशुओं का उपचार करने की बजाय पशु पालकों को मेडिकल स्टोर से दवाई लाकर खिलाने की सलाह दी और गांव से रवाना हो गए। इससे ग्रामीणों में रोष है।
हसनपुर तहसील क्षेत्र के महरपुर गुर्जर गांव निवासी अजीत सिंह ने कई दिन पूर्व पशुओं को लाकर गलती से कनेर के पत्ते खिला दिए थे। यह देख पड़ोसी महकार सिंह ने भी कनेर के पत्ते चारे में काट दिए। चारा खिलाने के कुछ घंटे बाद पशुओं की हालत बिगड़ गई। पशु चिकित्सक को उपचार के लिए बुलाया। उसके पहुंचने से पहले ही दो पशुओं ने दम तोड़ दिया।
चार-पांच घंटे बाद दो पशु और खत्म हो गए। सूचना पर नजदीकी पशु चिकित्सालय से स्टाफ गांव में पहुंचा। मगर यहां गौर करने लायक बात यह है कि स्टाफ बगैर दवाई के गांव में गया था। पशुओं की हालत देख किसानों को लिख कर दे दिया कि मेडिकल स्टोर से इन दवाइयों को लाकर खिलाओ।
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पशु सही हो जाएंगे, लेकिन सीधे सादे किसानों को शासन से मिलने वाली दवाई नहीं दी। जिससे बीमार पशुओं की हालत में सुधार नहीं हुआ। अब तक महकार सिंह के आठ पशुओं की मौत हो चुकी है। धर्मपाल सिंह के चार पशुओं ने भी दम तोड़ दिया। वहीं चंदू सिंह का बैल बीमार है। पशु चिकित्सा विभाग के रवैये से ग्रामीणों में बड़ा रोष है। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी का कहना है कि जहरीला चारा खाने से पशुओं की मौत हुई है। पशुओं का इलाज किया जा रहा है।
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हसनपुर तहसील क्षेत्र के महरपुर गुर्जर गांव निवासी अजीत सिंह ने कई दिन पूर्व पशुओं को लाकर गलती से कनेर के पत्ते खिला दिए थे। यह देख पड़ोसी महकार सिंह ने भी कनेर के पत्ते चारे में काट दिए। चारा खिलाने के कुछ घंटे बाद पशुओं की हालत बिगड़ गई। पशु चिकित्सक को उपचार के लिए बुलाया। उसके पहुंचने से पहले ही दो पशुओं ने दम तोड़ दिया।
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चार-पांच घंटे बाद दो पशु और खत्म हो गए। सूचना पर नजदीकी पशु चिकित्सालय से स्टाफ गांव में पहुंचा। मगर यहां गौर करने लायक बात यह है कि स्टाफ बगैर दवाई के गांव में गया था। पशुओं की हालत देख किसानों को लिख कर दे दिया कि मेडिकल स्टोर से इन दवाइयों को लाकर खिलाओ।
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पशु सही हो जाएंगे, लेकिन सीधे सादे किसानों को शासन से मिलने वाली दवाई नहीं दी। जिससे बीमार पशुओं की हालत में सुधार नहीं हुआ। अब तक महकार सिंह के आठ पशुओं की मौत हो चुकी है। धर्मपाल सिंह के चार पशुओं ने भी दम तोड़ दिया। वहीं चंदू सिंह का बैल बीमार है। पशु चिकित्सा विभाग के रवैये से ग्रामीणों में बड़ा रोष है। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी का कहना है कि जहरीला चारा खाने से पशुओं की मौत हुई है। पशुओं का इलाज किया जा रहा है।