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Amethi News: मंत्रोच्चार के बीच 102 बटुकों का हुआ यज्ञोपवीत संस्कार
Wed, 12 Mar 2025 12:05 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
Updated Wed, 12 Mar 2025 12:05 AM IST
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टीकरमाफी स्थित श्रीमत् स्वामी परमहंस आश्रम परिसर में आयोजित कार्यक्रम में मौजूद बटुक।-स्रोत :
संग्रामपुर (अमेठी)। टीकरमाफी स्थित श्रीमत स्वामी परमहंस आश्रम परिसर में मंगलवार को 102 बटुकों का यज्ञोपवीत या जनेऊ संस्कार वैदिक परंपरा के अनुसार हुआ। यज्ञोपवीत संस्कार में पहुंचे बटुकों के माता-पिता ने उनका शृंगार कर भिक्षा दी तो गुरुजनों ने उनका उपनयन संस्कार किया। वहीं रामचरितमानस का परायण भी हुआ।
फाल्गुन शुक्ल की त्रयोदशी को टीकरमाफी स्थित सिद्धपीठ श्रीमत स्वामी परमहंस आश्रम परिसर में प्रति वर्ष स्वामी परमहंस मराराज की पुण्यतिथि पर आश्रम में यज्ञ और भंडारे का आयोजन होता है। कार्यक्रम के पूर्व प्रदोष तिथि को आश्रम स्थित संस्कृत माध्यमिक व महाविद्यालय में नव प्रवेशी ब्राह्मण बटुकों का यज्ञोपवीत संस्कार भी किया जाता है। मंगलवार को आश्रम व महाविद्यालय प्रबंधक स्वामी हरिचैतन्य ब्रह्मचारी महाराज की मौजूदगी में महाविद्यालय के आचार्यों ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच 102 ब्राह्मण बटुकों का यज्ञोपवीत संस्कार संपन्न कराया।
इस दौरान महाविद्यालय के आचार्यों ने ब्राह्मण बटुकों को गुरुमंत्र देकर उन्हें गुरुकुल परंपरा में शामिल कर संस्कार की जानकारी दी। बटुकों के माता-पिता ने यज्ञोपवीत धारण किए बच्चों को अन्न, वस्त्र व द्रव्य का दान देकर उन्हें गुरुकुल परंपरा को आगे बढ़ाने का आशीर्वाद दिया। स्वामी हरिचैतन्य ब्रह्मचारी महाराज ने यज्ञोपवीत संस्कार का महत्व बताते हुए कहा कि हर व्यक्ति जन्म से शूद्र होता है, पर कर्म के अनुसार उसकी जाति विभाजित होती है। यज्ञोपवीत धारण करने वाले मनुष्य को कई नियम का पालन करना होता है, तभी यज्ञोपवीत संस्कार का महत्व होता है। यज्ञोपवीत के बाद तालाब में स्नान वर्जित हो जाता है। महिलाओं के पास बैठने में भी मनाही हो जाती है। ब्रह्मचर्य जैसे नियमों का पालन करना होता है।
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अपने गुरु और माता-पिता के साथ बड़ों का भी सम्मान करना होता है। इस दौरान स्वामी हर्ष चैतन्य ब्रह्मचारी, संतोष सिंह, कुलदीप, बृजेंद्र सिंह, पूर्व प्राचार्य स्वामी प्रसाद त्रिपाठी, जयदेव त्रिपाठी, धर्मेंद्र कुमार मिश्रा, दुर्गा शंकर, विद्या शंकर, अनिल व्यास, चंद्रदेव त्रिपाठी आदि मौजूद रहे।
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फाल्गुन शुक्ल की त्रयोदशी को टीकरमाफी स्थित सिद्धपीठ श्रीमत स्वामी परमहंस आश्रम परिसर में प्रति वर्ष स्वामी परमहंस मराराज की पुण्यतिथि पर आश्रम में यज्ञ और भंडारे का आयोजन होता है। कार्यक्रम के पूर्व प्रदोष तिथि को आश्रम स्थित संस्कृत माध्यमिक व महाविद्यालय में नव प्रवेशी ब्राह्मण बटुकों का यज्ञोपवीत संस्कार भी किया जाता है। मंगलवार को आश्रम व महाविद्यालय प्रबंधक स्वामी हरिचैतन्य ब्रह्मचारी महाराज की मौजूदगी में महाविद्यालय के आचार्यों ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच 102 ब्राह्मण बटुकों का यज्ञोपवीत संस्कार संपन्न कराया।
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इस दौरान महाविद्यालय के आचार्यों ने ब्राह्मण बटुकों को गुरुमंत्र देकर उन्हें गुरुकुल परंपरा में शामिल कर संस्कार की जानकारी दी। बटुकों के माता-पिता ने यज्ञोपवीत धारण किए बच्चों को अन्न, वस्त्र व द्रव्य का दान देकर उन्हें गुरुकुल परंपरा को आगे बढ़ाने का आशीर्वाद दिया। स्वामी हरिचैतन्य ब्रह्मचारी महाराज ने यज्ञोपवीत संस्कार का महत्व बताते हुए कहा कि हर व्यक्ति जन्म से शूद्र होता है, पर कर्म के अनुसार उसकी जाति विभाजित होती है। यज्ञोपवीत धारण करने वाले मनुष्य को कई नियम का पालन करना होता है, तभी यज्ञोपवीत संस्कार का महत्व होता है। यज्ञोपवीत के बाद तालाब में स्नान वर्जित हो जाता है। महिलाओं के पास बैठने में भी मनाही हो जाती है। ब्रह्मचर्य जैसे नियमों का पालन करना होता है।
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अपने गुरु और माता-पिता के साथ बड़ों का भी सम्मान करना होता है। इस दौरान स्वामी हर्ष चैतन्य ब्रह्मचारी, संतोष सिंह, कुलदीप, बृजेंद्र सिंह, पूर्व प्राचार्य स्वामी प्रसाद त्रिपाठी, जयदेव त्रिपाठी, धर्मेंद्र कुमार मिश्रा, दुर्गा शंकर, विद्या शंकर, अनिल व्यास, चंद्रदेव त्रिपाठी आदि मौजूद रहे।