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Amethi News: बच्चों के लिए जिला अस्पताल में अलग वार्ड नहीं
Sat, 02 Aug 2025 12:17 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
Updated Sat, 02 Aug 2025 12:17 AM IST
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अमेठी सिटी। अगर आप अपने बीमार बच्चे को संयुक्त जिला अस्पताल ला रहे हैं तो उसको सामान्य मरीजों के बीच में ही भर्ती कराना होगा। यहां अलग से बच्चों के लिए कोई वार्ड नहीं है।
हालत ये है कि एक वर्ष से दस वर्ष आयु वर्ग तक के बीमार बच्चों को जनरल वार्ड में अन्य मरीजों के साथ भर्ती किया जा रहा है। परिजनों को हमेशा यही चिंता रहती है कि कहीं उनके बच्चों को संक्रमण न हो जाए। उन्होंने अस्पताल प्रशासन से अलग वार्ड बनाने की मांग उठाई है।
जिला मुख्यालय स्थित संयुक्त जिला चिकित्सालय में प्रतिदिन लगभग एक हजार मरीज ओपीडी में पहुंच रहे हैं। इनमें करीब 300 से अधिक बच्चे वायरल बुखार, सर्दी-जुकाम, डायरिया और अन्य बीमारियों से पीड़ित हैं। इन बच्चों को भी अन्य मरीजों की तरह जनरल वार्ड में ही भर्ती किया जा रहा है।
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जनरल वार्ड में गंभीर रोगों से पीड़ित वयस्क मरीजों के साथ भर्ती किए जाने से बच्चों में संक्रमण की आशंका बनी रहती है। विशेषज्ञों का कहना है कि छोटे बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होती है, ऐसे में उन्हें विशेष देखभाल की जरूरत होती है। हालांकि अस्पताल प्रशासन का कहना है कि कोविड संक्रमण के दौरान बच्चों को अलग वार्ड में रखा गया था, क्योंकि उस समय उनके लिए विशेष सावधानी बरतना आवश्यक था। वर्तमान में गंभीर महामारी की स्थिति न होने से बच्चों को जनरल वार्ड में ही भर्ती किया जा रहा है।
कुपोषित बच्चों के लिए है अलग वार्ड
संयुक्त जिला अस्पताल में कुपोषित बच्चों के लिए दस बिस्तरों वाला एक अलग वार्ड संचालित है, जहां ऐसे बच्चों का उपचार किया जा रहा है। लेकिन सामान्य बीमारियों से पीड़ित बच्चों के लिए कोई अलग वार्ड नहीं है।
अलग से कोई वार्ड आरक्षित नहीं
सीएमएस डॉ. बद्री प्रसाद अग्रवाल ने बताया कि यह संयुक्त जिला अस्पताल है, जिसमें बच्चों के लिए अलग वार्ड आरक्षित नहीं है। जनरल वार्ड में ही बेहतर चिकित्सकीय सेवाओं के साथ बच्चों का उपचार किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि विशेष परिस्थितियों में ही बच्चों के लिए वार्ड आरक्षित करने की व्यवस्था करते हैं।
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हालत ये है कि एक वर्ष से दस वर्ष आयु वर्ग तक के बीमार बच्चों को जनरल वार्ड में अन्य मरीजों के साथ भर्ती किया जा रहा है। परिजनों को हमेशा यही चिंता रहती है कि कहीं उनके बच्चों को संक्रमण न हो जाए। उन्होंने अस्पताल प्रशासन से अलग वार्ड बनाने की मांग उठाई है।
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जिला मुख्यालय स्थित संयुक्त जिला चिकित्सालय में प्रतिदिन लगभग एक हजार मरीज ओपीडी में पहुंच रहे हैं। इनमें करीब 300 से अधिक बच्चे वायरल बुखार, सर्दी-जुकाम, डायरिया और अन्य बीमारियों से पीड़ित हैं। इन बच्चों को भी अन्य मरीजों की तरह जनरल वार्ड में ही भर्ती किया जा रहा है।
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जनरल वार्ड में गंभीर रोगों से पीड़ित वयस्क मरीजों के साथ भर्ती किए जाने से बच्चों में संक्रमण की आशंका बनी रहती है। विशेषज्ञों का कहना है कि छोटे बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होती है, ऐसे में उन्हें विशेष देखभाल की जरूरत होती है। हालांकि अस्पताल प्रशासन का कहना है कि कोविड संक्रमण के दौरान बच्चों को अलग वार्ड में रखा गया था, क्योंकि उस समय उनके लिए विशेष सावधानी बरतना आवश्यक था। वर्तमान में गंभीर महामारी की स्थिति न होने से बच्चों को जनरल वार्ड में ही भर्ती किया जा रहा है।
कुपोषित बच्चों के लिए है अलग वार्ड
संयुक्त जिला अस्पताल में कुपोषित बच्चों के लिए दस बिस्तरों वाला एक अलग वार्ड संचालित है, जहां ऐसे बच्चों का उपचार किया जा रहा है। लेकिन सामान्य बीमारियों से पीड़ित बच्चों के लिए कोई अलग वार्ड नहीं है।
अलग से कोई वार्ड आरक्षित नहीं
सीएमएस डॉ. बद्री प्रसाद अग्रवाल ने बताया कि यह संयुक्त जिला अस्पताल है, जिसमें बच्चों के लिए अलग वार्ड आरक्षित नहीं है। जनरल वार्ड में ही बेहतर चिकित्सकीय सेवाओं के साथ बच्चों का उपचार किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि विशेष परिस्थितियों में ही बच्चों के लिए वार्ड आरक्षित करने की व्यवस्था करते हैं।