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Amethi News: उद्योगनगरी एक्सप्रेस में बिगड़ी तबीयत, युवक की मौत
Fri, 07 Aug 2026 12:51 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
Updated Fri, 07 Aug 2026 12:51 AM IST
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भेटुआ के पूरे रामदयाल पांडेय का पुरवा गमगीन परिजन। स्रोत: ग्रामीण
मुंशीगंज। मुंबई से घर लौट रहे भेटुआ के पूरे रामदयाल पांडेय का पुरवा निवासी विजय यादव (32) की उद्योगनगरी एक्सप्रेस में तबीयत बिगड़ने से मौत हो गई। बृहस्पतिवार को शव गांव पहुंचा तो परिवार में मातम छा गया। पत्नी, मां और बच्चों का रो-रोकर बुरा हाल रहा।
परिजनों के अनुसार विजय यादव परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारने और मकान बनवाने के लिए करीब तीन माह पहले मुंबई मजदूरी करने गए थे। मंगलवार को वह उद्योग नगरी एक्सप्रेस से प्रतापगढ़ लौट रहे थे। सफर के दौरान ललितपुर स्टेशन के पास उनकी तबीयत बिगड़ गई। रेलवे कर्मियों ने उन्हें ट्रेन से उतारा, लेकिन तब तक उनकी मौत हो चुकी थी।
बुधवार सुबह रेलवे की ओर से परिजनों को सूचना दी गई। इसके बाद परिवार के लोग रात में ललितपुर पहुंचे, जहां पोस्टमार्टम के बाद शव उन्हें सौंप दिया गया। परिजनों ने बताया कि करीब 20 दिन पहले विजय ने फोन पर बुखार आने की बात कही थी। बाद में उन्होंने तबीयत ठीक होने की जानकारी दी थी, लेकिन यात्रा के दौरान अचानक क्या हुआ, यह स्पष्ट नहीं हो सका। बृहस्पतिवार दोपहर करीब तीन बजे जैसे ही शव गांव पहुंचा, पत्नी सुशीला बेसुध हो गईं।
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बुजुर्ग मां निर्मला बेटे के शव से लिपटकर बिलखती रहीं। बेटा आयुष और बेटी आर्या के आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे। बड़े भाई धर्मराज यादव ने बताया कि विजय ही परिवार की आजीविका का मुख्य सहारा थे।
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परिजनों के अनुसार विजय यादव परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारने और मकान बनवाने के लिए करीब तीन माह पहले मुंबई मजदूरी करने गए थे। मंगलवार को वह उद्योग नगरी एक्सप्रेस से प्रतापगढ़ लौट रहे थे। सफर के दौरान ललितपुर स्टेशन के पास उनकी तबीयत बिगड़ गई। रेलवे कर्मियों ने उन्हें ट्रेन से उतारा, लेकिन तब तक उनकी मौत हो चुकी थी।
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बुधवार सुबह रेलवे की ओर से परिजनों को सूचना दी गई। इसके बाद परिवार के लोग रात में ललितपुर पहुंचे, जहां पोस्टमार्टम के बाद शव उन्हें सौंप दिया गया। परिजनों ने बताया कि करीब 20 दिन पहले विजय ने फोन पर बुखार आने की बात कही थी। बाद में उन्होंने तबीयत ठीक होने की जानकारी दी थी, लेकिन यात्रा के दौरान अचानक क्या हुआ, यह स्पष्ट नहीं हो सका। बृहस्पतिवार दोपहर करीब तीन बजे जैसे ही शव गांव पहुंचा, पत्नी सुशीला बेसुध हो गईं।
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बुजुर्ग मां निर्मला बेटे के शव से लिपटकर बिलखती रहीं। बेटा आयुष और बेटी आर्या के आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे। बड़े भाई धर्मराज यादव ने बताया कि विजय ही परिवार की आजीविका का मुख्य सहारा थे।