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डेंगू पीड़ित मासूम की इलाज के दौरान मौत
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गौरीगंज : जिला अस्पताल में उपचार कराने के बारी का इंतजार करते मरीज। -संवाद
- फोटो : AMETHI
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गौरीगंज (अमेठी)। डेंगू पीड़ित मासूम की इलाज के दौरान लखनऊ के एक निजी अस्पताल में मौत हो गई। परिवारीजन पहले मासूम को राम मनोहर लोहिया अस्पताल ले गए, जहां बेड नहीं मिलने के बाद उसे एक निजी अस्पताल में भर्ती किया था। मौत के बाद परिवारीजनों में कोहराम मचा है।
सिंहपुर ब्लॉक क्षेत्र के गांव उसरहा मजरे जेहटा निवासी मोहित अवस्थी का ढाई वर्षीय पुत्र ओम अवस्थी पिछले दिनों बुखार से पीड़ित था। परिजन पहले उसे जगदीशपुर स्थित एक निजी अस्पताल में इलाज कराने ले गए। मासूम की तबीयत बिगड़ते देख परिवारीजन उसे पांच नवंबर की देर शाम लखनऊ के डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल ले गए।
पिता मोहित के अनुसार वहां चिकित्सकों ने कहा कि बच्चे को डेंगू है और उनके यहां बेड नहीं खाली है, कहीं और ले जाकर इलाज कराएं। बेड खाली नहीं होने के चलते वे बेटे को एक निजी अस्पताल में ले गए और भर्ती करा दिया। वहां दो दिन तक चले इलाज के बाद मंगलवार सुबह उसकी मौत हो गई।
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सीएमओ डॉ. विमलेंदु शेखर ने बताया कि मासूम की डेंगू से मौत की सूचना मिली है। उसका इलाज जिले के किसी भी सरकारी अस्पताल में नहीं कराया गया था। परिजन तबीयत खराब होने पर सीधे लखनऊ ले गए थे। सूचना मिलते ही सीएचसी अधीक्षक को गांव में रैपिड रिस्पांस टीम भेजकर निरोधात्मक कार्रवाई कराने का निर्देश दिया गया है।
मोहित अवस्थी की दो ही संतानें थीं। छह वर्ष की बड़ी बेटी मीठी अवस्थी की 12 अगस्त 2021 को कोरोना से मौत हो गई थी। अब बेटे की भी मौत होने के बाद पूरा परिवार टूट गया है। मां बेहोशी की हालात में है, जबकि पिता की आंखों के आंसू मानो सूख गए हों। मौत की सूचना गांव में आते ही मोहित अवस्थी के घर सांत्वना देने वालों का तांता लगा रहा। पूरा परिवार मासूम की मौत के बाद शोक में डूबा है।
संचारी रोग के नोडल/ एसीएमओ डॉ. राम प्रसाद ने बताया कि सूचना मिलते ही सीएचसी अधीक्षक डॉ. सुनील चौधरी को पीड़ित के घर भेजा गया। परिजन के पास मौजूद जांच रिपोर्ट व अस्पताल से मिले सभी प्रपत्रों का अवलोकन कराया गया। जांच रिपोर्ट में मासूम टायफायड पॉजिटिव था, प्लेटलेट भी 75 हजार थी।
बताया कि डेंगू की पुष्टि के लिए की गई एनएस-1, आईजीएम व आईजीजी तीनों रिपोर्ट निगेटिव हैं। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार अब तक जिले में बुखार पीड़ित मरीजों में से 46 में डेंगू की पुष्टि हुई है। 68 मरीजों की एलाइजा जांच के लिए सीरम सैंपल लेकर जांच के लिए भेजा जा चुका है।
कार्तिक पूर्णिमा का असर मंगलवार को जिला अस्पतालों समेत सभी सीएचसी-पीएचसी पर पर दिखाई पड़ा। एक हजार की ओपीडी वाले जिला अस्पताल में महज 319 मरीज आए। इसमें 98 मरीज बुखार से पीड़ित मिले। मंगलवार को अवकाश होने के चलते सभी सरकारी अस्पतालों की ओपीडी 12 बजे तक संचालित हुई।
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सिंहपुर ब्लॉक क्षेत्र के गांव उसरहा मजरे जेहटा निवासी मोहित अवस्थी का ढाई वर्षीय पुत्र ओम अवस्थी पिछले दिनों बुखार से पीड़ित था। परिजन पहले उसे जगदीशपुर स्थित एक निजी अस्पताल में इलाज कराने ले गए। मासूम की तबीयत बिगड़ते देख परिवारीजन उसे पांच नवंबर की देर शाम लखनऊ के डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल ले गए।
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पिता मोहित के अनुसार वहां चिकित्सकों ने कहा कि बच्चे को डेंगू है और उनके यहां बेड नहीं खाली है, कहीं और ले जाकर इलाज कराएं। बेड खाली नहीं होने के चलते वे बेटे को एक निजी अस्पताल में ले गए और भर्ती करा दिया। वहां दो दिन तक चले इलाज के बाद मंगलवार सुबह उसकी मौत हो गई।
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सीएमओ डॉ. विमलेंदु शेखर ने बताया कि मासूम की डेंगू से मौत की सूचना मिली है। उसका इलाज जिले के किसी भी सरकारी अस्पताल में नहीं कराया गया था। परिजन तबीयत खराब होने पर सीधे लखनऊ ले गए थे। सूचना मिलते ही सीएचसी अधीक्षक को गांव में रैपिड रिस्पांस टीम भेजकर निरोधात्मक कार्रवाई कराने का निर्देश दिया गया है।
मोहित अवस्थी की दो ही संतानें थीं। छह वर्ष की बड़ी बेटी मीठी अवस्थी की 12 अगस्त 2021 को कोरोना से मौत हो गई थी। अब बेटे की भी मौत होने के बाद पूरा परिवार टूट गया है। मां बेहोशी की हालात में है, जबकि पिता की आंखों के आंसू मानो सूख गए हों। मौत की सूचना गांव में आते ही मोहित अवस्थी के घर सांत्वना देने वालों का तांता लगा रहा। पूरा परिवार मासूम की मौत के बाद शोक में डूबा है।
संचारी रोग के नोडल/ एसीएमओ डॉ. राम प्रसाद ने बताया कि सूचना मिलते ही सीएचसी अधीक्षक डॉ. सुनील चौधरी को पीड़ित के घर भेजा गया। परिजन के पास मौजूद जांच रिपोर्ट व अस्पताल से मिले सभी प्रपत्रों का अवलोकन कराया गया। जांच रिपोर्ट में मासूम टायफायड पॉजिटिव था, प्लेटलेट भी 75 हजार थी।
बताया कि डेंगू की पुष्टि के लिए की गई एनएस-1, आईजीएम व आईजीजी तीनों रिपोर्ट निगेटिव हैं। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार अब तक जिले में बुखार पीड़ित मरीजों में से 46 में डेंगू की पुष्टि हुई है। 68 मरीजों की एलाइजा जांच के लिए सीरम सैंपल लेकर जांच के लिए भेजा जा चुका है।
कार्तिक पूर्णिमा का असर मंगलवार को जिला अस्पतालों समेत सभी सीएचसी-पीएचसी पर पर दिखाई पड़ा। एक हजार की ओपीडी वाले जिला अस्पताल में महज 319 मरीज आए। इसमें 98 मरीज बुखार से पीड़ित मिले। मंगलवार को अवकाश होने के चलते सभी सरकारी अस्पतालों की ओपीडी 12 बजे तक संचालित हुई।