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तिगरी मेला स्थल पर चिन्हिकरण में बाधक बन रहीं फसलें
Updated Mon, 09 Oct 2017 01:47 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
गजरौला।
तिगरी गंगा मेले की तैयारियों को जमीनी रूप देने के लिए मेला स्थल पर खड़ीं फसलें बाधक बन रही है। प्रमुख रास्तों व मेले का प्रारूप बनाने में फसलें आड़े आ रही हैं। बार-बार किसानों को चेताने के बावजूद भी इस तरफ कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा। रविवार को भी जिला पंचायत की जेई सुभाषचंद की टीम ने मेला स्थल पर प्रमुख मार्गों के चिन्हिकरण के कार्य को आगे बढ़ाया। लेकिन फसलों की वजह से चिहिन्ह करण का कार्य पूरा नहीं हो सका है। जेई ने किसानों की मनमानी की शिकायत जिलाधिकारी से की है।
कार्तिक पूर्णिमा पर तिगरी में लगने वाला पौराणिक तिगरी मेले का शुभारंभ पच्चीस अक्टूबर को हो जाएगा। यूं तो उत्तर प्रदेश सरकार ने तिगरी के पौराणिक मेले को सरकारी मेले का दर्जा दे दिया है। लेकिन मेले की शुरूआत करने के लिए यूपी सरकार की ओर से कोई कार्य आगे नहीं बढ़ाया जा सका है। पहले की तरह ही इस बार भी मेला कराने की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी जिला पंचायत के कंधों पर ही दिखाई दे रही है। मेले का प्रारूप यूं तो पिछले साल से ही मिलता जुलता रहेगा। लेकिन इस बार मेले की चौड़ाई कम होकर लंबाई बढ़ाई गई है। इससे मेला सदर समेत तमाम बिंदुओं के चिन्हिकरण का कार्य विशेष महत्व रखता है। तीन दिनों से जिला पंचायत के इंजीनियर्स की टीम मेला स्थल पर प्रमुख रास्तों से लेकर तमाम महत्वपूर्ण बिंदुओं को चिहिन्त करने का कार्य कर रही है। लेकिन इस कार्य में मेला स्थल पर खड़ीं, धान, उड़द, बाजरा व ढ़ेचा की फलस बाधक बनी हुई है। जिला पंचायत के जेई सुभाषचंद ने बताया कि जितना स्थान खाली दिखाई देता है, उतने स्थान को चिन्हित किया जा रहा है। जबकि जहां फसलें खड़ीं हैं। वहां चिन्हित करने में परेशानी आ रही है। इससे कार्य धीमी गति से आगे बढ़ रहा है। एक दिन के काम में चार दिन से ज्यादा लगने का अनुमान है। किसानों की मनमानी की शिकायत डीएम से की गई है।
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गजरौला।
तिगरी गंगा मेले की तैयारियों को जमीनी रूप देने के लिए मेला स्थल पर खड़ीं फसलें बाधक बन रही है। प्रमुख रास्तों व मेले का प्रारूप बनाने में फसलें आड़े आ रही हैं। बार-बार किसानों को चेताने के बावजूद भी इस तरफ कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा। रविवार को भी जिला पंचायत की जेई सुभाषचंद की टीम ने मेला स्थल पर प्रमुख मार्गों के चिन्हिकरण के कार्य को आगे बढ़ाया। लेकिन फसलों की वजह से चिहिन्ह करण का कार्य पूरा नहीं हो सका है। जेई ने किसानों की मनमानी की शिकायत जिलाधिकारी से की है।
कार्तिक पूर्णिमा पर तिगरी में लगने वाला पौराणिक तिगरी मेले का शुभारंभ पच्चीस अक्टूबर को हो जाएगा। यूं तो उत्तर प्रदेश सरकार ने तिगरी के पौराणिक मेले को सरकारी मेले का दर्जा दे दिया है। लेकिन मेले की शुरूआत करने के लिए यूपी सरकार की ओर से कोई कार्य आगे नहीं बढ़ाया जा सका है। पहले की तरह ही इस बार भी मेला कराने की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी जिला पंचायत के कंधों पर ही दिखाई दे रही है। मेले का प्रारूप यूं तो पिछले साल से ही मिलता जुलता रहेगा। लेकिन इस बार मेले की चौड़ाई कम होकर लंबाई बढ़ाई गई है। इससे मेला सदर समेत तमाम बिंदुओं के चिन्हिकरण का कार्य विशेष महत्व रखता है। तीन दिनों से जिला पंचायत के इंजीनियर्स की टीम मेला स्थल पर प्रमुख रास्तों से लेकर तमाम महत्वपूर्ण बिंदुओं को चिहिन्त करने का कार्य कर रही है। लेकिन इस कार्य में मेला स्थल पर खड़ीं, धान, उड़द, बाजरा व ढ़ेचा की फलस बाधक बनी हुई है। जिला पंचायत के जेई सुभाषचंद ने बताया कि जितना स्थान खाली दिखाई देता है, उतने स्थान को चिन्हित किया जा रहा है। जबकि जहां फसलें खड़ीं हैं। वहां चिन्हित करने में परेशानी आ रही है। इससे कार्य धीमी गति से आगे बढ़ रहा है। एक दिन के काम में चार दिन से ज्यादा लगने का अनुमान है। किसानों की मनमानी की शिकायत डीएम से की गई है।
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